
- पेंशनर्स को नुकसान…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में पिछले 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के रूप में 15,345 करोड़ रुपए का नुकसान होने का दावा सामने आया है। आरोप है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की सरकारों ने केंद्र सरकार की तारीख के अनुसार महंगाई भत्ता नहीं दिया, जिससे लाखों कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस मुद्दे में पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पेंशनर्स और परिवार पेंशनधारकों को भी समय पर महंगाई राहत नहीं मिल रही। वर्तमान में मोहन यादव सरकार पर भी आरोप है कि पेंशनर्स को जनवरी 2026 से राहत दी गई, जबकि यह जुलाई 2025 से मिलनी चाहिए थी।
पांचवें-छठवें वेतनमान में सबसे ज्यादा नुकसान
बताया गया है कि पांचवें और छठवें वेतनमान के दौरान करीब 11,970 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता समय पर नहीं दिया गया। हालांकि भत्ता बाद में दिया गया, लेकिन केंद्र की तय तारीख से देरी के कारण कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। सातवें वेतनमान में जुलाई 2019 से सितंबर 2021 तक 27 महीने का 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इस अवधि में राज्य में पहले कमल नाथ की सरकार थी, बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार आई, लेकिन भत्ता जारी नहीं किया गया। जनवरी 2002 से दिसंबर 2003 तक, जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे, उस दौरान करीब 24 महीने तक महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इससे कर्मचारियों को लगभग 1,260 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
