विकसित और समृद्ध राज्य बनाने का संकल्प

विधानसभा

-मप्र विधानसभा के 70 वर्ष की यात्रा…

मप्र विधानसभा ने 17 दिसंबर को अपनी स्थापना के 69 साल पूरे कर लिए और 70वें वर्ष की यात्रा शुरू हो गई है। इस मौके पर विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। इस दौरान सदन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विकसित और समृद्ध राज्य बनाने का संकल्प पेश किया।

गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
विधानसभा की 70 साल की यात्रा हमारी लोकतांत्रिक यात्रा का प्रमाण है, यह सदन सत्ता का नहीं जनता के विश्वास का मंदिर रहा है। मप्र आज जिस विकास के जिस मुकाम पर पहुंचा है, उसमें कई सरकारों, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों का योगदान रहा है। मप्र विधानसभा की स्थापना के 69 साल पूरे होने पर विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया। सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार के किए गए कामों और योजनाओं के जरिए आगामी समय में किए जाने वाले कामों के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के सदन में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने का संकल्प प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो साल में प्रदेश हित में दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। आने वाले समय में माइलस्टोन माने जाएंगे। हमारी पार्टी की सरकार ने बीमारू राज्य को विकसित राज्य बनाया है। सीएम ने कहा कि सभी सुखी होंगे, हमारे पास नीति भी है नियत भी है। हमने नक्सलवाद को ध्वस्त किया है, अवैध हथियार फैक्ट्री ध्वस्त की गईं, मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने का निर्णय लिया गया। जबलपुर और ग्वालियर में भी मेट्रोपोलिटन सिटी बनेगी। सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि यह सदन सत्ता का नहीं जनता के विश्वास के रूप में परिलक्षित हुआ है, इस पर हमें गर्व है। यह विशेष सत्र इस विधानसभा के लिए मध्य प्रदेश के साथ गणतंत्र के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में हम सबके लिए सौभाग्य की बात है। बाबा महाकाल की कृपा से विधानसभा के गठन के साथ विशेष सत्र का आयोजन लोक कल्याणकारी राज्य के कर्तव्य पथ पर चलने के लिए मार्ग प्रशस्त करने और संभाल बढ़ाने वाला होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरिमा पूर्ण सदन का इक_ा होना लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और भविष्य के प्रति हमारी उत्तरदायित्व का संकल्प है, और सांस्कृतिक रूप में गौरवशाली बनाने का इस सत्र में शुभारंभ करेंगे। मप्र के मुख्यमंत्री रहे और भारत सरकार में शिक्षा मंत्री रहकर अर्जुन सिंह जी ने नवोदय विद्यालय शुरू करवाए। मुख्यमंत्री ने कहा यह सदन 70 वर्षों में जनता के विश्वास के रूप में परिलक्षित हुआ है। अध्यक्ष जी अभी-अभी हमारी सरकार ने दो साल का कार्यकाल पूरा किया है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हम सबने मिलकर न सिर्फ दूरगामी परिणाम के निर्णय लिए, बल्कि कई ऐसे निर्णय लिए जो माइलस्टोन के रूप में जाने जाएंगे, जो जनता के जीवन के बदलाव का हिस्सा बनेंगे। 11 दिसंबर को लाल सलाम को आखिरी सलाम किया। यह हमारे लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दिन पहले ही मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने का स्वरूप तय किया गया है। इंदौर और भोपाल को अलार्म में लिया गया है, और 2026 में जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में शामिल किया जाएगा। गांवों में विकास कार्य किए जाएंगे और वृंदावन गांव बनाने की योजना है। उन्होंने बताया कि शिक्षा नीति लागू करने में मध्य प्रदेश अग्रणी रहा है। सांदीपनि आश्रम पूरे देश में अनोखा मॉडल है, जिसमें 395 आश्रम बनाए गए हैं और शिक्षकों की 95 प्रतिशत तक ई-अटेंडेंस लग रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अर्जुन सिंह ने नवोदय विद्यालय का सफल मॉडल दिया और उज्जैन में आश्रम खोला। विश्वविद्यालयों में अंग्रेजों की परंपरा को खत्म करते हुए कुलगुरु का नाम दिया गया। उन्होंने कहा कि 10 सुखों में पहला सुख निरोगी काया माना गया है। मेडिसिटी उज्जैन में बनाया जा रहा है, जो भविष्य में पूरे मध्य प्रदेश के शहरों में लागू किया जाएगा। राज्य में एयर एंबुलेंस शुरू की गई है। लाडली बहनों के लिए राशि एक हजार से शुरू हुई, अब इसे 1,500 रुपए किया गया है। यह केवल योजना नहीं, बल्कि उनके सशक्तिकरण का प्रयास है। सीएम ने सदन में चर्चा के दौरान जिक्र किया कि 11 दिसंबर को नक्सलियों को अंतिम सलाम दिया गया। 