देश को भाया विकास का ‘मोहन मॉडल’

‘मोहन मॉडल’
  • मप्र में सुशासन, संवेदना और महिला सशक्तिकरण पर जोर

मप्र पिछले दो दशक से विकास का पर्याय बना हुआ है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दो साल में सुशासन, संवेदना और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर रहा है। इसका असर यह हुआ है कि देश को विकास का ‘मोहन मॉडल’ खूब पसंद आ रहा है।

विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण कर लिया है। जब 2023 में पूर्व डॉ. मोहन यादव ने मप्र के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी, तभी यह आभास होने लगा था कि उनका नेतृत्व केवल प्रशासनिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह शासन को एक नैतिक, सामाजिक और मानवीय दिशा देने का प्रयास करेगा। सत्ता की बागडोर संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर यह स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्वासपात्र मुख्यमंत्रियों की सूची में शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान सुनिश्चित करेंगे। इसका कारण केवल राजनीतिक सामंजस्य नहीं, बल्कि नीति, नीयत और क्रियान्वयन का संतुलन था। पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष और उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने पहले ही अपनी अलग पहचान बनाई थी। आलाकमान द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री की जो बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी वह निर्णय न केवल दूरदर्शी साबित हुआ है बल्कि इस बात पर मुहर भी लगा दी है कि भाजपा नेतृत्व का भरोसा सही दिशा में था। इन दो वर्षों में उन्होंने न केवल मप्र की विकास यात्रा को गति दी बल्कि राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी सशक्त पहचान बनाई है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के लगभग हर क्षेत्र में ठोस काम हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सिंचाई, महिला सशक्तिकरण, कानून व्यवस्था, कृषि हर क्षेत्र में परिणाम दिखते हैं। लाखों करोड़ के निवेश प्रस्ताव राज्य में आ चुके हैं। एक ही दिन में ढाई लाख करोड़ के कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण, 327 नई इकाइयों में उत्पादन शुरू, 40 हजार से अधिक रोजगार उत्पन्न, निर्यात में 6 प्रतिशत वृद्धि लक्ष्य और शहरों का विकास, इंदौर और भोपाल में मेट्रो का संचालन, उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए विस्तृत तैयारी विकास के कुछ उदाहरण हैं। डिजिटल शासन, साइबर तहसीलें, त्वरित नामांतरण जैसी पहलें, कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास, सिंचाई क्षमता में निरंतर बढ़ोतरी, भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को उपज का उचित मूल्य, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को हजारों करोड़ की राहत राशि, डेयरी और सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना सुशासन की झलक देते हैं। 950 महिला ऊर्जा डेस्क और प्रत्येक जिले में महिला थाना और स्व-सहायता समूहों से 47 लाख महिलाओं को आर्थिक रूप से जोड़ा गया। सामूहिक विवाह सम्मेलन में अपने पुत्र का विवाह कर समाज को सादगी और सद्भाव का संदेश दिया। रिकॉर्ड बजट, नई सुविधाएं और आधुनिक स्वास्थ्य संरचना का विस्तार। जिले-दर-जिले शिक्षा संस्थानों में उन्नयन। बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में नक्सली गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार, मुख्यमंत्री की निर्णायक क्षमता को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अब तक का कार्यकाल सिर्फ उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि प्रशासनिक कसावट और जनहित की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनकी सबसे बड़ी ताकत है कि वे किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं हैं। वे हर विधायक और नेता से समान व्यवहार रखते हैं और सभी के लिए सहज रूप से उपलब्ध रहते हैं। यही कारण है कि संगठन और सरकार दोनों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत है। वे अपनी उपलब्धियों को गर्व का विषय नहीं, बल्कि कर्तव्य की निरंतरता मानते हैं। उनका स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाना, ताकि कोई भी वंचित नागरिक सहायता से वंचित न रह जाए। यदि अब तक के दो वर्षों को देखें, तो यह विश्वास सहज रूप से बनता है कि आने वाले तीन वर्ष मप्र के लिए परिवर्तनकारी हो सकते हैं। उद्योग और निवेश, ग्रामीण विकास, पर्यटन, स्मार्ट गवर्नेंस, सामाजिक समरसता इन सभी क्षेत्रों में एक नई ऊंचाई हासिल करने की संभावनाएं प्रबल हैं। डॉ. मोहन यादव का कार्यकाल बताता है कि एक सामान्य कार्यकर्ता, जब प्रतिबद्धता, परिश्रम और संगठन का विश्वास साथ हो, तो कैसे एक सफल और लोकप्रिय मुख्यमंत्री बन सकता है। उम्मीद यही है कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश विकास, सौहार्द और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान और मजबूत करेगा।

