हर वर्ग को मिलेगा सरकार का साथ

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  • मोहन ‘राज’ का दूसरा बजट तैयार

आम बजट के बाद अब मप्रवासियों की नजर मप्र सरकार के बजट पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुशासन और विकास के पैमाने पर तैयार बजट में हर वर्ग के लिए सौगातों की भरमार होगी। सरकार बजट में महिला, युवा, किसान, कर्मचारियों, उद्योग-धंधों और विकास पर फोकस करेगी।

गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
मप्र विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान 18 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत होगा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद में औसत वार्षिक वृद्धि दर 10 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। इस आधार पर 2026-27 का वार्षिक बजट 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। बजट में सरकार का सबसे अधिक फोकस महिला, युवा, किसान, कर्मचारियों, उद्योग-धंधों और विकास पर होगा। सरकार इन वर्गों को साधने की कोशिश में बजट में कई सौगातें दे सकती है। बजट के पिटारे से आम जनता, कर्मचारियों, किसानों और युवाओं के लिए कई बड़ी सौगातें निकलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अगले एक साल में 50,000 नई सरकारी नौकरियों का ऐलान कर सकती है। वहीं, राज्य के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 35 लाख रुपए तक की केशलैस स्वास्थ्य बीमा योजना सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक हो सकती है। किसानों की आय दोगुनी करने के मकसद से हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और शहरी परिवहन को सुगम बनाने के लिए सस्ती सहकार टैक्सी सेवा शुरू करने की भी तैयारी है। बता दें कि मोहन सरकार अपने कार्यकाल का तीसरा पूर्ण बजट पेश करने वाली है। गौरतलब है कि डॉ. मोहन यादव सरकार पहली बार रोलिंग बजट का कॉन्सेप्ट पेश करेगी, यानी इस बार बजट में एक साल की बजाय अगले तीन सालों के फाइनेंशियल रोडमैप की झलक देखने को मिलेगी। ये पारंपरिक बजट से अलग होता है। यह एक निश्चित टाइम पीरियड की बजाय योजनाओं के साथ अपडेट होता रहता है। इस नई व्यवस्था के तहत, सरकार एक साथ तीन वित्तीय वर्ष (2026-27, 2027-28, और 2028-29) के लिए अपनी आय और व्यय की योजना बनाएगी। सरकार का मानना है कि इस कॉन्सेप्ट से 3 अहम फायदे होंगे। योजनाओं पर होने वाले खर्च की लगातार निगरानी संभव होगी, जिससे फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी। योजनाओं की मॉनिटरिंग और समय समय पर इसका इवैल्यूएशन किया जा सकेगा। जरूरत पडऩे पर उनमें बदलाव भी किया जा सकेगा। सरकार अपनी प्राथमिकताओं को लॉन्ग टर्म के लिए निर्धारित कर सकेगी, जिससे विकास परियोजनाओं में स्थिरता आएगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
मप्र सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करने के बाद वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी प्रस्तुत करेगी। इसमें किसी भी विभाग को न तो नए वाहन खरीदने के लिए राशि दी जाएगी और न ही ऐसी किसी योजना के लिए वित्तीय प्रविधान किए जाएंगे, जिसका वित्तीय भार राजकोष पर पड़े। सूत्रों का कहना है कि अनुपूरक बजट 10 हजार करोड़ रुपये का हो सकता है। इसमें उन विभागों को राशि दी जाएगी, जिन्होंने आवंटित बजट का उपयोग कर लिया है और उन्हें भारत सरकार या अन्य माध्यम से अतिरिक्त राशि प्राप्त होने की संभावना है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट शून्य आधारित बनाया गया था। इसमें सभी विभागों से एक-एक योजना की समीक्षा कराकर बजट प्रविधान किए गए। पहले दो अनुपूरक बजट में केवल उन्हीं विभागों को अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई गई, जिनके लिए या तो वित्त विभाग की पूर्व अनुमति ली गई थी या केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्यांश मिलना था। ऐसा ही अंतिम अनुपूरक बजट में भी होगा। विशेष पूंजीगत सहायता योजना के अंतर्गत किसी योजना में राशि स्वीकृत हुई है तो उसके लिए राशि उपलब्ध कराई जाएगी। नए वाहन खरीदने के लिए किसी भी विभाग को राशि नहीं मिलेगी।
पेश होगा डिजिटल बजट