1999 में कांग्रेस सरकार के एक मंत्री को सरेराह चौराहे पर नक्सलियों ने हत्या की थी। भारतीय मुजाहिदीन और आईएसआईएस से जुड़े नेटवर्क को उदाहरण के तौर पर धराशाई किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विशेष सत्र हम सबके लिए सौभाग्य की बात है। बाबा महाकाल की नगरी से मिली प्रेरणा पूरे राज्य में फैली है। उन्होंने कहा कि हम सब ने मिलकर दूरगामी निर्णय लिए हैं, जो आज भले ही छोटे लगें, लेकिन भविष्य में माइलस्टोन बनेंगे और जनता के जीवन में बदलाव लाएंगे, उनके कष्ट कम करेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने बीमार राज्य को विकसित राज्य की श्रेणी में लाया है। राज्य में हरियाली होगी, गरीबी नहीं होगी, और सभी के लिए रोजगार सुनिश्चित होंगे। इसके लिए नीति भी मौजूद है। आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश बनाने का संकल्प लिया गया है और एमपी में परिवर्तन का नया दौर शुरू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने हाल ही में दो वर्ष पूर्ण किए हैं। इस अवधि में लिए गए दूरगामी निर्णय आने वाले समय में माइलस्टोन के रूप में जाने जाएंगे। यह निर्णय निश्चित ही जनता के जीवन में बदलाव का माध्यम बनेंगे। जनता के कष्ट कम कर उनके जीवन में खुशियों की बाहर लाना हमारी सरकार का प्रयास रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्षों तक बीमारू राज्य के रूप में पहचाना जाता रहा। हमारी पार्टी की सरकारों ने बीमारू की छवि से निकालकर प्रदेश को विकासशील और संभावनाओं से परिपूर्ण राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने पिछले 2 वर्षों में विकास के हर क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। हमें पूरा विश्वास है कि जल्द ही हम लोग राज्य को विकसित राज्य की सूची में आगे ले जाएंगे। हम ऐसा प्रदेश बनाएंगे जहां चारों ओर हरियाली होगी, उद्योग- धंधों का जाल होगा,जहां बेरोजगारी और गरीबी नहीं होगी, सभी सुखी और संपन्न होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा यह संकल्प पूर्ण होगा, क्योंकि हमारे नेता, नीति और नियत सभी स्पष्ट हैं। हम पूरे आत्मविश्वास के साथ विकसित आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाकर ही दम लेंगे, इसके लिए हम मेहनत की पराकाष्ठा करेंगे।

मप्र के विकास में सबका योगदान
विशेष सत्र में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मप्र की विधानसभा को देश की सर्वश्रेष्ठ विधानसभा बताया। उन्होंने कहा कि हरिसिंह गौर ने जनभागीदारी का सबसे पहला उदाहरण पेश किया। आज चर्चा में आलोचना का स्थान नहीं होना चाहिए। 1956 में प्रति व्यक्ति आय 261 रु थी। आज 1 लाख 5 हजार है। 2047 तक 22 लाख तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने आगे बताया कि 1956 में विधानसभा का बजट 493 करोड़ था, लेकिन आज 4 लाख 21 हजार करोड़ है। 2047 तक 20 लाख हजार करोड़ तक हो जाएगा। धर्मातंरण रोकने वाला दूसरा राज्य एमपी था। विजयवर्गीय ने कहा कि तत्कालीन सीएम रविशंकर शुक्ल ने कानून बनाया था। वल्लभ भवन, गांधी सागर और चम्बल परियोजना कैलाश नाथ काटजू की देन है। इसके बाद चाणक्य युग की शुरुआत हुई। उन्होंने डीपी मिश्र को चाणक्य बताते हुए कहा कि एमपी में विश्वविद्यालय डीपी मिश्र की देन है। उस समय देश की हर समस्या पर राय लेने दिल्ली से नेता आते थे। हास्य विनोद के पल भी विधानसभा में दिखे। गोविंद नारायण सिंह ने नोटशीट को लेकर विशेष प्रयास किए। उन्होंने जानकारी दी कि राजा नरेश चन्द्र सिंह 13 दिन सीएम रहे। श्यामाचरण शुक्ल सबसे युवा सीएम बने। उस समय बड़े क्रांतिकारी निर्णय हुए। भोपाल के विकास में श्यामचरण की महत्वपूर्ण भूमिका थी। मास्टर प्लान की शुरुआत उन्होंने की। प्रकाश चन्द्र सेठी लॉ एंड ऑर्डर के नाम से जाने जाते थे। जबरदस्त प्रशासनिक क्षमता थी। एमपी में डाकुओ के अंत की शुरुआत सेठी जी ने और खत्म शिवराज ने किया। कैलाश जोशी राजनीतिक संत कहलाते थे, उन्होंने ग्रामीण व्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वीरेंद्र सकलेचा को नर्मदा विकास का श्रेय जाता है। अर्जुन सिंह चाणक्य राजनेता थे। चुनाव में प्रशासनिक