लाड़ली बहनों के भाई
आज डॉ. मोहन यादव की पहचान केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि सबके भैया के रूप में बन चुकी है। प्रदेश की लाड़ली बहनें उन्हें गर्व से भैया कहती हैं। यह पहचान किसी प्रचार अभियान से नहीं बनी, बल्कि उनके व्यवहार, संवाद और संवेदना से निर्मित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यकाल के आरंभ में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि महिला सशक्तिकरण उनकी सरकार के लिए केवल एक योजनागत प्राथमिकता नहीं, बल्कि नैतिक प्रतिबद्धता है। यही कारण है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं को न केवल निरंतरता दी गई, बल्कि उन्हें और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष आग्रह पर कई नई योजनाओं की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक स्तरों पर सशक्त बनाना था। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लिखे गए ब्लॉग में यह दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए यह भरोसा दिलाया कि सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जब महिलाएँ आर्थिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त होंगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होंगे। लाड़ली बहना योजना आज मप्र सरकार की पहचान बन चुकी है। लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये की राशि का नियमित अंतरण न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि राज्य और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु भी है। इस राशि को चरणबद्ध रूप से 3 हजार रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस योजना को अल्पकालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में देख रही है। इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इससे महिलाएं डिजिटल लेन-देन से जुड़ रही हैं और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। महिला सशक्तिकरण को केवल प्रत्यक्ष सहायता तक सीमित न रखते हुए सरकार ने महिलाओं को उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने पर विशेष ध्यान दिया है। लखपति दीदी योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री उद्यम शक्ति योजना महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आज यह तथ्य अत्यंत उत्साहवर्धक है कि प्रदेश में 47 प्रतिशत स्टार्टअप्स महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में कार्यरत महिलाओं को 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देना और एक बगिया माँ के नाम योजना के अंतर्गत फलदार पौधरोपण- ये सभी पहल इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक भागीदार बनाना चाहती है। महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सुरक्षा और अवसर भी उतने ही आवश्यक हैं। इसी सोच के तहत राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। संपत्ति पंजीयन शुल्क में एक प्रतिशत की छूट और कामकाजी महिलाओं के लिए ‘सखी निवास’ के रूप में सुरक्षित आवास सुविधाओं का विस्तार, ये सभी निर्णय महिला हितों के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अपने पुत्र का विवाह सार्वजनिक सामूहिक विवाह समारोह में संपन्न कराना आज के समय में एक विरल उदाहरण है। जब विवाह सामाजिक प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हों, तब यह कदम उन परिवारों के लिए आशा का संदेश है, जो सीमित साधनों में बच्चों के भविष्य की चिंता करते हैं। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो कार्य हुए हैं, वे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। फिर भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहते हैं कि उन्हें प्रशंसा नहीं केवल बहनों का आशीर्वाद चाहिए। यही आशीर्वाद उन्हें निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा देता है। एक मंत्री, एक महिला और एक जनप्रतिनिधि के रूप में मुझे गर्व है कि मैं इस परिवर्तनकारी यात्रा की सहभागी हूँ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज सुशासन, संवेदना और समावेशी विकास की दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।

