विकसित मप्र की रीढ़ बना एमएसएमई

एमएसएमई
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मप्र को इंडस्ट्रीयल हब बनाने का जो संकल्प लिया है उसके तहत सरकार को फोकस सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पर भी है। दरअसल, विकसित मप्र की रीढ़ की हड्डी एमएसएमई है। इसलिए सरकार इस क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश की कोशिश कर रही है।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार का मानना है कि कम लागत और बड़ा काम, यही वो तरीका है जो अर्थव्यवस्था को गति देकर मप्र की तस्वीर बदल सकता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) का विस्तार सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है। इसके लिए सरकार इसे प्राथमिकता में ले रही है और वो सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है जो छोटे उद्योगों के लिए वातावरण बनाने का काम करें। इसी कड़ी में करीब 200 औद्योगिक क्षेत्र केवल एमएसएमई के लिए बनाए गए हैं। विशेषज्ञों की राय है किएमएसएमई इकोनॉमी का ड्राइवर है। सबसे बड़ा रोजगार देने वाला है और निर्यात का 49 प्रतिशत एमएसएमई से निकलता है। एमएसएमई के विकास के लिए यह सही समय है। इस क्षेत्र में अभी जो निवेश करेगा, वह आने वाले 25 साल में बहुत आगे जाएगा। ईज आफ डुइंग बिजनेस में काफी काम हुआ है, लेकिन अभी बहुत सारे औद्योगिक क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर उतनी इंडस्ट्री नहीं आई हैं, जैसे कि रायसेन जिले का औद्योगिक क्षेत्र में तामोट।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) न केवल भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक रोजगार से जोडऩे का सशक्त माध्यम भी हैं। वर्ष 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 27 जून को अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस घोषित किया गया था। इसका उद्देश्य सतत विकास के लक्ष्यों में एमएसएमई के योगदान के प्रति जागरुकता बढ़ाई जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारा लक्ष्य एमएसएमई के माध्यम से प्रत्येक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को स्वरोजगार अथवा रोजगार से जोडऩे का है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस क्षेत्र को भारतीय औद्योगिक ढांचे की बुनियाद बताया है। एमएसएमई हमारे देश की आर्थिक वृद्धि में परिवर्तनकारी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा है कि हम इस क्षेत्र के पोषण और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं। वर्तमान में देशभर में एमएसएमई की संख्या 6 करोड़ से अधिक हो चुकी है और इस क्षेत्र को मिलने वाले ऋण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो 10 वर्ष पूर्व 12 लाख करोड़ रुपये था, अब 30 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। वर्तमान में ऋण गारंटी कवर को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही 5 लाख रुपये तक कार्यशील पूंजी के लिए भी कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड की सुविधा प्रदान की गई है।
प्रदेश गढ़ रहा नित नए कीर्तिमान
राज्य सरकार ने मप्र एमएसएमई विकास नीति 2025, स्टार्टअप नीति एवं कार्ययोजना 2025 संशोधित तथा भवन आवंटन नियम 2025 जारी किये। वर्ष 2025-26 में विभिन्न स्व-रोजगार योजनाओं के अंतर्गत कुल 4 लाख 15 हजार 254 हितग्राहियों को लाभान्वित किया है। इनमें 3,861.48 करोड़ की राशि वितरित की गई। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सर्वाधिक 3,83,886 हितग्राहियों को 3,429.51 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 24 हजार 349 हितग्राहियों को 224.99 करोड़ रुपये, जबकि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत 5 हजार 345 लाभार्थियों को 329 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, युवा स्वरोजगार योजना, उद्यम क्रांति योजना और भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण योजनाओं के माध्यम से भी हज़ारों हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ा गया। इन योजनाओं के साथ ही प्रदेश में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत 730 हितग्राहियों को 54.06 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत 230 हितग्राहियों को 7.86 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 200 हितग्राहियो को 1.10 करोड़ रुपये, अनुसूचित जाति कल्याण योजना के अंतर्गत 48 हितग्राहियो को 1.54 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति कल्याण योजना के अंतर्गत 65 हितग्राहियों को 0.30 करोड़ रुपये की सहायता भी प्रदान की गई। मप्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सामाजिक और आर्थिक भविष्य के शिल्पकार बन चुके हैं। यह क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर भारत की भावना को मूर्त रूप दे रहा है, बल्कि विकसित मप्र 2047 के सपने को भी साकार कर रहा है।
छोटे जिलों में बनेंगे नए औद्योगिक क्षेत्र
पन्ना, सिंगरौली और सतना जैसे छोटे जिलों में एमएसएमई के लिए 97 करोड़ से विकसित होंगे। हाल ही में एमएसएमई के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाली स्थाई वित्तीय समिति ने 9 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए प्रस्ताव को सहमति दी है। पिछले साल उद्योग विभाग में हुए बदलाव के बाद बड़े उद्योगों के साथ अब छोटे-मध्यम उद्योगों को भी प्राथमिकता से बढ़ावा देने का निर्णय हुआ था। मप्र लघु उद्योग निगम इन सभी विकास कामों का जिम्मा लेगा। अगले 3 वित्तीय वर्षों में इन क्षेत्रों के विकास काम पूरे किए जाने हैं। हर 3 महीने में अब तक हुए कामों का ब्यौरा और काम की प्रगति की जानकारी निर्माण एजेंसी से ली जाएगी। इन नए प्रोजेक्ट में भोपाल के अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र और पन्ना में डायमंड पार्क का विकास शामिल है। सभी क्षेत्रों को मिलकर 97 करोड़ 85 लाख से अधिक की लागत आएगी। पन्ना में प्रस्तावित डायमंड पार्क जल्द विकसित किया जाएगा। पन्ना की जनकपुर तहसील में 1265 करोड़ की लागत से पार्क में बिजली, पानी, सडक़ और वाटर हार्वेस्टिंग जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। जानकारी के मुताबिक पार्क के लिए 11 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है। साल 2021 में पन्ना में हीरे की पॉलिशिंग और कटाई के लिए एक डायमंड पार्क की योजना बनी थी। अचारपुरा का होगा विकास भोपाल के अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 377 करोड़ की लागत से अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जा सकेगा। गोविंदपुरा और मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में अब जगह उपलब्ध नहीं है। सीहोर के पगारिया राम में 15.40 करोड़ से नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा। वहीं सिंगरौली की एकपाई तहसील में 10.51 करोड़ से नया क्षेत्र बनेगा। अलीराजपुर की सोंडवा तहसील में 7.94 करोड़ से तो सिवनी के छपरा में या औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की रैंप योजना एवं मप्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के नेतृत्व में 3 से 5 जुलाई तक सूरत के विख्यात टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्लस्टर में मप्र के 22 एमएसएमई उद्यमियों का एक्सपोजर विजिट हुआ है है। लघु उद्योग निगम इस विजिट की नोडल एजेंसी है। इस एक्सपोजर विजिट में मप्र के विभिन्न जिलों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, मंदसौर, धार, गुना आदि से चयनित एमएसएमई इकाइयों ने भाग लिया। इनका चयन पूर्व निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर किया गया जिससे उच्च विकास क्षमता वाली इकाइयों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस