भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और असम प्रभारी बैजयंत जय पांडा ने कहा है कि असम अब उग्रवाद की बेड़ियों से आजाद होकर देश की प्रगति का नया पावरहाउस बन गया है। अमर उजाला के पॉडकास्ट ‘अनम्यूट भारत’ में पांडा ने बेबाकी से असम चुनाव, घुसपैठ और विपक्षी नैरेटिव पर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के रिपोर्ट कार्ड के दम पर भाजपा असम में तीसरी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करने जा रही है। पांडा ने कहा कि 2016 से पहले असम हिंसा और अस्थिरता का केंद्र था, लेकिन पिछले 10 वर्षों में बोडो समझौता और हजारों उग्रवादियों के आत्मसमर्पण ने राज्य की तासीर बदल दी है। राज्य के दो-तिहाई हिस्सों से अफस्पा यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम का हटना सामान्य स्थिति की सबसे बड़ी गवाही है। जब सुरक्षा सुनिश्चित हुई, तो निवेश भी आया।
आज बोडो इलाकों तक में उद्योग लग रहे हैं और असम की जीडीपी ग्रोथ देश के औसत से 50 प्रतिशत अधिक है। घुसपैठ के सवाल पर पांडा ने स्पष्ट किया कि यह 70 साल पुराना बैकलॉग है, जिसे अब दुरुस्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हजारों एकड़ सरकारी जमीन और ऐतिहासिक नामघरों के आसपास के इलाकों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। बॉर्डर फेंसिंग का काम 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बाल विवाह और घुसपैठ पर कार्रवाई को उन्होंने केवल कानून का पालन बताया। स्पष्ट किया कि जो कानून के खिलाफ है, उस पर कार्रवाई होगी, चाहे किसी को कितना भी बुरा लगे। साथ ही जोड़ा कि भाजपा सरकार में योजनाओं के लाभ में कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन कानून सबके लिए बराबर है।
कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए पांडा ने कहा कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता केवल पॉलिटिकल टूरिज्म के लिए असम आते हैं, जबकि पीएम मोदी खुद 77 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से आ रहे नेता व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के कारण भाजपा से जुड़ रहे हैं। पांडा ने भरोसा जताया कि चाय बागान के श्रमिक, युवा और महिलाएं डबल इंजन सरकार के साथ अडिग खड़े हैं। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की छवि पर पांडा ने कहा कि वे एक पीएचडी स्कॉलर और बेहद सुसंस्कृत नेता हैं। मीडिया में उनकी सीधी बात दरअसल कड़वा सच है, जिसे सुनने का साहस विपक्ष में नहीं है। उन्होंने क्षेत्रीय दलों में बढ़ते परिवारवाद पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जहां मोदी और शाह जैसे नेता अपनी योग्यता से शिखर तक पहुंचे हैं। पांडा ने अंत में कहा कि नैरेटिव (संविधान बदलने का झूठ) अस्थायी होता है, लेकिन जीत अंततः सच की ही होती है।