मप्र में ई ऑफिस, ई कैबिनेट के बाद अब ई विधान की व्यवस्था शुरू होने जा रही है। विधानसभा के बजट सत्र में डिजिटल व्यवस्था देखने को मिलेगी। विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे, उनके प्रश्नों के उत्तर भी डिजिटल ही प्राप्त होंगे। मप्र का बजट भी उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा टैबलेट पर ही पड़ेंगे। ई-विधान परियोजना और पेपरलेस बजट को देखते हुए विधानसभा सचिवालय की ओर से सभी विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे। इस पर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे। इस दिशा में बजट सत्र से पहले नेशनल ई-विधान परियोजना लागू की जाएगी। इसके लिए 23 दिसंबर को मंत्री व विधायकों को विधानसभा के मानसरोवर सभागार में प्रशिक्षण दिया गया है। इस सत्र से विधानसभा की कार्यवाही पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की जाएगी। इसके लिए मप्र विधानसभा सचिवालय ने सभी आवश्यक तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। बजट सत्र से पहले सदन के भीतर विधायकों की सीटों पर टैबलेट लगाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से प्रश्न, उत्तर, विधेयक, ध्यानाकर्षण सूचना, शून्यकाल की सूचनाएं और अन्य विधायी दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। भारत सरकार की ओर से ई-विधान परियोजना को देशभर में बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी के तहत मप्र विधानसभा को भी डिजिटल और पेपरलेस बनाया जा रहा है। नेशनल ई-विधान परियोजना (नेवा) भारत सरकार की एक ई-गवर्नेंस पहल है, जिसका लक्ष्य देश की सभी विधानसभाओं को पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस बनाना है, ताकि विधायी कार्य (जैसे प्रश्नोत्तर, विधेयक, रिपोर्ट) एक साझा डिजिटल प्लेटफार्म पर हों, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़े। इसे एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन के सिद्धांत पर बनाया गया है और यह डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय को नोडल विभाग बनाया गया है।
गौरतलब है कि पहले प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस सिस्टम लागू हुआ। फिर ई-कैबिनेट बैठकों की प्रक्रिया शुरू की गईं। अब ई-गवर्नेस की दिशा में मप्र सरकार एक और पहल कर रही है। सरकार ने विधानसभा में डिजिटल यानी पेपरलेस बजट पेश करने की तैयारी कर ली है। यह सरकार का पहला पूर्ण डिजिटल बजट होगा। इस साल बजट की किताबें नहीं छापी जाएंगी। विधायकों को बजट की पूरी जानकारी टैबलेट में दी जाएगी। वित्त विभाग की वेबसाइट पर भी बजट अपलोड होगा। साथ ही पेनड्राइव में बजट की सॉफ्ट कॉपी दी जाएगी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा विधानसभा में टैबलेट के जरिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करेंगे। वित्त विभाग ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। दरअसल, वित्त विभाग पिछले चार साल से बजट पेश करने की कवायद में जुटा है, लेकिन हर साल ऐन मौके पर पूर्व की तरह मैनुअल बजट पेश करने का निर्णय ले लिया जाता है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बजट पुस्तिकाओं की छपाई पर हर साल करीब 25 लाख रुपए खर्च होते हैं, बड़ी मात्रा में कागज की बर्बादी होती है और बजट पुस्तिकाओं को लाने ले जाने में बड़ी संख्या में मैनपॉवर लगता है। फिजूलखर्ची और कागज की बर्बादी रोकने के लिए वित्त विभाग ने इस बार डिजिटल बजट पेश करने को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया है। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी का कहना है कि इस बार विधानसभा में पेपरलेस बजट पेश करने की तैयारी है। बजट पुस्तिकाएं नहीं छापी जाएंगी। वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारियां तेज कर दी है। गत 19 जनवरी से बजट को लेकर सचिव स्तर की अंतिम दौर की चर्चा शुरू हो गई है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार विभागवार बजट चर्चा हो रही है। शेष 31 विभागों की बजट चर्चा 29 तक चलेगी। इसमें विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी बजट पर चर्चा कर हैं। गत दिसंबर में 22 विभागों की सचिव स्तर की बजट चर्चा हो चुकी है।
राजस्व आय बढ़ाना बड़ी चुनौती
