
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक साथ दो बड़े अंतरराष्ट्रीय संकेत दिए हैं। एक तरफ उन्होंने ईरान को परमाणु समझौते पर चेतावनी दी है, तो दूसरी ओर चीन के साथ रिश्तों को मजबूत बताया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता जरूरी है, वरना हालात बहुत खराब हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री के साथ अपनी हालिया बैठक को सकारात्मक बताया और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात की भी जानकारी दी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ समझौता करना चाहता है, ताकि टकराव की स्थिति न बने। उन्होंने साफ कहा कि अगर डील नहीं हुई तो हालात बहुत दर्दनाक हो सकते हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वह तनाव नहीं चाहते, लेकिन बिना समझौते के स्थिति अलग दिशा में जा सकती है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। ट्रंप ने बताया कि उनकी इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हाल ही में अच्छी बैठक हुई। उन्होंने इसे बहुत उपयोगी बातचीत बताया। माना जा रहा है कि इस बैठक में ईरान, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई। ट्रंप के बयान से संकेत मिला कि इस्राइल और अमेरिका इस मुद्दे पर करीबी तालमेल में हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि वह अप्रैल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने जाएंगे। उन्होंने बताया कि शी जिनपिंग भी इस साल बाद में अमेरिका आएंगे। ट्रंप ने कहा कि इस समय अमेरिका और चीन के संबंध अच्छे हैं और वह इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार बातचीत चल रही है। ट्रंप के ताजा बयानों से साफ है कि अमेरिका एक तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है और दूसरी तरफ चीन के साथ रिश्तों को स्थिर रखना चाहता है। एक ओर सख्त चेतावनी की भाषा है, दूसरी ओर संवाद और मुलाकात का रास्ता खुला रखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अमेरिका की विदेश नीति में दबाव और बातचीत दोनों साथ-साथ चलेंगे।