अधिकारियो का किस तरह उपयोग किया जाता है ये अर्जुन सिंह ने बताया था। विधानसभा भवन की कल्पना, पीथमपुर विकास, ऑटोमोबाइल, भारत भवन ये सोच अर्जुन सिंह की थी। अर्जुन सिंह की सोच वामपंथी थी। उस समय कांग्रेस की सोच भी यही थी। मोतीलाल वोरा मेहनती सीएम थे। कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा कि दिग्विजय सिंह की महिमा अपरंपार है। मैं कसम खा कर आया। कई परियोजनाओं में दिग्विजय सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका थी। आईआईएम और आईआईटी में पटवा जी और दिग्विजय सिंह का योगदान था। सुंदरलाल पटवा बड़ी प्रशासनिक क्षमता के धनी थे। लॉ एंड ऑर्डर, अतिक्रमण हटाने का काम पटवा और बाबूलाल जी की जोड़ी ने किया। सामाजिक सौजन्यता का उदाहरण पटवा जी ने दिया। राजनैतिक सौजन्यता का उदाहरण दिग्विजयसिंह ने दिया। वीआईपी रोड उन्नत करने का काम बाबूलाल गौर ने किया।
उन्होंने आगे कहा कि उमाभारती ने प्रदेश में सडक़ों का जाल बिछाया। उन्होंने हरसूद का विस्थापन करवाया। निर्णय करने में उमा जी का कोई सानी नहीं। शिवराज सिंह ने इतिहास रचा। आज पूरा देश जिन योजनाओ की नकल कर रहा. वे सभी योजना शिवराज जी ने शुरू कीं। कृषि कर्मण 7 बार अवार्ड मिले। महाकाल लोक उनकी देन है। कमलनाथ की प्रशासनिक क्षमता अच्छी है। मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश आगे बढ़ रहा है। औद्योगिक क्रांति कृषि क्रांति, ज्ञान, निवेश, गौ सेवा सरंक्षण पर महत्वपूर्ण काम किया। सेंट्रल विस्टा भोपाल, रामवनगमन पथ, श्री कृष्ण पाथेय, लैंड पुलिंग एक्ट वापस लेने जैसे फैसले मोहन यादव ने किए। विजयवर्गीय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जितनी योजनाएं मध्यप्रदेश को दी हैं, उतनी किसी ने नहीं दी और दूसरे राज्य आज भी उनकी योजनाओं की नकल कर रहे हैं। उनकी योजनाओं को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में उन्होंने कोई कसर नहीं रखी उज्जैन में महाकाल लोक समेत अन्य सभी धार्मिक स्थलों पर लोक बनाने का काम उन्होंने किया, लाडली लक्ष्मी, लाडली बहना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जीआईएस समेत कई योजनाएं उन्होंने शुरू की जो प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ। कमलनाथ ने भी कम समय में प्रदेश के विकास के लिए अच्छे काम किया और अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना को पूरा करने का काम कर रहे हैं। नगरीय विकास में एमपी में महत्वपूर्ण काम किए। स्वच्छता में मप्र में विशेष कार्य हुए। इंदौर ने 1 दिन में 12 लाख 40 हजार पेड़ लगाए और आज भी पूरे पेड़ जीवित हैं। एमपी आर्थिक शक्ति बनकर उभरी है। समावेशी विकास कार्य की दिशा में मप्र चल पड़ी है। 8 करोड़ जनता के विकास की जिम्मेदारी 230 सदस्यों की है। चाल, चरित्र, चेहरा, आचरण ये सब देखते हैं। जनता सब देखती है। अमित शाह संकल्प के धनी हैं, नक्सलवाद तारीख देकर खत्म किया। ्रढ्ढ सकारात्मक और नकारात्मक दोनों है।

जीडीपी 250 लाख करोड़ ले जाने का लक्ष्य
एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है और देश विदेश के निवेशक मध्यप्रदेश के प्रति आकृषित हुए हैं।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2047 तक प्रदेश की जी डी पी 15 लाख करोड़ से 250 लाख करोड़ तक ले जाने का है। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजऩ के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मध्यप्रदेश के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किया है—प्रदेश को एक संतुलित, समावेशी और आत्मनिर्भर औद्योगिक अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना, जहां युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले, एमएसएमई सशक्त हों और निवेशकों को भरोसेमंद माहौल प्राप्त हो। इसी विजन के साथ सरकार ने आगामी तीन वर्षों का मिशन तय किया है, जो अधोसंरचना, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेश और नवाचार पर केंद्रित है। विधानसभा के विशेष सत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने सरकार की उपलब्धियों, आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना और मिशन 2047 की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में औद्योगिक विकास को केवल नीतियों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे जमीन पर परिणामों में बदला गया है। मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने औद्योगीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश आज निवेशकों के लिए भरोसे, स्थिरता और दीर्घकालिक दृष्टि वाला राज्य बन चुका है। इसके साथ-साथ रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट कॉनक्लेव, सेक्टर-विशिष्ट संवाद और देश-विदेश में आयोजित इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से स्थानीय उद्यमियों, एमएसएमई इकाइयों और वैश्विक निवेशकों को सीधे संवाद का अवसर मिला। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश को लगभग 30.77 लाख करोड़ रु. के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 8.57 लाख करोड़ रु. के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं निवेश प्रोत्साहन की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और निवेश अनुकूल 18 नई नीतियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि निवेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि समयबद्ध रूप से उत्पादन और रोजगार में परिवर्तित हो।
सरकार की आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना अधोसंरचना विकास, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर आधारित है। वर्ष 2029 तक 35 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना, एक्सप्रेस-वे और कॉरिडोर आधारित औद्योगिक नोड्स का विकास, डीएमआईसी के अंतर्गत विक्रम उद्योगपुरी फेस-2 और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को गति देना इस मिशन का प्रमुख हिस्सा है। लॉजिस्टिक्स को सशक्त बनाने के लिए नए कार्गो टर्मिनल और इनलैंड कंटेनर डिपो विकसित किए जाएंगे। प्लग-एंड-प्ले पार्क और रेडी-टू-यूज़ शेड्स के माध्यम से उद्योगों की त्वरित स्थापना सुनिश्चित की जाएगी। सभी जी2बी सेवाओं को पूरी तरह पेपरलेस करते हुए सिंगल विंडो सिस्टम इंवेस्ट 3.0 के माध्यम से निवेशकों को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं दी जा रही हैं। मिशन 2047 के तहत मध्यप्रदेश को कृषि आधारित मजबूती के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। उद्योग क्षेत्र के योगदान को सशक्त करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को अधिक मूल्य संवर्धन, निर्यात और व्यापक रोजगार सृजन से जोडऩे का लक्ष्य है। सरकार का उद्देश्य है कि 2047 तक सेवा और उद्योग क्षेत्र का योगदान लगभग 75 प्रतिशत तक पहुंचे। नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, क्लीन टेक, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सनराइज सेक्टर्स में निवेश आकर्षित किया जाएगा। आईटी पार्क, साइबर सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन और लेदर क्लस्टर जैसी परियोजनाएं प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ रही हैं। मुख्यमंत्री के विजन का केंद्र रोजगार सृजन है। औद्योगिक कॉरिडोर, मेगा निवेश परियोजनाएं और एमएसएमई आधारित विकास के माध्यम से लाखों युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। एमएसएमई नीति, स्टार्टअप नीति और उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आगामी वर्षों में एमएसएमई के जरिए बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास को केवल आंकड़ों की उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के सशक्त माध्यम के रूप में आगे बढ़ा रहा है। आगामी तीन वर्ष प्रदेश के लिए निर्णायक सिद्ध होंगे, जिनमें अधोसंरचना, निवेश, नवाचार और रोजगार को एक साथ जोड़ते हुए मिशन 2047 की ठोस नींव रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को ऐसा राज्य बनाना है जहां निवेशकों को नीति-स्थिरता और प्रशासनिक भरोसा मिले, युवाओं को अपने ही प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर उपलब्ध हों और एमएसएमई प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में और अधिक सशक्त बनें। इसी दिशा में किए जा रहे योजनाबद्ध प्रयास मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और विकसित राज्य के रूप में स्थापित करेंगे। पिछले दो वर्षों मध्यप्रदेश ने विकास और नवाचार की नई ऊंचाइयां छुई हैं। यह उपलब्धियां केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हमारे परिश्रम, संकल्प और जनभागीदारी का प्रमाण हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने देश में स्किल सत्यापन एवं स्किल प्रशिक्षण में दूसरा, एनरोलमेंट, पंजीयन, प्रशिक्षण स्टायफंड वितरण (संख्या), ई-वाउचर, तथा ऋण वितरण (संख्या एवं राशि) में तीसरा, ऋण स्वीकृति (संख्या एवं राशि) में चौथा तथा टूलकिट वितरण में पाँचवां स्थान प्राप्त किया है। 