
- बाघों की मौत में मप्र अव्वल
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। देश में टाइगर स्टेट का तमगा रखने वाले मप्र में इस साल 11 महीने में ही अब तक 48 बाघ और शावकों की मौत हो गई। यह देशभर में इस साल हुई सबसे ज्यादा मौतों का आंकड़ा है। इसके बाद महाराष्ट्र है। चौंकाने वाली बात यह है कि मरने वाले बाघों में से 5 से 8 साल के उम्र की बाघिने भी हैं। ये प्रदेश में बाघों कुनबा बढ़ाने में मददगार साबित होतीं। मौतों की बड़ी वजह सरकारी लापरवाही और निगरानी तंत्र का फेल होना है। हालांकि कुछ मामलों में आपसी संघर्ष भी बाघों की जान गई है।
प्रदेश में एक तरफ बाघों की गणना करने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ बाघों की मौत के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2013 से लेकर अब तक के आंकड़ों का आकलन करने पर यह तथ्य सामने आया है कि विगत 13 वर्षों में इस साल प्रदेश में सबसे अधिक बाघों की मौत हुई है। 2013 में 11 बाघों की मौत हुई थी। वहीं 2014 में 15, 2015 में 13, 2016 में 31, 2017 में 10, 2018 में 25, 2019 में 28, 2020 में 26, 2021 में 41, 2022 में 34, 2023 में 43, 2024 में 47 और 2025 में अभी तक 48 बाघों की मौत हो चुकी है।
इस बार रिकॉर्ड मौत
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में इस साल अब तक 48 बाघों की मौत हो चुकी है। यह देश में सबसे ज्यादा है। वहीं इस साल हुई बाघों की मौत के आंकड़ों ने पिछले सालों के सारे रिकॉर्ड भी तोड़ दिए हैं। साल के आखिर तक बाघों की मौत का आंकड़ा 50 से ऊपर पहुंच जाएगा। मप्र में पिछले साल 47 बाघों की मौत हुई थी। यह भी पिछले सालों में सबसे ज्यादा थी। अब पिछले साल की मौतों का रिकॉर्ड भी टूट गया है। गौरतलब है कि साल 2022 की बाघ गणना में मप्र में बाघों की संख्या 785 थी। बाघों की इस संख्या के साथ मप्र को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला था। बाघ गणना 2022 से 2025 तक चार साल हो गई हैं। अब बाघों की नई गणना भी शुरू हो चुकी है। पिछली बाघ गणना से अब तक प्रदेश में 172 बाघों की मौत हो चुकी है। प्रदेश में बढ़ रहे बाघों की मौत के आंकड़े नई बाघ गणना को भी प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में वन अधिकारियों का कहना है कि बाघों की संख्या बढऩे की वजह से बाघों की मौत के आंकड़े बढ़े हैं।
पिछली गणना में थे 563 बाघ
प्रदेश में पिछली गणना में टाइगर रिजर्व के भीतर 563 बाघ मिले थे। सबसे ज्यादा 165 बाघ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में थे। वहीं कान्हा टाइगर रिजर्व में 129 और पेंच टाइगर रिजर्व में 123 बाघ थे। कान्हां और पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। इस वजह से इन टाइगर रिजर्व में बाघों के बीच आपसी संघर्ष के मामले बढ़ गए। हैरत की बात यह है कि बाघों के लिए संरक्षित क्षेत्र टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा बाघ मारे जा रहे हैं। इस साल अब तक 29 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के भीतर हुई है। टाइगर रिजर्व के भीतर बाघों के मौत के आंकडे बढऩे की वजह बाघों के बीच आपसी संघर्ष बताया जा रहा है। वन अधिकारियों के मुताबिक टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बाघों की संख्या बढ़ गई है। इससे बाघों के बीच आपसी संघर्ष बढऩे लगा है। कमजोर बाघ अपनी टेरेटरी छोडकऱ टाइगर रिजर्व से बाहर जा रहे हैं। ऐसे टाइगर रिजर्व के बाहर भी बाघों की मौत के मामले बढ़े हैं। बाघों की मौत के मामले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आगे रहता था। इस बार बाघों की मौत के नए स्पॉट पैच और कान्हा टाइगर रिजर्व बन गए है। इन टाइगर रिजर्व में इस साल बाघों की ज्यादा मौत हुई है। यह भी चिंता की बात है। प्रदेश में बाघों की संख्या बढऩे के साथ ही शिकार की घटनाएं भी बढ़ी हैं। इस साल बाघों के शिकार के भी कई मामले पकड़ में आए है।