भ्रमण का उद्देश्य एमएसएमई उद्यमियों को देश के प्रमुख औद्योगिक क्लस्टरों से अवगत कराना, सफल व्यावसायिक मॉडल से सीखने का अवसर देना और व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से उनके कौशल को विकसित करना है। दौरे के पहले दिन रैंप योजना के राज्य नोडल अधिकारी तथा उप मुख्य महाप्रबंधक- लघु उद्योग, अनिल थागले ने प्रतिभागियों को योजना और इस दौरे के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्य महाप्रबंधक ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया और इस प्रकार के अध्ययन दौरों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल से एमएसएमई इकाइयों को न केवल आधुनिक औद्योगिक प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलता है बल्कि वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाकर प्रतिस्पर्धात्मक रूप से आगे भी बढ़ सकते हैं। दक्षिण गुजरात चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष निखिल मद्रासी, मैन मेड टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (मंत्रा) के अध्यक्ष एवं प्रमुख उद्योगपति रजनीकांत बच्छानीवाला तथा निदेशक अरूप ने औद्योगिक क्लस्टरों पर आधारित उपयोगी जानकारियां साझा कीं। इन विशेषज्ञों ने क्लस्टर आधारित विकास, नवाचार और सहयोग के अवसरों पर प्रकाश डाला। एक्सपोजर विजिट के दौरान प्रतिभागियों ने श्री योगानंद टेक्सटाइल्स प्रा. लि., प्लस के लाइट फैशन प्रा. लि., मंत्रा, लक्ष्मीपति समूह की इकाइयों आदि का भ्रमण कर बड़े पैमाने पर उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियों को भी समझा। उद्यमियों ने बताया कि विजिट में उन्हें उन्नत उत्पादन तकनीकों और बेहतर प्रबंधन तरीकों की जानकारी मिली। नेटवर्किंग, संभावित सहयोग और विस्तार के नए अवसरों की भी पहचान हुई। यह दौरा इस बात का भी परिचायक बना कि कैसे एमएसएमई इकाइयाँ देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं और अपने क्षेत्रों में रोजगार सृजन व सामाजिक विकास को आगे बढ़ा सकती हैं। यह कार्यक्रम राज्य शासन की ज्ञान आदान-प्रदान एवं क्षमता निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रोत्साहन योजना बनी संबल
प्रदेश में महिला उद्यमिता से महिला सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा औद्योगिक वातावरण तैयार किया गया है, उसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। एमएसएमई सेक्टर को गति देने के लिए बनाई गई योजनाओं का असर अब सशक्त नारी और आत्मनिर्भर मप्र की दिशा में मजबूत कदमों के रूप में दिख रहा है। भिंड की महिला उद्यमी श्रीमती मीतू अग्रवाल की सफलता इसका बेहतरीन उदाहरण है। पारंपरिक पारिवारिक व्यवसाय को नई सोच और तकनीक के साथ आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने मेसर्स पुखराज पॉलिमर इंडस्ट्री को स्थानीय से राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। प्लास्टिक पाइप और वेदर रेजिस्टेंस वॉटर टैंक के निर्माण से जुड़े इस उद्योग को उन्होंने एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के माध्यम से विस्तार दिया। योजना के अंतर्गत उन्हें 500 लाख रुपये के निवेश पर मप्र शासन से 121 लाख रुपये की प्रोत्साहन सहायता राशि प्राप्त हुई। यह केवल आर्थिक मदद नहीं थी, बल्कि उनके सपनों को नया आधार देने का अवसर बनी। श्रीमती मीतू अग्रवाल बताती हैं कि पहले उत्पादन सीमित था, संसाधनों की कमी के कारण बड़े ऑर्डर लेने में संकोच होता था लेकिन अब नियमित उत्पादन के साथ डिलीवरी क्षमता भी बढ़ी है, जिससे ग्राहकों के बीच कंपनी की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा दोनों में इजाफा हुआ है।
श्रीमती अग्रवाल की कंपनी में तैयार किए जाने वाले टैंक एंटी-बैक्टीरियल, ऑडलेस, एंटी-अल्गल और वेदर रेजिस्टेंस तकनीक से बने होते हैं, जो हर मौसम में टिकाऊ रहते हैं। 200 से लेकर 5000 लीटर क्षमता वाले इन टैंकों की मांग न केवल मप्र में, बल्कि आसपास के राज्यों में भी बढ़ रही है। साथ ही कंपनी विभिन्न आकार के गार्डन पाइप भी बनाती है, जो घरेलू और कृषि दोनों तरह के उपयोग के लिए उपयुक्त हैं।
