जल जीवन मिशन से बदला ग्रामीण मप्र का चेहरा

जल जीवन मिशन
  • साफ पानी…स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण की पहचान

मप्र में डबल इंजन सरकार के समन्वय से चहूं ओर विकास दिख रहा है। इसी कड़ी में जल जीवन मिशन से साफ पानी की कल्पना साकार हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से से सिद्ध हुआ है कि साफ पानी अब सिर्फ जरूरत नहीं, स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण की पहचान बन गया है। जल जीवन मिशन से ग्रामीण मप्र का चेहरा बदल गया है।

विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
मप्र में कभी पानी के लिए मीलों चलना पड़ता था, आज नल खोलते ही घर-घर साफ पानी पहुंचता है। दरअसल, प्रदेश में जल जीवन मिशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में नल से शुद्ध जल पहुंचाकर जन-जीवन को बदल दिया है। 2019 में 13.5 लाख से बढक़र अब 81 लाख से अधिक घरों में नल कनेक्शन से पानी मिल रहा है। इससे महिलाओं को पानी ढोने से मुक्ति, जलजनित बीमारियों में कमी और बेहतर स्वास्थ्य के साथ जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव आया है। महिलाओं का समय और ऊर्जा जो पानी लाने में बर्बाद होती थी, अब वे उसका उपयोग अन्य गतिविधियों में कर पा रही हैं। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से डायरिया, हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में कमी आ रही है। एकल और समूह जलप्रदाय योजनाओं के माध्यम से छोटे और दूरदराज के गांवों में भी नल के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है, जिससे जल स्रोतों पर निर्भरता कम हुई है। गांवों में पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति की निगरानी के लिए स्थानीय समितियां काम कर रही हैं, जिससे योजना का स्थायित्व सुनिश्चित हो रहा है। यह मिशन केवल पानी की आपूर्ति नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की एक प्रक्रिया बन गया है, जो आत्मनिर्भर मप्र की परिकल्पना को साकार कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए प्रारंभ किए गए जल जीवन मिशन को मध्यप्रदेश में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मिशन के क्रियान्वयन की रफ्तार निरंतर तेज हुई है। प्रदेश के 81 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है। यह उपलब्धि केवल भौतिक आंकड़ों की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह ग्राम्य जीवन में मूलभूत बदलाव की शुरुआत भी है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों में प्रत्यक्ष लाभ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल जीवन मिशन को राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कार्यों को समय-सीमा और गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष 20 प्रतिशत परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य भी जल्द ही प्राप्त किया जाएगा। जल जीवन मिशन मध्यप्रदेश के लिए केवल योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन के पुनरुत्थान की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इस मिशन ने ग्रामीण परिवारों को न सिर्फ शुद्ध पेयजल मुहैया कराया है, बल्कि उनके जीवन में स्वास्थ्य, स्वाभिमान और समृद्धि के नए अवसर भी खोले हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने हाल ही में कहा कि जल जीवन मिशन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि का साक्षात उदाहरण है, जिसमें गांवों की नींव को सशक्त बनाकर संपूर्ण राष्ट्र को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि मध्यप्रदेश इस मिशन को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करता रहेगा।
स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता के लिए जल रेखा मोबाइल एप, जलदर्पण पोर्टल, शत-प्रतिशत जियो टैगिंग, इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, ट्यूबवेल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और ई-प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है। सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण में विभाग लगातार ग्रेड ‘ए’ में रहा है। पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर योजनाओं और पाइपलाइन नेटवर्क को रेखांकित करने में प्रदेश को देश में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। जल जीवन मिशन से ग्रामीण स्वास्थ्य संकेतकों में भी व्यापक सुधार परिलक्षित हो रहा है। स्वच्छ जल की