मप्र में कर्ज बढ़ते-बढ़ते बजट के आकार से अधिक हो चुका है। मूलधन और ब्याज अदायगी का बोझ और बढ़ेगा। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती आमदनी बढ़ाने की है, क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य के पास कर लगाने के क्षेत्र सीमित हो गए हैं। आवश्यकता बेहतर वित्तीय प्रबंधन की है। इसी वजह से पहली बार रोलिंग बजट तैयार किया जा रहा है। इसमें एक साथ तीन वर्ष की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन कराया जा रहा है, ताकि वित्तीय वर्ष 2028-29 तक की कार्य योजना अभी से तैयार की जा सके। बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान (लगभग 1.31 लाख करोड़ रुपए) पर खर्च होगा। इसके बाद, लाड़ली बहना योजना (सालाना 20,000 करोड़) और बिजली सब्सिडी (सालाना 30,000 करोड़) सरकार पर सबसे बड़ा वित्तीय बोझ हैं। इन सभी योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए विकास के लिए धन जुटाना वित्त विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार आबकारी और खनिज क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। निवेश को आकर्षित करने और कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की भी योजना है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार पूंजीगत व्यय यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर को 90,000 करोड़ रुपए से ज्यादा करने की तैयारी में है। यह सडक़ों, पुलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण पर खर्च होगा, जिससे न केवल विकास को गति मिलेगी, बल्कि बाजार में मांग बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे।
डॉ. मोहन यादव सरकार इस बजट में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य आश्वासन योजना शुरू कर सकती है। इसमें कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 35 लाख रुपए तक का केशलैस कवर मिलेगा। वर्तमान में, कर्मचारियों को पहले अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाना पड़ता है और बाद में विभाग से प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करना होता है, जिसमें अक्सर पूरी राशि नहीं मिलती। नई योजना के तहत, हरियाणा और राजस्थान की तरह, कर्मचारी और उनके परिवार के लोग योजना के कार्ड के जरिए सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में केशलैस इलाज करा सकेंगे। योजना में सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए और गंभीर बीमारियों (जैसे कैंसर, हृदय रोग, अंग प्रत्यारोपण) के लिए 35 लाख रुपए तक का कवर मिलेगा। इस योजना से लगभग 5 लाख से ज्यादा नियमित कर्मचारी और करीब 5 लाख पेंशनभोगियों सहित 10 लाख से अधिक लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। योजना के लिए कर्मचारियों के वेतन से पद के अनुसार 250 रुपए से 1 रुपए तक का मासिक अंशदान काटा जाएगा, जबकि एक बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी। पेंशनरों को आजीवन फायदे के लिए एकमुश्त 1.75 लाख रुपए जमा करने का विकल्प दिया जा सकता है। योजना का फायदा कर्मचारी, उनके पति/पत्नी, बच्चों और माता-पिता को भी मिलेगा। सभी के लिए अलग-अलग कार्ड बनाए जाएंगे।
किसानों को कई सौगातें, नौकरियों की भरमार
सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, और इसकी झलक बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का बजट 70,000 करोड़ रुपए के आसपास हो सकता है। पिछली बार भी कृषि विभाग के बजट में 13 हजार करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी कर इसे 58 हजार करोड़ किया था। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन के लिए प्रत्येक जिले में एक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी। 7.5 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन की सिंचाई का टारगेट तय किया है। इसके लिए जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास की परियोजनाओं के लिए बजट को 17,214 करोड़ से बढ़ाकर लगभग 20,000 करोड़ रुपए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (2500 करोड़), शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण (750 करोड़), और किसान कल्याण योजना (6000 करोड़) जैसी योजनाओं को जारी रखा जाएगा। सोयाबीन के बाद सरसों को भी भावांतर भुगतान योजना में शामिल किया जा सकता है। जैविक खाद बनाने और प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार बजट में 50,000 से अधिक रिक्त सरकारी पदों को भरने की घोषणा कर सकती है। यह भर्तियां मप्र लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से की जाएंगी। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने और उन्हें समय पर पूरा करने के लिए परीक्षाओं के पैटर्न में भी कुछ बदलाव का ऐलान हो सकता है। युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए युवा उद्यमी योजना जारी रहेगी। इसके अतिरिक्त, कृषि स्नातक युवाओं को कृषि-आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष छूट और अनुदान देने का प्रावधान किया जाएगा, ताकि वे जॉब सीकर के बजाय जॉब क्रिएटर बन सकें। इसके अलावा, कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की गणना के लिए एक नई प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते की गणना 74 प्रतिशत, 84 प्रतिशत, 94 प्रतिशत के हिसाब से होगी। साथ ही, कर्मचारियों के लिए उपहार लेने की 50 साल पुरानी सीमा को 500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए किया जा सकता है, ताकि वे बिना किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर के छोटे-मोटे उपहार स्वीकार कर सकें।
