मध्यप्रदेश में घाटे में चल रहे 9 सरकारी कृषि फार्म

कृषि फार्म

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बताने वाली सरकार अपने ही कृषि फार्म में घाटे से उबर नहीं पा रही है। प्रदेश भर में मौजूद 46 कृषि फार्म में से 9 घाटे में हैं। सरकार मानती है कि इन कृषि फार्म से होने वाली घाटे की वजह मौसम आधारित खेती और मौसम की प्रतिकूलता है। कृषि फार्मों में प्राकृतिक और मानव संसाधन की कमी का भी असर घाटे की वजह है। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के मंत्री एदल सिंह कंसाना ने यह जानकारी विधायक राजन मंडलोई के सवाल के लिखित जवाब में दी है। उन्होंने कहा है कि खेती करने में उपयोग में आने वाले बीज और अन्य सामान का बाजार मूल्य काफी अधिक होना भी खेती से होने वाले फायदे पर असर डालता है। घाटे में चलने वाले फार्म की स्थिति का अंदाजा इससे लगता है कि रीवा जिले के जितनी फार्म में वर्ष 2024-25 में 26 लाख 91 हजार रुपए खेती पर खर्च किए गए और आमदनी सिर्फ 1 लाख 52 हजार रुपए की हुई। भोपाल जिले के चाचेड़ फार्म में 42.50 लाख रुपए खेती पर खर्च किए गए और उससे आमदनी सिर्फ 17.85 लाख रुपए की हुई। ऐसी ही स्थिति अन्य फार्म हाउस के मामले में है। एमपी में घाटे में चलने वाले 9 कृषि फार्म पर पांच साल में 8 करोड़ 99 लाख 86 हजार रुपए खर्च किए गए। इसके विपरीत आमदनी 4 करोड़ 4 लाख 90 हजार रुपए ही हुई।
इन जिलों में मौजूद हैं कृषि फार्म
प्रदेश में रीवा जिले में तिजनी, फरहदी, सतना जिले में गहवरा, सीधी में समदा, शहडोल में बिरहुलिया, शहरगढ़, उमरिया में मानपुर, दमोह में जबेरा में शासकीय कृषि फार्म है। यहां शासन की ओर से खेती कराई जाती है।

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