आपूर्ति होने से विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हाल ही में नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी विकास अर्थशास्त्री डॉ. माइकल रॉबर्ट क्रेमर ने राज्य की विकास रणनीतियों पर चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश की इस पहल पर प्रसन्नता जाहिर की कि जल जीवन मिशन द्वारा ग्रामीण घरों में जल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने अपने अध्ययन का हवाला देते हुए कहा यदि परिवारों को पीने के लिए सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जाए तो लगभग 30 प्रतिशत शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। नवजात शिशु, जल जनित बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं। बच्चों से संबंधित हर चार में से एक मृत्यु सुरक्षित जल उपलब्ध कराकर रोकी जा सकती है।
समूह जल प्रदाय योजनाओं में बिजली की आवश्यकता की पूर्ति के लिए नवकरणीय ऊर्जा आधारित प्लांट स्थापित कर 60 मेगावॉट पवन ऊर्जा परियोजना की कार्ययोजना तैयार की गई है। आगामी तीन वर्षों में समस्त ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को क्रियाशील नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश सरकार जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचार और योजनाएँ मध्यप्रदेश को जल सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित कर रही हैं। जल जीवन मिशन नल का पानी उपलब्ध कराकर ग्रामीण जीवन में परिवर्तन ला रहा है। वैश्विक संस्थाओं द्वारा किए गए आकलनों में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनुमान लगाया है कि मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति से महिलाओं के प्रतिदिन 55 करोड़ घंटे बचेंगे जो पहले केवल पानी लाने में खर्च होते थे और इससे डायरिया जैसी बीमारियों से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोका जा सकेगा। 28 जनवरी, 2026 तक, देश में 2,868 परीक्षण प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं जिनमें से 1,704 को एनएबीएल से मान्यता मिली हुई है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, जेजेएम डैशबोर्ड का सिटीजन कॉर्नर ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता परिणामों तक सार्वजनिक पहुंच प्रदान करता है और शिकायतों का निवारण करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे स्थानीय जल आपूर्ति में सामुदायिक विश्वास को बढ़ावा मिलता है।
खुशहाल जीवन का आधार
मप्र के हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राज्य सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के निरंतर प्रयासों से जल जीवन मिशन को नई ऊंचाई मिल रही है। उज्जैन संभाग ने ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को पूर्ण कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में उज्जैन प्रदेश का अग्रणी संभाग बना है, जहां अब तक 7 लाख 9 हजार 65 ग्रामीण परिवारों तक नल से शुद्ध जल पहुंचाया जा रहा है। हर घर नल से जल योजना प्रदेश की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और खुशहाल ग्रामीण जीवन का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले दो वर्षों में गांव-गांव तक महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य एवं बच्चों के लिए शिक्षा और पोषण को प्राथमिकता दी है। प्रदेशभर में शुद्ध पेज जल सुविधाओं के विकास से बड़ी आबादी को राहत मिली है। जलजनित बीमारियों में कमी से ग्रामीण स्वास्थ्य में भी सकारात्मक सुधार नजर आ रहा है। पहले गांवों की महिलाएं दूर-दूर तक पानी लाने के लिए कठिनाई झेलती थीं, जिसमें उनका कीमती समय और मेहनत दोनों बर्बाद होती थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कल्याणकारी प्रयासों से घर-घर के आंगन में नल से जल उपलब्ध होने लगा है। महिलाओं के सम्मान और आत्मविश्वास को नई दिशा मिली है। उन्हें शिक्षा, स्वच्छता और आजीविका के बेहतर अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उज्जैन संभाग के उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच और आगर-मालवा जिलों के कुल 7 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। आगर-मालवा के 42,207, देवास के 1,65,383, नीचम के 31,957, उज्जैन के 1,71, 553, शाजापुर के 79,472, रतलाम के 1,49,603 और मंदसौर के 68,890 परिवार को नल जल योजना का लाभ मिला है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत यह केवल पाइपलाइन बिछाने का कार्य नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, जल गुणवत्ता परीक्षण, स्थानीय लोगों की सहभागिता और ग्रामीण जीवन को सम्मानजनक सुविधाओं से जोडऩे का अभिनव प्रयास है, जिसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सक्रियता के साथ कार्य कर रहा है। विभाग की ओर से शेष गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। जल्द ही प्रदेश के प्रत्येक ग्रामीण घर को नल से जल उपलब्ध कराया जाएगा।