शहरी क्षेत्रों में परिवहन को सुगम और सस्ता बनाने के लिए सहकार टैक्सी सेवा शुरू करने की घोषणा की जा सकती है। सहकारिता विभाग की यह योजना ओला और उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों का एक सहकारी विकल्प प्रदान करेगी। इसका संचालन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) और अन्य बड़ी सहकारी समितियों के जरिए होगा। चूंकि यह एक सहकारी मॉडल होगा, इसलिए ड्राइवरों को किसी कंपनी को कमीशन नहीं देना होगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा और राइड्स मौजूदा टैक्सियों की तुलना में सस्ती होंगी। कमीशन मुक्त होने से ड्राइवरों की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। योजना की शुरुआत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से होगी, और सफलता के बाद इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा। इस सेवा के तहत बाइक-टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और कैब, तीनों को पंजीकृत किया जाएगा, जिससे यात्रियों को कई विकल्प मिलेंगे। बजट में सरकार कई और क्षेत्रों में प्राथमिकता से ध्यान देगी। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत 22 आदिवासी जिलों में 1039 किमी सडक़ और 112 पुलों के निर्माण के लिए 795 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जाएगा। वहीं 450 नए सांदीपनि विद्यालय खोले जाएंगे और मौजूदा स्कूलों-कॉलेजों में सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त राशि दी जाएगी। 2030 तक राज्य की 50त्न बिजली खपत को सौर, पवन और जल ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य है, जिसके लिए संयंत्र लगाने वालों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
आधी आबादी को प्राथमिकता
प्रदेश के बजट में आधी आबादी यानी महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी। इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नारी सशक्तीकरण मिशन को गति दी जाएगी। उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन तो दिया ही जाएगा, स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ाया जाएगा। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्हें गो पालन से भी जोड़ा जाएगा। गरीबों को स्वनिधि योजना के माध्यम से छोटे-छोटे ऋण सरकार अपनी गारंटी पर उपलब्ध कराने की योजना को न केवल जारी रखेगी, बल्कि इसे विस्तार भी दिया जाएगा। प्रदेश सरकार बजट को लेकर जिस तरह से तैयारी कर रही है, उसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ज्ञान यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और गरीब पर फोकस रहेगा। नारी सशक्तीकरण मिशन में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी विभागों द्वारा महिलाओं पर किए जाने वाले खर्च को जेंडर बजट के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। महिलाओं को स्वरोजगार के लिए स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए ई-मार्केट के साथ विभिन्न हाट-बाजारों में काउंटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास के साथ नगरीय विकास को सुविधा विकसित करने बजट उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही आजीविका मिशन की गतिविधियों को विस्तार देने के लिए भी वित्तीय प्रविधान होंगे।