मिशन महिला-शक्ति के स्वर्णिम दो वर्ष
मध्यप्रदेश में बीते दो वर्ष महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा, सम्मान और समग्र विकास के अद्वितीय कालखंड के रूप में दर्ज हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील दृष्टिकोण से प्रदेश में महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंशा स्पष्ट रही है—हर महिला को सुरक्षित जीवन, हर बालिका को प्रोत्साहन तथा हर बच्चे को बेहतर भविष्य का अधिकार मिले। इन्हीं लक्ष्यों को मूर्त रूप देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अनेक ऐतिहासिक पहलें की गईं, जिनसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की व्यापक लहर उत्पन्न हुई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में मैं यह बताते हुए गर्व का अनुभव करती हूँ कि मिशन वात्सल्य के माध्यम से प्रदेश में हजारों बच्चों को नए जीवन अवसर प्रदान किए गए हैं। स्पॉन्सरशिप योजना ने कमजोर परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य किया है, जिसके अंतर्गत प्रति माह 4 हजार रुपये की वित्तीय सहायता ने परिवारों और संस्थाओं दोनों को सशक्त बनाया है। वर्ष 2024-25 में 20,243 बच्चों को इस सहायता का लाभ मिला और वर्ष 2025-26 के लिए 32,896 बच्चों के प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने चौबीसों घंटे त्वरित सेवा उपलब्ध कराते हुए दो वर्षों में लगभग 48,872 बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना सबसे क्रांतिकारी पहलों में से एक रही है। कई राज्यों ने इसका अनुसरण किया है। जून 2023 से अक्टूबर 2025 तक महिलाओं को नियमित रूप से 29 किस्तों के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। तीन बार विशेष सहायता राशि के रूप में प्रति बहन 250 रुपये अतिरिक्त प्रदान किए गए, जिससे लाखों परिवारों को सीधा आर्थिक संबल मिला। कुल 44,917.92 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में पारदर्शी डिजिटल अंतरण के माध्यम से प्रदान किए गए, जिसने मध्यप्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई दिशा दी है।
मिशन शक्ति के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटरों, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पिंक ड्राइविंग लाइसेंस, जेंडर चैंपियन पहल और सशक्त वाहिनी कार्यक्रमों ने महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तीकरण को और मजबूती प्रदान की है। वर्ष 2024-25 में वन स्टॉप सेंटरों ने 31,763 महिलाओं को सहायता प्रदान की और 2025-26 में अक्टूबर तक 20,332 महिलाओं को त्वरित राहत और परामर्श उपलब्ध कराया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत नवजात बालिकाओं का स्वागत, पूजा-अर्चना और व्यापक पौधारोपण ने समाज में बेटियों के सम्मान की संस्कृति को मजबूत किया है। पिंक ड्राइविंग लाइसेंस और जेंडर चैंपियंस जैसी पहलें बालिकाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई उड़ान दे रही हैं। राज्य एवं जिला स्तर के हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वुमन ने जनजागरूकता की दृष्टि से अभूतपूर्व कार्य किया है। 100 दिवसीय अभियान, घरेलू हिंसा निरोधक कार्यक्रम, बाल विवाह मुक्ति प्रतिज्ञा, क्कष्ट-क्कहृष्ठञ्ज अधिनियम जागरूकता अभियान, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और आत्मरक्षा कार्यक्रमों ने समाज में व्यापक संवेदनशीलता विकसित की है। वर्ष 2024-25 में 1.47 लाख से अधिक गतिविधियाँ आयोजित हुईं और लाखों नागरिकों की भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि मध्यप्रदेश, महिला सम्मान और सुरक्षा के विषय में समाज को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। सखी निवास (वर्किंग वुमन हॉस्टल) और शक्ति सदन ने कार्यरत महिलाओं तथा संरक्षण की आवश्यकता वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास का मजबूत तंत्र निर्मित किया है। नए हॉस्टलों के निर्माण से प्रदेश में महिलाओं के लिए और अधिक सुरक्षित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। महिला हेल्पलाइन 181 ने दो वर्षों में लगभग 1.7 लाख से अधिक महिलाओं को त्वरित सहायता प्रदान की है, जो शासन की संवेदनशीलता का प्रमाण है। आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। 