सभी शक्तिपीठ और देवस्थान ‘तीर्थ दर्शन योजना’ में होंगे शामिल

तीर्थ दर्शन योजना
  • समृद्ध इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सीएम का एलान

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के दोनों ज्योतिर्लिंग उज्जैन और ओंकारेश्वर, प्रसिद्ध मंदिरों, शक्तिपीठों और देवस्थानों व अन्य धार्मिक स्थलों को भी मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में शामिल किया जाए। प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए योजना बनाकर ठोस प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के नाम से अकादमी स्थापित की जाए, जिसमें उनके जीवनवृत्त पर समग्र शोध एवं अन्य गतिविधियां भी संचालित हो सकें। भोपाल के जगदीशपुर स्थित पुराने किले के इतिहास को जीवंत करने और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जल्द ही यहां स्टेट कैबिनेट मीटिंग की जाएगी। सोमवार को मंत्रालय में संस्कृति विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने यह बात कही।
    सांस्कृतिक धरोहर और नए आयोजनों के निर्देश
    उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सके। संस्कृति विभाग सभी समाजों को उनकी आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं से जोडक़र बड़े आयोजन करे। आल्हा-ऊदल वीर रस गायन के प्रतीक हैं, उनकी स्मृति में आयोजन किए जाएं। श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व भी मनाएं। नागपंचमी पर जैव विविधता संरक्षण (सर्प प्रजातियों के संरक्षण) का संदेश दिया जाए। संस्कृति विभाग की और बेहतर पुनर्संरचना की जाये। विभागीय गतिविधियों का आधुनिक संदर्भों में विस्तार भी किया जाए। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग सभी मिलकर काम करें, ताकि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले।
    कलाकारों का सम्मान और पद्म पुरस्कारों के लिए स्थायी योजना
    मप्र में जन्मे गायकों, कलाकारों और अन्य जनों की जानकारी एकत्रित कर इन्हें प्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए राजी किया जाए। पद्म पुरस्कारों के लिए प्रदेश के कलाकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों के केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर संस्कृति विभाग भी अपनी ओर से अनुशंसा करे। पद्म सम्मान प्राप्त विभूतियों की आर्थिक मदद के लिए एक स्थायी योजना तैयार की जाए, जिससे जरूरतमंदों को शासन की योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा सके।
    चमन महल को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
    मुख्यमंत्री ने भोपाल के पास इस्लामनगर (जगदीशपुर) स्थित पुराने किले चमन महल की जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि इस किले के इतिहास को जीवंत करने और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भविष्य में जल्द ही यहां स्टेट कैबिनेट मीटिंग की जायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्मे या यहां से निकलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले गायकों, कलाकारों और अन्य जनों की जानकारी एकत्रित कर इन्हें मध्यप्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए राजी किया जाए। इससे मध्यप्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक विविधताओं को देश-दुनिया में नई पहचान और एक्सपोजर मिलेगा और अपनी माटी से जुडक़र ऐसे कलाकारों को भी खुशी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पद्म पुरस्कारों के लिए प्रदेश के कलाकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों के केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर संस्कृति विभाग भी अपनी ओर से अनुशंसा करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं की आर्थिक मदद के लिए एक स्थायी योजना तैयार की जाये, ताकि जरुरतमंदों को शासन की योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा सके।

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