- 1954 से अब तक के सभी जमीन रिकॉर्ड तीन महीने में ऑनलाइन, घर बैठे मिलेंगे दस्तावेज
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में राजस्व सेवाओं को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भोपाल जिला प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू की है। अब वर्ष 1954 से अब तक के सभी भू-अभिलेखों को डिजिटल किया जाएगा, जिससे जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों के लिए लोगों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अगले तीन महीने में शहर सहित जिले के 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को इस सुविधा का लाभ मिलने लगेगा। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिक खसरा, खतौनी, नामांतरण, राजस्व अभिलेख और अन्य दस्तावेज घर बैठे ऑनलाइन देख सकेंगे। आवश्यकता होने पर उनकी प्रमाणित प्रतियां भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक ऋण, नामांतरण और न्यायालयीन मामलों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक तेज और सरल हो जाएंगी।
एक जगह सुरक्षित होगा रिकॉर्ड का पूरा खजाना
वर्तमान में पुराने भू-अभिलेखों का बड़ा हिस्सा मिंटो हॉल के पास स्थित रिकॉर्ड रूम में रखा गया है, जबकि कुछ दस्तावेज कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षित हैं। अलग-अलग स्थानों पर रिकॉर्ड होने के कारण अधिकारियों और आम नागरिकों दोनों को परेशानी होती है। प्रशासन अब सभी पुराने दस्तावेजों को एक स्थान पर सुरक्षित रखने की योजना पर भी काम कर रहा है, जिससे रिकॉर्ड का प्रबंधन अधिक व्यवस्थित और सुगम हो सके। कलेक्ट्रेट के सामने स्थित काशियाना बंगले में जबलपुर कलेक्ट्रेट की तर्ज पर अत्याधुनिक सेंट्रल रिकॉर्ड सेंटर विकसित किया जा रहा है। यहां आधुनिक रैक, बेहतर संरक्षण प्रणाली और व्यवस्थित फाइल प्रबंधन की व्यवस्था होगी, जिससे दशकों पुराने दस्तावेज लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद मूल दस्तावेजों के संरक्षण और रखरखाव में भी आसानी होगी।
तीन चरणों में होगा डिजिटाइजेशन
भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। पहले चरण में वर्ष 1954 से अब तक के सभी दस्तावेजों की उच्च गुणवत्ता में स्कैनिंग होगी। इसके बाद प्रत्येक दस्तावेज का डिजिटल डेटा तैयार किया जाएगा। तीसरे चरण में संबंधित क्षेत्र के पटवारी ऑनलाइन सत्यापन करेंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद रिकॉर्ड को भूलेख पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा, जहां से नागरिक कभी भी अपनी जमीन का रिकॉर्ड देख सकेंगे।
वर्षों पुरानी परेशानी से मिलेगी राहत
अभी तक पुराने भू-अभिलेख अलग-अलग रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखे गए हैं। कई दस्तावेज इतने पुराने हैं कि उनकी स्थिति खराब होने लगी है। ऐसे में किसी विशेष रिकॉर्ड को ढूंढऩा और उसकी प्रमाणित प्रति जारी करना समय लेने वाली प्रक्रिया बन जाती है। लोक सेवा गारंटी के तहत आवेदन करने के बावजूद कई मामलों में रिकॉर्ड उपलब्ध होने में सप्ताहों या महीनों का समय लग जाता है। डिजिटाइजेशन के बाद यह पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।
