
- भोपाल में 20 दिन में 3 ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने हटाया
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। विदिशा की 35 वर्षीय महिला के शरीर में कूल्हे से नीचे तक फैला 4.5 फुट लंबा ट्यूमर धीरे-धीरे उसकी जिंदगी को निगल रहा था। चलना-फिरना, बैठना, यहां तक कि ठीक से सो पाना भी मुश्किल हो गया था। तीन छोटे बच्चों की मां इस महिला के सामने इलाज से ज्यादा चिंता अपने परिवार की थी। निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च होने की आशंका थी। ऐसे में भोपाल स्थित भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) के डॉक्टरों ने जोखिम उठाते हुए 20 दिनों में तीन बड़े ऑपरेशन कर न केवल ट्यूमर हटाया, बल्कि उसकी नई जिंदगी भी लौटाई। महिला मल्टीपल न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नामक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से पीडि़त थी। इस बीमारी में नसों पर गांठें बनती हैं। समय के साथ कूल्हे पर बनी एक गांठ ने विकराल रूप ले लिया और कैंसरयुक्त ट्यूमर में बदल गई। ट्यूमर इतना बड़ा हो चुका था कि गर्दन से घुटने तक उसका फैलाव दिखाई दे रहा था। कूल्हे का हिस्सा सामान्य आकार से कई गुना बढ़ गया था। नसें और रक्तवाहिनियां ट्यूमर के ऊपर साफ दिखाई दे रही थीं, जिससे ऑपरेशन बेहद जटिल हो गया था।
एक साथ ऑपरेशन करना था जानलेवा
कैंसर सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनवीर गौतम ने बताया कि ट्यूमर अत्यधिक रक्तवाहिनियों से जुड़ा हुआ था। यदि एक ही बार में इसे हटाने की कोशिश की जाती तो भारी रक्तस्राव हो सकता था, जो जान के लिए खतरा बन सकता था। ऐसे मामलों में कई सर्जन ऑपरेशन से परहेज करते हैं, लेकिन बीएमएचआरसी की टीम ने जोखिम को समझते हुए चरणबद्ध सर्जरी का फैसला लिया।
रक्त आपूर्ति रोकी गई
सबसे पहले ट्यूमर तक जाने वाली बड़ी रक्तवाहिनियों की रक्त आपूर्ति रोकी गई। इसे डीवेस्कुलराइजेशन कहा जाता है। इससे खून बहने का खतरा कम हुआ।
एम्बोलाइजेशन प्रक्रिया: रेडियोलॉजी विभाग के विजिटिंग इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अंकित शाह ने एम्बोलाइजेशन की प्रक्रिया की। इसमें ट्यूमर के अंदर की छोटी रक्तवाहिनियों को बंद किया गया, जिससे रक्त प्रवाह और कम हो गया।
अंतिम सर्जरी: जब रक्तस्राव का जोखिम काफी हद तक नियंत्रित हो गया, तब अंतिम और सबसे बड़ी सर्जरी कर पूरा ट्यूमर सुरक्षित तरीके से निकाल दिया गया। एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कनिका सुहाग के नेतृत्व में टीम ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
आयुष्मान योजना से मिला फ्री इलाज
निजी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी पर 3 से 4 लाख रुपए तक खर्च आ सकता था। लेकिन बीएमएचआरसी में आयुष्मान भारत योजना के तहत महिला का पूरा इलाज निशुल्क किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह बड़ी राहत साबित हुई। यह एक आनुवांशिक बीमारी है, जो लगभग 2,500 से 3,000 लोगों में से एक को होती है। इसमें नसों पर गांठें बनती हैं, जिन्हें न्यूरोफाइब्रोमा कहा जाता है। अधिकतर मामलों में ये गांठें सामान्य रहती हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये तेजी से बढक़र कैंसर का रूप ले सकती हैं।
