नदी के मायके में बदलेगी पानी की कहानी

  • जल गंगा संवर्धन अभियान…मप्र में वॉटर बॉडीज होंगे रीचार्ज

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गुड़ी पड़वा से राज्यव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण शुरू किया गया है, जो 30 जून तक चलेगा। यह अभियान पारंपरिक जल स्रोतों (नदियों, तालाबों, कुओं) के संरक्षण, पुनरुद्धार और जल संचयन को जन-आंदोलन बनाने पर केंद्रित है, जिसमें 112 जल संरचनाओं और 100 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण के लिए व्यापक कार्ययोजना शामिल है।

विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
मप्र में मोहन सरकार ने 19 मार्च गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक पूरे प्रदेश के कुएं, बावड़ी, नदी- पोखर और तालाबों को बरसात से पहले रीचार्ज करने अभियान छेड़ा है। ये अभियान का तीसरा वर्ष है। इस वर्ष सरकार ने 2500 करोड़ रुपए की लागत से जल स्रोतों के लिए जरूरी निर्माण और उनके विकास और विस्तार का बजट रखा है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नदियों का मायका है मप्र। प्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशमी तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें तीन महीने लगातार जल स्रोतों पर काम होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस्कॉन मंदिर, इंदौर के तालाब में गंगा जल अर्पित कर जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुड़ी पड़वा से हम ये काम हाथ में ले रहे हैं। मप्र के जितने भी नदी तालाब पोखर हैं। प्राचीन जलस्त्रोत हैं, उन्हें रिचार्ज किया जाएगा ताकि जल संरक्षण के साथ ही कल का संवर्धन हो सके। ये लगातार हमारी सरकार का तीसरा वर्ष है। इसके पहले भी दो साल लगातार हमने ये प्रयास किया है, जिसकी नतीजे भी आए हैं। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता से जल एवं जल स्रोतों के संरक्षण के लिए कार्य किए जाएंगे। अभियान का समापन 30 जून 2026 को होगा। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुडऩा होगा। तभी मप्र जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक आदर्श मॉडल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलगत जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढिय़ों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से मप्र सरकार ने ये अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान मप्र में जल संवर्धन में नई मिसाल बनेगा। मप्र में सरकार ने 2024 में राज्यस्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण शुरू किया था। इसमें कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावडिय़ों की मरम्मत, नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। 2025 में चलाए गए अभियान के दूसरे चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। इन कार्यों के अंतर्गत खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावडिय़ां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण में इस वर्ष और भी व्यापक लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके लिए बड़ी तैयारियां की जा रही हैं। इस वर्ष जिन प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं और बावडिय़ों की मरम्मत, नहरों का निर्माण और सुधार, सूखी नदियों का पुनर्जीवन तथा भू-जल पुनर्भरण के लिए संरचनाओं का निर्माण शामिल है। इसके लिए 2500 करोड़ का बजट तय किया गया है।