मध्यप्रदेश के दूरस्थ गांवों में नल से जल पहुंचने से जीवन आसान हो गया है। राजगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चांदपुरा का छोटा-सा दूरस्थ गांव समलाबेह इसका आदर्श उदाहरण है। नल से जल की सुविधा मिलने से यह गांव नई पहचान बन गया है। मोहनपुरा ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत यहां की 130 की आबादी और 26 परिवारों तक घर-घर पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल पहुँच रहा है। पानी की कमी से जूझता यह गांव अब सुविधा, स्वास्थ्य और खुशहाली की ओर अग्रसर है। कुछ वर्ष पहले तक इस गांव का जीवन बेहद कठिन था। पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को रोज़ सुबह-शाम कई किलोमीटर दूर कुओं से पानी लाना पड़ता था। बरसात के मौसम में जब गंदा पानी इन स्रोतों में मिल जाता था तो ग्रामीणों को दूषित जल पीना पड़ता था। गर्मियों में गांव में पानी का संकट बढ़ जाता था। सीमित जलस्रोतों पर निर्भरता के कारण आए दिन झगड़े की स्थिति भी बनती थी। इन परिस्थितियों से बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही थी। समूह नलजल योजना ने इस गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। अब गांव के हर घर में पाइपलाइन से जलापूर्ति हो रही है। 26 घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। महिलाएँ बताती हैं कि पहले उनका आधा दिन पानी ढोने में ही निकल जाता था। अब यही समय परिवार और अन्य कार्यों को दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने के काम से मुक्ति मिली है और उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी है। स्वास्थ्य के स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है। पहले बारिश के दिनों में डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियाँ आम थीं। अब ग्रामीण साफ पेयजल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और इलाज पर होने वाला खर्च भी कम हो गया है। मोहनपुरा समूह जल योजना केवल समलाबेह तक सीमित नहीं है। यह योजना राजगढ़ जिले के कई गांवों को कवर कर रही है, जिनमें हजारों परिवारों तक नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुँचाया जा रहा है। योजना का उद्देश्य पूरे क्षेत्र को स्थायी जलस्रोत उपलब्ध कराना है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढिय़ों के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक जीवन की नींव है। वर्षों तक पानी ढोने को मजबूर रहीं, गांव की 70 वर्षीय नौरंग बाई बताती हैं कि जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष पानी ही रहा। रोजाना सिर पर घड़ा रखकर पानी ढोना उनकी दिनचर्या थी। बरसों तक पानी की एक-एक बाल्टी के लिए कतार में खड़े रहना पड़ा। अब घर में नल लगने से यह संघर्ष बीते जमाने की बात हो गयी है। वे कहती हैं कि अब नई पीढ़ी को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण भी मानते हैं कि नल से जल की व्यवस्था ने उनके जीवन स्तर को ही नहीं, पूरे गांव की सोच और संस्कृति को भी बदल दिया है। अब पानी केवल आवश्यकता नहीं रहा, बल्कि सम्मान, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक बन गया है।
महिलाओं के जीवन में निर्णायक बदलाव
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार ने पेयजल को नागरिकों का मूल अधिकार मानते हुए जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर तक सुरक्षित, सतत और गुणवत्तापूर्ण जल पहुंचाने की दिशा में ठोस और प्रभावी कार्य किया है। बीते दो वर्षों में विभाग ने न केवल भौतिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, बल्कि ग्रामीण समाज के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में भी सकारात्मक बदलाव लाया है। मंत्री श्रीमती उइके ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 81 लाख 21 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जो कुल लक्षित परिवारों का लगभग 73 प्रतिशत है। प्रदेश के 10 हजार 440 ग्रामों को हर घर जल घोषित किया जा चुका है और भारत सरकार