वंदे मातरम गाना अनिवार्य, मुसलमानों का विरोध निराधार: डॉ. सुरेंद्र जैन

डॉ. सुरेंद्र जैन

केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ राष्ट्र गीत को अब सभी संवैधानिक संस्थाओं के कार्यक्रमों-बैठकों के दौरान गाया जाना अनिवार्य कर दिया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने केंद्र सरकार के इस आदेश का स्वागत किया है और कहा है कि इससे देश के नागरिकों और बच्चों में राष्ट्र भक्ति की भावना को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। विहिप ने कहा कि पूर्व में कुछ मुसलमानों के द्वारा इसका विरोध निराधार और ‘गलत फैलाई गई धारणा’ पर आधारित है। संगठन ने अल्पसंख्यक समुदाय से अपील की है कि वह गलत फैलाई गई धारणा को पीछे छोड़ते हुए अब इसका स्वागत करे और पूरे देश के नागरिकों के साथ राष्ट्र गीत के गायन में शामिल हो। विहिप के अंतरराष्ट्रीय सहमहामन्त्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला से कहा कि देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ को गाया गया था और इसी गीत की प्रेरणा से देश के लाखों क्रांतिकारियों ने अंग्रेज सरकार की नींव हिला दी थी। इस दौरान सभी मुस्लिम क्रांतिकारियों ने भी वंदे मातरम को अपना मूल मंत्र बनाया था।

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की अभूतपूर्व सफलता से डरे अंग्रेजों ने यह समझ लिया था कि यदि हिंदू-मुसलमान एक होकर रहे तो भारत में ज्यादा दिन टिकना संभव नहीं होगा। यही कारण है कि उन्होंने अपने ‘पाले’ हुए कुछ लोगों के द्वारा इस प्रेरणा गीत वंदे मातरम के खिलाफ धार्मिक आधार पर विरोध कराया जिसके कारण हिंदू-मुसलमानों के बीच दरार डालने में वे सफल रहे। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को यह समझना चाहिए कि यदि वे धार्मिक आधार पर अल्लाह के अलावा किसी अन्य के सामने नहीं झुक सकते तो उन्हें अजमेर शरीफ भी नहीं जाना चाहिए। दरगाहों के साथ-साथ नमाज अदा करते समय भी वे जमीन का सजदा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान भाइयों से उनकी अपील है कि वे किसी अफवाह के चक्कर में न पड़ें और राष्ट्र गीत के माध्यम से देश की एकता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएं।

विहिप की यह प्रतिक्रिया पूर्व में कुछ मुसलमान नेताओं के द्वारा वंदे मातरम गाने का विरोध करने के संदर्भ में आई है। अब सरकार द्वारा सभी संवैधानिक संस्थाओं के कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्र गीत को गाने को अनिवार्य करने से इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि कुछ लोग इसका विरोध कर सकते हैं। विहिप ने कहा है कि पूरे देश के हर नागरिकों को एक साथ आकर इस महत्त्वपूर्ण समय में देश की एकता का भागीदार बनना चाहिए और देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुसार अब सभी संवैधानिक कार्यक्रमों-बैठकों, संस्थाओं के कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्र गीत गाना अनिवार्य कर दिया गया है। तीन मिनट 10 सेकेंड में वंदे मातरम राष्ट्र गीत के सभी छः छंद गाने अनिवार्य होंगे। इसे राष्ट्र गान ‘जन गण मन….’ के पहले गाया जाएगा। इस दौरान सबका खड़े रहना भी अनिवार्य होगा। हालांकि, किसी वृत्त चित्र के दौरान राष्ट्र गीत होने के अवसर पर खड़े होना अनिवार्य नहीं होगा।

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