12,670 मिनी आंगनवाडिय़ों को पूर्ण आंगनवाड़ी में उन्नत किया गया, जिसके परिणामस्वरूप सेवाओं की गुणवत्ता और महिलाओं के लिए रोजगार दोनों में वृद्धि हुई है। ‘चयन पोर्टल’ की शुरुआत ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है और हजारों कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नई नियुक्ति मिली है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान की गई है। जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्थान अभियान के माध्यम से सैकड़ों नए आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन प्रारंभ किया गया है। इससे जनजातीय महिलाओं और बच्चों को पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उनके गांवों तक उपलब्ध कराई गई हैं। हजारों भवनों के निर्माण और उन्नयन से आंगनवाड़ी व्यवस्था अधिक सशक्त और सुरक्षित बनी है। पोषण अभियान के अंतर्गत लाखों बच्चों के विकास की निगरानी के लिए अत्याधुनिक उपकरण प्रदान किए गए हैं। इन सभी उपलब्धियों के मूल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वह स्पष्ट सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण है, जिसके कारण आज मध्यप्रदेश महिला और बाल विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल योजनाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि हर महिला, हर बालिका और हर बच्चे तक सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर और आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण की रोशनी पहुँचाना है। आने वाले वर्षों में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और मध्यप्रदेश, आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त समाज के रूप में नए मानक स्थापित करेगा।

सुरक्षा पर विशेष फोकस
बेटियों, महिलाओं की सुरक्षा मप्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और इसके लिए राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं। वन स्टॉप सेन्टर, महिला हेल्पलाईन 181 इसी उद्देश्य को लेकर कार्यरत हैं। प्रदेश के समस्त जिलों में संकट ग्रस्त महिलाओं की सहायता हेतु जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं, जिनके माध्यम से लगभग 1 लाख से अधिक महिलाओं को नि:शुल्क सहायता उपलब्ध कराई गई है। महिला हेल्पलाइन नंबर 181 जैसी योजनाओं के जरिए महिलाएं अपनी समस्याओं का समाधान तुरंत पा रही है। महिला अपराधों को रोकने तथा उसे प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शौर्य दल बनाए गए हैं। प्रदेश में ग्राम/वार्ड स्तर की प्रत्येक आंगनवाड़ी क्षेत्र में कुल 22.52 लाख से अधिक बालिकायें / महिलायें शौर्या दल की सदस्य है। मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को मृत्यु दंड देने वाला देश का पहला राज्यमप्र है। प्रदेश में मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 जैसी योजनाएं महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता एवं विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई हैं। राज्य सरकार ने बेटियों को डॉक्टर, इंजीनियर, जेईई, जज, सीए आदि परीक्षाओं की तैयारी का खर्च उठाने का जिम्मा स्वयं ले रखा है ताकि माता-पिता को इसके बोझ तले ना दबना पड़े। लाडली बालिकाओं को कक्षा 12वीं के स्नातक अथवा व्यावसायिक पाठ्यक्रम में (पाठ्यक्रम अवधि न्यूनतम दो वर्ष) प्रवेश लेने पर राशि रूपये 25,000/- की प्रोत्साहन राशि, दो समान किश्तों में (पाठ्यक्रम अवधि के प्रथम एवं अंतिम वर्ष मे) दिए जाने का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार की यही मंशा रही है कि प्रदेश की हर बेटी अपने सपने पूरा कर सके। इसी परिप्रेक्ष्य मेंमप्र में महिलाओं को निकाय चुनाव एवं शिक्षक भर्ती में 50 प्रतिशत, पुलिस भर्ती में 33 प्रतिशत और अन्य भर्तियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज के विकास की अनिवार्य शर्त है। मप्र सरकार महिलाओं के सर्वांगीण उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मप्र में महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इन समूहों ने न केवल महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान की है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है। उदाहरण के लिए, स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब स्थानीय स्तर पर उत्पादक संगठनों के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित कर रही हैं। महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में आरक्षण और निकाय चुनावों में 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे कदमों ने उनकी भागीदारी को और बढ़ाया है। इसके अतिरिक्त, जेंडर बजट में 19,021 करोड़ रुपये की वृद्धि और महिला सशक्तिकरण के लिए 1 लाख 21 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के जीवन और कार्यों से प्रेरणा लेते हुए महिला सशक्तिकरण को नया आयाम दिया है। अहिल्या बाई ने महेश्वर से शासन चलाते हुए महिलाओं को साड़ी बुनाई जैसे कौशलों से जोड़ा, जिससे महेश्वरी साडिय़ां विश्व प्रसिद्ध हुईं। इसी तरह, डॉ. यादव ने स्व-सहायता समूहों को उद्यमिता और कौशल विकास से जोडक़र महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है। यह प्रयास मप्र को नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे कृषि, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा और राजनीति जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ रही है।

आत्मनिर्भर मप्र में महिलाओं की भूमिका
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि नारी शक्ति मिशन के तहत हर जिले की महिलाओं को सशक्तिकरण की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। उनका मानना है कि यदि नारी सशक्त होगी, तो समाज और प्रदेश स्वत: सशक्त होगा। सरकार का लक्ष्य 2047 तक मप्र को विकसित भारत के साथ एक समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है, जिसमें महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उनका मानना है कि समाज में महिलाओं को समान अवसर देना न केवल उनके विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।उनका कहना है कि नारी शक्ति मिशन हमारे इस दृष्टिकोण का विस्तार है जिसमें हर जिले से महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मप्र स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। एक तरफ आज जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं वहीं लाड़ली बहना योजना, लखपति दीदी योजना और नारी शक्ति मिशन जैसी अनेकों महिला केन्द्रित योजनाओं के माध्यम सेमप्र की महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं। स्व-सहायता समूहों ने न केवल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि महिलाओं को समाज में सम्मान और स्वावलंबन की नई पहचान दी है। एक समय था जब महिलाएं सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार को लेकर असमंजस में थीं, लेकिन आजमप्र में हालात बदल रहे हैं। राज्य सरकार महिलाओं को केवल सहयोग नहीं, बल्कि सम्मान और स्वावलंबन की नई पहचान देने की दिशा में काम कर रही है। आजमप्र सिर्फ योजनाएं नहीं बना रहा, वह एक ऐसी सोच का निर्माण कर रहा है जहां महिला होना कमजोरी नहीं, शक्ति का पर्याय है। यह बदलाव धीरे-धीरे हर घर, हर गांव और हर शहर में देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश की महिलाओं के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण के लिये निरंतर प्रयासरत होकर सक्रियता पूर्वक कार्य कर रहे है। उनका कहना है कि हम नारी सशक्तिकरण को केवल योजना के रूप में नहीं जन आंदोलन के रूप में देख रहे है। नारी शक्ति मिशन हमारे इस दृष्टिकोण का विस्तार है जिसमें हर जिले से महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में इंदौर और भोपाल में 250 बेड क्षमता के 3 वर्किंग वुमन हॉस्टल संचालित है। इसके अतिरिक्त स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंट टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना में वर्ष 2024-25 में 5412 बिस्तरीय 8 नये हॉस्टलों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 4 महिला एवं बाल विकास विभाग और 4 उद्योग विभाग द्वारा संचालित किये जायेगे। इसमें सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम और झाबुआ में 100-100 बिस्तरों के 4 हॉस्टलों के लिए 40.59 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। अब घर से दूर काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिलेगा। घरेलू हिंसा, शोषण या किसी भी संकट में फंसी महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। प्रदेश में 57 वन स्टॉप सेंटर पहले से ही संचालित हैं। जिनके माध्यम से वर्ष 2024-25 में 31 हजार 763 महिलाओं को सहायता प्रदान की गई। अब 8 और नए सेंटर मंजूर किए गए हैं- पेटलावद, पीथमपुर, मनावर, लसूडिया, साबेंर, मैहर, पांढूर्णा और मऊगंज में वन स्टॉप सेंटर की मंजूरी दी गई है। अब तक कुल एक लाख 27 हजार 94 संकटग्रस्त महिलाओं को इन केन्द्रों से लाभ मिल चुका है।

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