द्वारा बुरहानपुर जिले को देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला घोषित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उइके का कहना है कि विगत दो वर्षों में 13 लाख 69 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नए नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। पायलट आधार पर 64 ग्रामों में 24&7 जल प्रदाय की व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में 15 हजार 238 नवीन हैंडपंप और नलकूप स्थापित किए गए हैं। उज्जैन संभाग के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों में एकल नल जल योजनाओं का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया जा चुका है, जिससे सात लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है। मंत्री ने कहा कि हर घर नल जल योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में निर्णायक बदलाव लाया है। पहले महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाने में दिन का बड़ा हिस्सा व्यर्थ हो जाता था, जिसके बाद घर या आजीविका से जुड़े अन्य कार्य कर पाना संभव नहीं होता था। अब घर में नल से जल उपलब्ध होने के कारण समय की बचत हो रही है और महिलाएं उस समय का उपयोग आयवर्धक गतिविधियों में कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि समय की बचत से महिलाएं पार्लर, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, किराना दुकान जैसे छोटे स्वरोजगार से जुड़ रही हैं। इससे उनके लिए आजीविका के नए साधन बने हैं और वे अपने परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं में सहयोग कर पा रही हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक स्थिति सशक्त हुई है। मंत्री उइके ने कहा कि घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के प्रकरणों में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे उपचार पर होने वाला अनावश्यक खर्च घटा है और परिवारों का आर्थिक पक्ष मजबूत हुआ है। बेहतर स्वास्थ्य के कारण कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है, बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति सुनिश्चित हुई है और महिलाओं को भी घरेलू एवं आजीविका से जुड़े कार्यों के लिए अधिक समय और ऊर्जा मिल रही है। शुद्ध पेयजल की सतत उपलब्धता ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्थिरता तीनों स्तरों पर ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार किया है। उइके ने कहा कि घर में पानी उपलब्ध होने से बालिकाओं को पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। विद्यालय उपस्थिति में वृद्धि हुई है और शिक्षा के स्तर में भी सुधार देखा जा रहा है। जल जीवन मिशन केवल जल आपूर्ति की योजना नहीं, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण, बालिकाओं की शिक्षा और ग्रामीण समाज की समग्र प्रगति का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य की समस्त प्रयोगशालाओं का शत-प्रतिशत एनएबीएल प्रमाणीकरण कराया गया है, जिससे मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी बना है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक जल नमूनों का परीक्षण किया गया है और महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
बदली गांवों की तस्वीर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए प्रारंभ किए गए जल जीवन मिशन को मध्यप्रदेश में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मिशन के क्रियान्वयन की रफ्तार निरंतर तेज हुई है। प्रदेश के 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है, जो कि कुल लक्षित परिवारों का 70.13 प्रतिशत है। यह उपलब्धि केवल भौतिक आंकड़ों की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह ग्राम्य जीवन में मूलभूत बदलाव की शुरुआत भी है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों में प्रत्यक्ष लाभ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल जीवन मिशन को राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कार्यों को समय-सीमा और गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष 30 प्रतिशत परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य भी जल्द ही प्राप्त किया जाएगा।
