
कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने कहा है कि एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता के अहंकार को खुद पर हावी नहीं होने दिया है। वे ऐसे नेता हैं, जो न केवल नेतृत्व करते हैं, बल्कि दूसरों को सुनने में भी गर्व महसूस करते हैं। टोनी एबॉट ने शुक्रवार को भारत के प्रमुख भू-राजनीतिक सम्मेलन रायसीना डायलॉग की जमकर सराहना की। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से पीएम मोदी के नेतृत्व शैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक होने के बावजूद पीएम मोदी में सुनने का धैर्य और सीखने की विनम्रता है। एबॉट ने एक खुले पत्र में लिखा कि पीएम मोदी उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि को सुनने के लिए खुद मौजूद रहते हैं, लेकिन भाषण नहीं देते।
एबॉट ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर सवाल उठाने वाले आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि भारत को तानाशाही देश कहना पूरी तरह से बकवास है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस देश में स्वतंत्र चुनाव, मुखर मीडिया और निष्पक्ष न्यायपालिका हो, वहां लोकतंत्र कभी खतरे में नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कोई भी तानाशाह देश ऐसे वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी नहीं कर सकता, जहां हर मुद्दे पर बेबाक चर्चा हो और कोई भी विषय प्रतिबंधित न हो। एबॉट ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को इस आयोजन का सूत्रधार बताते हुए कहा कि रायसीना डायलॉग अब स्विट्जरलैंड के दावोस और चीन के बोआओ फोरम से भी बेहतर मंच बन चुका है। उनके अनुसार यहां चर्चाएं केवल औपचारिकता या मेजबान सरकार की प्रशंसा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि कठिन सत्ता और आर्थिक शक्ति के वास्तविक संतुलन पर आधारित होती हैं।