उद्यमिता की इस यात्रा में श्रीमती मीतू अग्रवाल सिर्फ एक महिला उद्यमी नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक बनकर उभरी हैं। उन्होंने इस धारणा को तोड़ा है कि व्यवसाय सिर्फ पुरुषों का क्षेत्र है। उनका मानना है कि अगर सही समय पर नीति और प्रोत्साहन मिले, तो महिलाएं भी उत्पादन और रोजगार सृजन की अगली पंक्ति में आ सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में औद्योगिक विकास को लेकर प्रदेश में जो प्रतिबद्धता है, उसका प्रत्यक्ष उदाहरण है 27 जून को रतलाम में होने वाला क्रढ्ढस्श्व 2025 कॉन्क्लेव। यह आयोजन न केवल निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाएगा, बल्कि मीतू अग्रवाल जैसी सफलताओं को सामने रखकर युवाओं को प्रेरित करेगा कि वे नौकरी चाहने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें। मीतू अग्रवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य सरकार के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि, मप्र में अब व्यवसाय शुरू करना पहले जितना कठिन नहीं रहा। जिस समर्थन की जरूरत मुझे थी, वो मुझे समय पर मिला। यही कारण है कि आज मैं न सिर्फ आत्मनिर्भर हूं, बल्कि कई परिवारों को रोजग़ार भी दे पा रही हूं। सरकार की यह सोच मुझे और मुझ जैसी अनेक महिलाओं को आगे बढऩे का हौसला देती है।
आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई गति
18 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मप्र एमएसएमई विकास नीति-2025 और स्टार्ट-अप पॉलिसी और कार्यान्वयन योजना-2025 को मंजूरी दी गई। इससे प्रदेश में आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। मप्र एमएसएमई विकास नीति-2025 के जरिए निवेश पर 40 प्रतिशत तक की सहायता, नए उद्योगों में नवकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन, अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमी इकाई को 48 प्रतिशत की सहायता और पिछड़े विकासखण्डों में 1.3 गुना सहायता का प्रावधान किया गया है। निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए भी एमएसएमई नीति के तहत विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इस नीति में निर्यातक इकाई को निवेश पर 52त्न तक की सहायता, निर्यात हेतु माल ढुलाई पर अधिकतम 2 करोड़ रुपए की सहायता के साथ साथ निर्यात हेतु प्रमाण पत्र पर 50 लाख रुपए की सहायता का भी प्रावधान किया गया है। मध्यम इकाई को 100 से अधिक रोजगार देने पर डेढ़ गुना अनुदान दिया जाएगा। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए प्रति कर्मचारी 5000 रुपए प्रति माह 5 वर्ष तक मदद की जाएगी। इसके साथ ही कौशल विकास प्रशिक्षण हेतु 13000 रुपए की सहायता का भी नीति में प्रावधान है। सेवा क्षेत्र में पहली बार सहायता दी गई है। इसमें लॉजिस्टिक, रिसाईकलिंग, मोटर यान स्क्रेपिंग के साथ साथ आर एंड डी शामिल है। मेडिकल डिवाइस और फुटवियर के लिए पहली बार विशेष पैकेज भी दिया गया है। वहीं, इस नीति के तहत नवीन क्षेत्र को सहायता देने का भी प्रावधान किया गया है। जिसके तहत एमएसई एक्सचेंज, लीन इंजीनियरिंग, टेस्टिंग लैब, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हेतु सहायता का भी प्रावधान किया गया है। एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने एमएसएमई और स्टार्ट-अप नीति के मंजूर होने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्रि-परिषद के सदस्यों का आभार व्यक्त किया हैं। उन्होंने कहा है कि मप्र के युवाओं के आईडियाज को इस नई नीति से नई उड़ान मिलेगी। उन्होंने बताया कि दोनों नीति से प्रगति समृद्धि और असीम संभावनाओं का एक नया अध्याय लिखा जाएगा।
