
- मप्र सरकार का नया नवाचार…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। नर्मदा मप्र की जीवन रेखा तो हैं ही, साथ ही नर्मदा केवल भौगोलिक धरोहर ही नहीं, अपितु आध्यात्मिक आस्था का भी केंद्र है। नर्मदा नदी के किनारे कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र हैं, जिनमें मुख्य रूप से अमरकंटक (उद्गम स्थल), ओंकारेश्वर (ज्योतिर्लिंग), महेश्वर (गुप्त काशी, बाणेश्वर महादेव मंदिर), और नेमावर (सिद्धेश्वर मंदिर) जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं, जो नर्मदा परिक्रमा के दौरान भक्तों के लिए विश्राम और साधना के केंद्र हैं। इन जगहों पर कई आश्रम, धर्मशालाएं और प्राचीन मंदिर हैं जहां भक्त अध्यात्मिक शांति और शक्ति प्राप्त करते हैं। अब मोहन सरकार नया नवाचार करने जा रही है। इसके तहत सरकार मप्र में नर्मदा परिक्रमा पथ के 12 स्थानों बड़े आध्यात्मिक केंद्र बनाने जा रही है।
मप्र में नर्मदा परिक्रमा देवी नर्मदा के सम्मान में एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो अमरकंटक से शुरू होकर नर्मदा नदी के दक्षिणी तट से गुजरात के भरूच तक जाती है, जहां नदी समुद्र में मिलती है, फिर उत्तरी तट से वापस अमरकंटक लौटती है, जिसमें मुख्य पड़ाव भेड़ाघाट, नर्मदापुरम, ओंकारेश्वर और महेश्वर होते हैं, और अब सरकार इसे सुगम बनाने के लिए परिक्रमा पथ विकसित कर रही है और यात्रियों के लिए प्रमाण पत्र भी जारी करेगी। मप्र सरकार नर्मदा परिक्रमा वासियों के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। अनूपपुर जिले में नर्मदा उद्गम पर नर्मदा लोक बनाने की तैयारी है। अब जानकारी मिली है कि मप्र के नर्मदा किनारे 12 स्थानों पर बड़े आध्यात्मिक केंद्र बनाए जाएंगे।
3 विभाग मिलकर करेंगे काम
नर्मदा किनारे परिक्रमा पथ पर मप्र सरकार 12 स्थानों पर जो बड़े आध्यात्मिक केंद्र बनाने जा रही है उस काम को तीन विभाग मिलकर तीन साल में पूरा करेंगे। शहरी क्षेत्र में नगरीय प्रशासन की निगरानी में लोक निर्माण विभाग काम करेगा। ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग काम करेगा। हर जगह करीब 2 एकड़ में मां नर्मदा का मंदिर और वन क्षेत्र स्थापित होगा। यह प्रोजेक्ट पंचायत विभाग के विश्राम स्थल जैसा रहेगा। इसमें नर्मदा परिक्रमा स्थानीय के अलावा अन्य लोग भी कर सकेंगे। जिन स्थानों पर यह काम होगा, उनमें नर्मदापुरम जिले के पास संगम स्थल, बरमान घाट, मंडला में महाराजपुर के पास, खलखाट, शूलपाणि झाड़ी, जोशीपुर, पामाखेड़ा, धर्मराय, बरेली के पास नर्मदा किनार, नेमावर आदि जगह शामिल हैं। इन जगहों पर यात्रियों के साथ आने वाले लोगों के लिए कार्यक्रम हेतु जगह दी जाएगी। दो एकड़ में से एक एकड़ में वन क्षेत्र भी विकसित होगा। नर्मदा नदी के करीब 2000 किमी लंबे तट पर ईको फ्रेंडली टॉयलेट, रेस्ट हाउस और मार्ग बनाए जाएंगे। इसका सर्वे शुरू हो गया है और डेढ़-डेढ़ एकड़ जमीन भी हर जिले में तलाश की जा रही है, जहां बड़े ईको फ्रेंडली रेस्ट हाउस बनाए जा सकें।
एक आध्यात्मिक केंद्र पर होगा 2 करोड़ खर्च
जानकारी के अनुसार 12 स्थानों पर जो बड़े आध्यात्मिक केंद्र बनाए जाएंगे उनमें से प्रत्येक स्थान को करीब 2 करोड़ रुपए लागत से विकसित किया जाएगा। अनूपपुर जिले स्थित नर्मदा उद्गम स्थल पर डीपीआर बन गई है। यहां करीब 100 करोड़ रुपए लागत से लोक का निर्माण होगा। इसमें बिना पेड़ काटे मां नर्मदा का मंदिर, धर्मशाला और प्राचीन इतिहास से जुड़ा संग्रहालय बनाया जाएगा। इसके अलावा नर्मदा परिक्रमा करने वाले और नर्मदा किनारे बने तीर्थ स्थलों पर रहकर नर्मदा की पूजा करने वालों के आईडी कार्ड बनाने का काम भी शुरू हो गया है। अभी खरगोन, बड़वानी, जबलपुर, धार, देवास, सीहोर, हरदा व मंडला में काम शुरू हुआ है। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल का कहना है कि मां नर्मदा की यात्रा के आध्यात्मिक स्वरूप को रखते हुए हम कई काम करने वाले हैं। कुछ हमारा विभाग करेगा और कुछ दूसरे विभाग करेंगे। इससे यात्रा सुगम और सुरक्षित होगी।