लाड़ली बहना को डेढ़ हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से अभी भुगतान हो रहा है। इसके लिए 2025-26 में 18,669 करोड़ रुपये का प्रविधान रखा गया था। इसे बढ़ाकर बीस हजार करोड़ किया जाएगा। लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए भी एक हजार करोड़ रुपये से अधिक रखने की तैयारी है। स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहन के लिए अनुदान का प्रविधान यथावत रखा जाएगा तो लखपति दीदी को स्थायी रोजगार से जोडऩे की पहल होगी। कामकाजी महिलाओं के लिए वर्तमान बजट में चार हास्टल बनाने की घोषणा की गई थी, इसे विस्तार दिया जा सकता है। युवा की क्षमता का उपयोग सरकार देश और प्रदेश के विकास में करने की कार्ययोजना पर काम कर रही है। कॉलेजों में रोजगारपरक कोर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे आगामी बजट में बढ़ाया जाएगा। कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था और सशक्त बनाई जाएगी। युवा उद्यमी योजना लागू रहेगी तो 50 हजार से अधिक रिक्त सरकारी पद भरे जाएंगे। कृषि स्नातक युवा यदि कोई कृषि आधारित उद्योग लगाते हैं तो उन्हें छूट दी जाएगी। निवेश को प्रोत्साहित करके स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम तो कर ही रही है, स्वरोजगार के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने रोजगार मेले प्रतिमाह लगाए जाएंगे। इनके सम्मेलन भी होंगे ताकि दूसरे युवा भी प्रेरित हों और रोजगार मांगने वाले नहीं रोजगार देने वाले बनें।
कृषि क्षेत्र को मिल सकते हैं 70 हजार करोड़
प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसमें फोकस किसानों की आमदनी बढ़ाने पर रहेगा। इसके लिए सिंचाई क्षमता का विस्तार किया जाएगा तो उद्यानिकी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रत्येक जिले में खाद्य प्रसंस्करण यूनिट स्थापित की जाएंगी। पशुपालन करने पर प्रोत्साहन राशि मिलेगी। ऊर्जा, जल संसाधन, पशुपालन एवं डेयरी के साथ कृषि बजट में वृद्धि की जा सकती है। उधर, पूंजीगत व्यय 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक रखे जा सकते हैं ताकि अधोसंरचना विकास को गति दी जा सके। औद्योगिक केंद्रों का विकास, 450 नए सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण के साथ स्कूल-कालेजों में सुविधा के विकास के लिए स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग को अधिक राशि दी जा सकती है। स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग सभी जिलों में संभावनाएं तलाश करेगा और क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान मिलेगा। वहीं, सोयाबीन के बाद सरसों को भी भावांतर योजना के दायरे में लाने की घोषणा बजट में हो सकती है। कृषि सहित संबद्ध क्षेत्रों का बजट 70 हजार करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में इसे 13,409 करोड़ रुपये बढ़ाकर कर 58,257 करोड़ रुपये किया गया था। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सिंचाई क्षमता साढ़े सात लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी पूर्ति के लिए जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास की विभिन्न योजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृतियां दी जा चुकी हैं। बजट 17, 214 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 19-20 हजार करोड़ रुपये किया जा सकता है
सरकार रासायनिक खादों के बेजा उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति को होने वाले नुकसान को देखते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगी। इसे अपनाने वालों को प्रोत्साहन राशि मिलेगी। गोपालन के लिए भी किसानों को प्रेरित किया जाएगा। दूध और उससे बने उत्पादों के लिए बाजार की व्यवस्था भी होगी। सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियों का विस्तार किया जाएगा। जैविक खाद बनाने की यूनिट बनाने में उद्योग विभाग से सहायता दिलाई जाएगी। उद्यानिकी से जुड़ी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए कृषि निधि से व्यवस्था कराई जाएगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए ढाई हजार करोड़ रुपये, शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पावधि ऋण उपलब्ध कराने के लिए 750 करोड़, भावांतर भुगतान योजना के लिए एक हजार करोड़, किसान कल्याण योजना में छह हजार करोड़ रुपये का प्रविधान रखा जा सकता है। मप्र में अधोसंरचना विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार पूंजीगत व्यय बढ़ा रही है। दरअसल, प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जा रहे हैं, सांदीपनि विद्यालयों, कालेज और अस्पताल भवन बनाए जा रहे हैं। इन सभी के लिए बजट में विभागवार प्रावधान भी रखे जाएंगे। बजट में सरकार सीएम केयर योजना की घोषणा कर सकती है। इसमें सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार किया जाएगा। कर्मचारियों को आयुष्मान की तरह स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने और नए मेडिकल कालेजों के लिए भी प्रविधान किया जाएगा।

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