मप्र स्टार्ट-अप पॉलिसी के अनुसार उत्पाद आधारित स्टार्ट-अप्स के लिये विशेष प्रावधान किए गए है। अब उन्हें विद्युत शुल्क से छूट के अलावा रोजगार सृजन प्रोत्साहन और विद्युत टैरिफ में प्रतिपूर्ति सहायता दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह स्टार्ट-अप्स के विकास के चारों चरण आईडिएशन, वैलिडेशन, अर्ली स्टेज और ग्रोथ के स्तर पर यानि युवाओं के आईडियाज को पंख देने के लिए नीति के माध्यम से हर स्तर पर सहायता की जाएगी। स्टार्ट-अप पॉलिसी के मुताबिक आंत्रप्रेन्योर इन रेसीडेंस के तहत प्रत्येक स्टार्ट-अप को 12 महीने तक की अवधि के लिए प्रतिमाह 10 हजार रूपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसी तरह वृहद स्तर पर निवेश के लिेय 100 करोड़ रूपये का कैपीटल फंड स्थापित करने के साथ ही प्रति स्टार्ट-अप अधिकतम 30 लाख रूपये का सीड अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है। नीति में बाजार उपलब्ध करवाने के लिए स्टार्ट अप्स को डिजीटल मार्केटिंग के साथ ही आयोजन में सहभागिता के प्रावधान किए गए है। पॉलिसी में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में युवाओं को बड़ी राहत दी गई है। अब योजना में 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान के साथ ही ऋण गारंटी फीस की प्रतिपूर्ति भी राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। नीति में स्टार्ट-अप्स को अधोसंरचना विकसित करने के लिए प्रमुख शहरों में मेगा इन्यूवेशन सेंटर, सेटेलाइट सेंटर, को वर्किंग स्पेस और नवाचार आधारित क्षेत्रीय क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे। एक्सलेरेशन और हैकाथान जैसे कार्यक्रमों में नीति अनुसार नवाचार को उद्यमों में बदलने में सहायता मिलेगी। पॉलिसी के प्रावधान अनुसार मप्र स्टार्ट-अप एडवाइजरी काउंसिल गठित की जाएगी। जिसके माध्यम से उद्योग जगत के अग्रणी और वैश्विक निवेश का समूह स्टार्ट-अप को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेगी। मंत्रि-परिषद ने मप्र एमएसएमई को औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन तथा प्रबंधन नियमों में सशोधन को भी मंजूरी दी है। संशोधन अनुसार विकसित किए जाने वाले औद्योगिक भू-खंडों का आबंटन प्रथम आओ-प्रथम पाओ पद्धति के स्थान पर ई-बिडिंग पद्धति से होगी। संशोधित नियम अनुसार अविकसित भूमि का आबंटन की प्रथम आओ-प्रथम पाओ के स्थान पर ऑनलाइन पद्धति से किया जाएगा। अब फ्लेटैड इंडस्ट्रीयल एरिया और कॉम्पलेक्स का निर्माण एवं आबंटन का नवीन प्रावधान किया गया है। इन संसाधनों के बाद भूमि का आबंटन सरल, पारदर्शी एवं ऑनलाइन तरीके से त्वरित गति से हो सकेगा।
वोकल फॉर लोकल पर फोकस
मप्र सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। राज्य में उद्योगों का विस्तार कर प्रदेश से निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं साकार करने के साथ-साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ पर भी उद्योग विभाग खास ध्यान दे रहा है। आत्मनिर्भर मप्र के अभियान में एक अहम हिस्सा एमएसएमई क्षेत्र का विकास और विस्तार है इसलिए राज्य सरकार का पूरा फोकस एमएमएमई को मजबूत कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की गति कायम रखना है। प्रदेश के उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। खासतौर पर पिछले दो वर्षों में एमएसएमई उद्योगों का जाल प्रदेश के हर अंचल में जिस तरह से फैला है उसने अर्थव्यवस्था को बहुत मजबूती दी है। अभी हाल ही में रतलाम में संपन्न राइज समिट में 30402 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुये हैं, जिससे 35 हजार 520 रोजगार का सृजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि देश के साथ-साथ अब मप्र भी बदल रहा है। यहां विकास के सभी क्षेत्रों में नवाचार हो रहे हैं। हर क्षेत्र में निवेश का अच्छा माहौल बना है। प्रदेश के औद्योगिक विकास का यह कारवां रूकेगा नहीं, बल्कि अब