राज्य सरकार ने 27,990 गांवों के लिए एकल ग्राम नलजल योजनाएं स्वीकृत की हैं, जिनमें से 15,542 योजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं। ये योजनाएं छोटे गांवों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हो रही हैं, जहां स्थानीय स्रोतों से जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। जल निगम द्वारा क्रियान्वित 147 समूह जलप्रदाय योजनाओं में से 38 योजनाओं के कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, जिनसे 23,164 ग्रामों को लाभ मिलना आरंभ हो गया है। इन योजनाओं के माध्यम से जल प्रबंधन की दीर्घकालिक संरचना तैयार की जा रही है। भारत सरकार, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से जल जीवन मिशन (जेजेएम) को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण घरों को कार्यात्मक नल जल कनेक्शन (55 लीटर प्रति दिन, बीआईएस: 10500 मानक) प्रदान करना है। इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, अगस्त 2019 में कनेक्शनों की संख्या 3.24 करोड़ (16.71 प्रतिशत) थी जो कि 29 जनवरी 2026 तक यह संख्या बढक़र 15.79 करोड़ (81.57 प्रतिशत) से अधिक हो चुकी है, जिससे ग्रामीण भारत के अधिकांश हिस्से को जल आपूर्ति प्राप्त हो रही है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 31.12.2024 तक आईएमआईएस पोर्टल पर अद्यतन किए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 189 जिलों और 2,50,021 गांवों को हर घर जल के रूप में पंजीकृत किया गया है।
5,000 करोड़ से बदलेगी शहरों की पाइपलाइन
मप्र सरकार प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे में बदलाव करने जा रही है। मुख्यमंत्री शहरी विकास अधोसंरचना-5 के तहत 5,000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इस विशाल बजट का उपयोग जर्जर पाइपलाइनों की मरम्मत करने और उन्हें बदलने के लिए किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से अमृत परियोजनाओं के अंतराल को भरा जाएगा और लंबे समय से लंबित सीवरेज व वाटर सप्लाई के कार्यों को गति दी जाएगी। इंदौर के भागीरथपुरा जैसी जल प्रदूषण की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार ने 10 जनवरी से एक राज्यव्यापी स्वच्छ जल अभियान संचालित किया है। जल सुरक्षा, जल संरक्षण, जल जागरूकता और जल सुनवाई की थीम पर आधारित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता की जांच करना और जल प्रदाय प्रणाली में जनता का भरोसा बहाल करना है। इस अभियान के तहत अब तक 90,453 पानी के नमूने लिए गए, जिनमें से 973 सैंपल फेल पाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि 9,801 अमृत मित्र महिलाएं घर-घर जाकर पानी के सैंपल एकत्र करने के इस महत्वपूर्ण कार्य में जुटी हुई हैं। पानी की गुणवत्ता से समझौता करने वाली और सीवरेज कार्य में लापरवाही बरतने वाली 10 से अधिक ठेका कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। पारदर्शिता और जन-सुनवाई के लिए हर मंगलवार को विशेष जल सुनवाई आयोजित की जा रही है। इस पहल के माध्यम से पानी के प्रदूषण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से सुलझाया जा रहा है। इस अभियान की थीम है जल सुरक्षा, जल संरक्षण, जल जागरूकता यानी जल सुरक्षा, जल संरक्षण, जल सुनवाई। इस अभियान के तहत 90453 पानी के सैंपल लिए गए और पानी की टेस्टिंग की गई जिनमें से 973 फेल हुए है। 9801 अमृत मित्र महिलाएं घर-घर जाकर पानी के सैंपल इक_ा कर रही हैं। हर मंगलवार को जल सुनवाई की जा रही है और पानी के प्रदूषण से जुड़े मुद्दों को हल किया जा रहा है। जल सुनवाई में 2821 मामले सुलझाए गए हैं। पेयजल और सीवरेज का काम कर रही 10 से अधिक ठेका कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया गया है।
जल प्रदाय प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए सप्लाई लाइनों और सीवर लाइनों के लीकेज और क्रॉसिंग पॉइंट्स की पहचान की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक पहचाने गए 15,718 लीकेज में से 14,661 की मरम्मत पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही, प्रदेश के 3,298 ओवरहेड टैंकों में से 3,144 टैंकों की सफाई का कार्य संपन्न हो चुका है, ताकि जमा गंदगी से पानी दूषित न हो। पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रदेश के 21,215 ट्यूबवेलों में से 9,668 की गुणवत्ता जांच की गई है। इस जांच के दौरान 185 ट्यूबवेल प्रदूषित पाए गए, जिन्हें तत्काल प्रभाव से पीने के पानी के उपयोग के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर शहर और गांव वाटर सेफ (पानी के मामले में सुरक्षित) बने और नागरिकों को शुद्ध जल का मौलिक अधिकार मिल सके।

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