अमृत मित्र संभालेंगे कमान
मप्र शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 में प्रदेश की जल संपदा को सहेजने और नगरीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास हेतु सुदृढ़ रणनीति तैयार की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार इस कार्य योजना का मुख्य ध्येय नगरीय निकायों में पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार करना और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है। इस अभियान में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए शासन ने सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया है कि वे नदियों, तालाबों, बावडियों और नालों के किनारों पर किए गए अतिक्रमण को चिह्नित कर तत्काल हटाने की प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें। जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त बनाने से न केवल उनके प्राकृतिक स्वरूप को लौटाया जा सकेगा। साथ ही वर्षा जल के निर्बाध प्रवाह से भू-जल स्तर में भी आशातीत वृद्धि होगी। अभियान में बुनियादी ढांचे और स्वच्छता कार्यों के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं, जिसमें अमृत 2.0 से प्रदेश की 112 जल संग्रहण संरचनाओं, जिनका क्षेत्रफल लगभग 3315 एकड़ है, के जीर्णोद्धार के लिये 67 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से 100 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण की योजना पर 664 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। विभाग ने आगामी समय में 1000 जल ग्रहण संरचनाओं के वैज्ञानिक पद्धति से संवर्धन और 5000 नाले-नालियों की सघन सफाई एवं सौंदर्यीकरण का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। नगरीय क्षेत्रों में जल संचय की आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए 5000 नई रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां स्थापित की जाएंगी, जो भविष्य की जल सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।
नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विभाग ने समस्त नगरीय निकायों में रणनीतिक स्थलों जैसे प्रमुख बाजारों, बस स्टैंडों और सार्वजनिक चौराहों पर सुव्यवस्थित प्याऊ स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे ग्रीष्मकाल में राहगीरों और आमजन को शुद्ध पेयजल सुलभ हो सकेगा। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए अमृत 2.0 के तहत 116 निकायों में 300 एकड़ क्षेत्र को नवीन हरित क्षेत्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिस पर लगभग 29 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी। आगामी मानसून सत्र के दौरान प्रदेश भर में 1 करोड़ पौधों के रोपण की तैयारी भी की गई है। अभियान में युवा शक्ति की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिये 5000 युवाओं को अमृत मित्र के रूप में माय भारत पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा, जो जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। यह एकीकृत कार्य योजना न केवल प्रदेश की जल धरोहरों को संरक्षित करेगी बल्कि एक स्वच्छ और हरित मप्र के संकल्प को भी साकार करेगी। अभियान का क्रियान्वयन जिलों में संबंधित प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में किया जाएगा। जिला स्तर पर कलेक्टर अभियान के नोडल अधिकारी होंगे। उनकी अध्यक्षता में जिला जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्ययोजना तैयार करेगी और प्रगति की निगरानी करेगी। समिति में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, समन्वयक और अभियान से जुड़े सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी शामिल होंगे। इसके साथ ही स्वयंसेवी संगठनों, उद्योग जगत, कृषि-अभियांत्रिकी शिक्षण एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, जिले के प्रतिष्ठित संत-महात्मा और अन्य सम्मानित नागरिकों को भी समिति में शामिल किया जा सकेगा। विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नोडल अधिकारी होंगे। उनके नेतृत्व में विकासखंड स्तरीय समिति अभियान से जुड़े कार्यों की निगरानी करेगी। जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले 4 से 5 सरपंच और क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा।

139 दिन तक चलेगा अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान हमारी सनातन संस्कृति की सबसे पवित्र धारा का अभियान है। जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना कोई जीवित नहीं रह सकता है। शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना है। ये सभी तत्व कभी अकेले नहीं रह सकते हैं। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड, चैत्र नवरात्रि की बधाई देते हुए प्रदेश में तीसरे चरण के जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्यप्रदेश के साथ गुजरात में भी आनंद की धारा बह रही है। हमारी नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ पड़ौसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल संचय के अभियान में देशभर के जल स्त्रोतों के विकास कार्य करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के तीसरे जल गंगा संवर्धन अभियान में 3 महीने तक लगातार जल संचय की गतिविधियां संचालित होंगी, जिसमें 2500 करोड़ की राशि से सभी विधानसभा, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचय के कार्य किए जाएंगे। हमारी सरकार ने पहले वर्ष में 30 दिन, दूसरे वर्ष में 120 दिन चलाया और मौजूदा तीसरे वर्ष में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक 139 दिनों तक प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को इंदौर के इस्कॉन मंदिर में आयोजित तीसरे राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना में सिंगल क्लिक से 12.72 करोड़ लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ लागत से लिम्बोदी तालाब, 3.82 करोड़ लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों के भूमि-पूजन सहित 22 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में जल के अपव्यय को रोकने और एक-एक बूंद संग्रहण के लिए शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है, जल है तो कल है के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार्मिक और पर्यावरणीय संदेशों से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों में भी शामिल हुए। उन्होंने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया और गौ माता की पूजा कर उन्हें गौ-ग्रास खिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान इसी का हिस्सा है। पिछले वर्षों में प्रदेश में लाखों जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है। इंदौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान के पहले वर्ष में इंदौर नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में पुरानी बावडिय़ों और तालाबों के गहरीकरण और पुनरुद्धार का कार्य किया गया। साथ ही सैकड़ों कुओं का भी जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सरकारी नहीं, बल्कि जन-जन का आंदोलन होना चाहिए।