और तेज गति से आगे बढ़ेगा। रतलाम पहले सेव, साडिय़ों और सोने के लिए जाना जाता था लेकिन अब यही रतलाम स्किल, स्केल और स्टार्टअप्स के लिए जाना जाएगा। रतलाम का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। रतलाम की देश में केन्द्रीय स्थिति इसे और भी विशेष बनाती है। बहुत जल्द प्रदेश में एयर कार्गो के जरिए हवाई मार्ग से माल की आवाजाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य की बेहतरी और युवाओं को रोजगार देने के लिए हमारी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। मप्र को देश का अग्रणी प्रदेश बनाने तक हमारी कोशिशें जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिये जहां से भी हो सकेगा, वहां से निवेश लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए वे 29 जून को सूरत में रोड-शो करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रतलाम में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट (राईस) कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पूर्व स्थापित एमएसएमई इकाइयों द्वारा यदि केवल नवकरणीय संयंत्र की स्थापना के लिये पृथक से निवेश किया जाता है तो इन इकाइयों को भी नवकरणीय ऊर्जा संयंत्र में किये गये निवेश पर उद्योग विकास अनुदान की सहायता दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रतलाम में मेगा इन्वेस्टमेंट रीजन से लगे लगी 6 ग्राम बिबड़ौद, पलसोड़ी, रामपुरिया, सरवनीखुर्द, जामथुन एवं जुलवानिया क्षेत्र एवं आबादी में स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिये मार्ग निर्माण, सामुदायिक भवन एवं आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिये प्रति ग्राम पंचायत 50 लाख की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने निवेश क्षेत्र इण्डस्ट्रीयल पार्क एवं रतलाम क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों की सुविधा के लिये नवीन क्षेत्र में 220 केवी विद्युत लाईन की व्यवस्था करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि रतलाम के पोलो ग्राउंड में अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर हॉकी का एस्ट्रो टर्फ बनाया जायेगा। साथ ही रतलाम में बड़ी हवाई पट्टी का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि कालिका माता परिसर के विकास के लिये सैटेलाइट टाउन बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल इंडस्ट्री, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट (राईस) कॉन्क्लेव में प्रदेश के 4 लाख से अधिक हितग्राहियों को स्व-रोजगार के लिए 3861 करोड़ रूपए की ऋण राशि सिंगल क्लिक के जरिए उनके खातों में हस्तांतरित की। मुख्यमंत्री ने 6000 करोड़ रूपए से अधिक निवेश करने और 17600 से अधिक रोजगार प्रदान करने वाली 35 वृहद औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटन पत्र भी प्रदान किए। साथ ही 2012 करोड़ रूपए से अधिक लागत की 94 औद्योगिक इकाइयों और क्लस्टर्स का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए ही 288 एमएसएमई इकाइयों को 270 करोड़ रूपए की प्रोत्साहन राशि और 140 वृहद औद्योगिक इकाइयों को 425 करोड़ रूपए की वित्तीय सहायता राशि हस्तांतरित की। मुख्यमंत्री ने 538 एमएसएमई इकाइयों को भू-खंड आवंटन पत्र भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी नीति है कि जहां कॉन्क्लेव करते हैं, वहां इंडस्ट्री का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करते हैं। राइज कॉन्क्लेव नए उद्यमी तैयार करने का अभिनव प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा, सागर, अलीराजपुर, धार, रतलाम के उद्यमियों एवं जनप्रतिनिधों से वर्चुअली संवाद किया। यहां फूड प्रोसेसिंग, टैक्सटाइल, डेयरी इंडस्ट्री, विद्युत उपकरण निर्माण यूनिट स्थापित करने वाले उद्यमियों से जानकारी प्राप्त की।

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