48,063 ऋण प्रकरण स्वीकृत हुए, जिनकी राशि 436.34 करोड़ है। 42,559 प्रकरणों में 378.06 करोड़ का ऋण वितरित हुआ। 2,16,013 हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण मिला। 85,536 हितग्राहियों को टूलकिट और 2,45,513 हितग्राहियों को ई-वाउचर प्रदान किए गए। यह हमारी मेहनतकश जनता के आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम हैं।

जनकल्याणकारी नीतियों से सशक्त बना मप्र
मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने प्रदेश के पूंजीगत विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और दीर्घकालीन विकास-दृष्टि पर विधानसभा में संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वक्तव्य केवल आंकड़ों या परियोजनाओं की सूची भर नहीं है, बल्कि एक विकसित मध्यप्रदेश की वह स्पष्ट और ठोस रूपरेखा है, जिसे चरणबद्ध ढंग से धरातल पर उतारा जा रहा है। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि विकास की यह प्रक्रिया किसी एक वर्ग, क्षेत्र या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता और अपेक्षाओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में केवल एक एजेंडा है—प्रदेश का समग्र, संतुलित और सतत विकास। अपने वक्तव्य में राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी, निर्णायक और संवेदनशील नेतृत्व में मध्यप्रदेश की विकास यात्रा नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है और प्रदेश पूंजीगत निवेश, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तथा जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में स्थापित हो रहा है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि आज किसी भी राज्य के विकास का आकलन उसके एक्सप्रेस-वे, एलिवेटेड कॉरिडोर, हाई-स्पीड सडक़ नेटवर्क, रेलवे कनेक्टिविटी, एयरपोर्ट और आधुनिक सामाजिक अधोसंरचना के आधार पर किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया व्यय कोई साधारण खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक समृद्धि, औद्योगिक विस्तार, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन में किया गया दीर्घकालिक निवेश है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में मध्यप्रदेश एक सशक्त सहभागी बनकर आगे बढ़ रहा है
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने सदन को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लोक निर्माण विभाग के बजट में 35 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि विकास के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। डबल इंजन सरकार की शक्ति से आज वे परियोजनाएँ धरातल पर उतर रही हैं, जिनकी कल्पना पूर्व में मध्यप्रदेश में संभव नहीं मानी जाती थी। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 1 लाख 13 हजार करोड़ से अधिक की लागत से मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं स्वीकृत एवं प्रगतिरत हैं। इनमें अटल प्रगतिपथ, नर्मदा प्रगतिपथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा-निमाड़ विकासपथ, इंदौर-भोपाल एवं जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, ग्वालियर-नागपुर रणनीतिक कॉरिडोर तथा सागर-सतना ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश को उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी मिलेगी, यात्रा समय घटेगा, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और उद्योग, व्यापार, कृषि व पर्यटन को नई गति प्राप्त होगी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 77,268 किलोमीटर का विशाल सडक़ नेटवर्क विकसित किया गया है। केवल वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही 10,000 किलोमीटर से अधिक सडक़ों का निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण 17,284 करोड़ की लागत से किया गया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विभाग की कार्यक्षमता, गुणवत्ता नियंत्रण और समयबद्ध क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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