2500 करोड़ के कार्य
साढ़े तीन माह तक चलने वाले इस प्रदेशव्यापी महाअभियान का समापन 30 जून को होगा। इसमें 18 विभाग शामिल होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का नोडल विभाग होगा, जबकि नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग सह-नोडल विभाग रहेगा। अभियान के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान का क्रियान्वयन संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में किया जाएगा। कलेक्टर जिलों में अभियान के नोडल अधिकारी होंगे। उनकी अध्यक्षता में जिला जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्य योजना तैयार कर मॉनिटरिंग करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत-समन्वयक और सभी सहभागी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों, कृषि-अभियांत्रिकी शिक्षण व शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, जिले के प्रतिष्ठित संत व महात्माओं और जिले के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को इस समिति में नामांकित किया जा सकेगा। विकास खंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नोडल अधिकारी होंगे। उनके नेतृत्व में विकास खंड जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्यों की निगरानी करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत-समन्वयक और सहभागी विभागों के विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद और जनसंपर्क विभाग शामिल हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2025 में जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा अंतर्गत प्रारंभ किए गए 86,360 खेत तालाब, 553 अमृत सरोवर, 1.5 लाख डगवेल रिचार्ज में से प्रचलित कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वॉटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। मनरेगा अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वॉटरशेड विकास 1.0 की परियोजनाओं में निर्मित किए गए चेक डेम तथा स्टापडेम की मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य किया जाएगा। माँ नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना और एक बगिया मां के नाम परियोजना के अंतर्गतविगत वर्ष किए गए पौधरोपण के गैप फिलिंग के लिए आवश्यक तैयारी की जाएगी। पूर्व निर्मित जल संग्रहण संरचनाओं जैसे तालाब, चेकडेम और स्टॉपडेम से जनसहयोग से गाद निकालने का कार्य किया जाएगा। निकाली गई मिट्टी/गाद स्थानीय किसानों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण में इस वर्ष और भी व्यापक लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके लिए विस्तृत तैयारियां की जा रही हैं। सरकार ने इस वर्ष करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से जल संवर्धन और संचयन से जुड़े निर्माण एवं वर्तमान जल संरचनाओं के विकास-विस्तार कार्य कराने का संकल्प किया है। इस वर्ष जिन प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं और बावडिय़ों की मरम्मत, नहरों का निर्माण और सुधार, सूखी नदियों का पुनर्जीवन तथा भू-जल पुनर्भरण के लिए संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं। इन सभी कार्यों का उद्देश्य प्रदेश में वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और जल स्रोतों को स्थायी बनाना है।

10 हजार से अधिक डैम का संधारण
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम के समुचित संधारण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही कई छोटे-बड़े बांधों के गेटों की मरम्मत और जल संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण कार्य भी किया जाएगा। इन संरचनाओं से वर्षा जल के संचयन को रोककर जमीन में पुनर्भरण का प्रयास रहेगा, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होगी और सिंचाई के लिए अधिक पानी उपलब्ध हो सकेगा। जल गंगा संवर्धन अभियान के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। वहीं नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सह-नोडल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इनके मार्गदर्शन में राज्य शासन के 16 से अधिक विभाग मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे। सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से समय-सीमा में क्रियान्वित करेंगे। अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर विशिष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत शुरू किए गए खेत तालाब, अमृत सरोवर और डगवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इस दौरान नए काम भी प्रारंभ किए जाएंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग शहरों में अमृत 2.0 योजना के तहत जल संरक्षण संरचनाओं के जीर्णोद्धार और नए कार्यों को शुरू करेगा। वन विभाग द्वारा इस अभियान के दौरान लगभग 1.30 लाख हैक्टेयर भू-रकबे में भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इनमें बोल्डर चेक डैम, ब्रशवुड चेक डैम, परकोलेशन पिट्स और कंटूर ट्रेंच निर्माण जैसे कार्य किए जाएंगे।
जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा लघु सिंचाई परियोजनाओं के तालाबों के पाल (बंड) की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य किया जाएगा। नहरों की साफ सफाई और टेल-एण्ड तक पानी पहुंचाने के लिए फील्ड स्टॉफ को और अधिक सक्रिय किया जाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केन्द्रों के पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। साथ ही पेयजल स्रोतों के आसपास साफ-सफाई और स्वच्छता के कार्य भी किए जाएंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में विभिन्न स्रोतों का उपयोग किया जाएगा। इनमें विभागीय योजनाओं, उप योजनाओं की तय बजट राशि उपयोग की जायेगी। इसके अतिरिक्त सांसद निधि, विधायक निधि, जनभागीदारी मद एवं कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड, इन सभी स्रोतों से भी जल संरक्षण के काम को तेजी से पूरे किये जाएंगे। अभियान प्रदेश के सभी 55 जिलों में चलाया जाएगा। हर जिले में प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में यह अभियान क्रियान्वित किया जाएगा। जिला कलेक्टर्स इस अभियान के नोडल अधिकारी बनाये गये हैं। वे विभिन्न शासकीय विभागों, समाजिक संगठनों एवं जन सहभागिता के परस्पर समन्वय से अधिकाधिक जल संचयन विकास कार्यों की योजना बनाएंगे और इनका समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करेंगे।

जल संरक्षण बनेगा जन आंदोलन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोडऩा चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुडऩा होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढिय़ों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावडिय़ां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढक़र भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावडिय़ों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावडिय़ां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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