- मुरुगन की जगह एमपी कोटे से केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी मिल सकती है जगह
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। एल. मुरुगन के केंद्रीय मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद मध्यप्रदेश से राज्यसभा जाने की इच्छा रखने वाले नेताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस बीच भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने की संभावना को लेकर भी चर्चाएं हो सकती हैं। पार्टी के रणनीतिक समीकरणों में उन्हें राज्यसभा भेजने के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी दिए जाने का विकल्प भी शामिल हो सकता है। हाल ही में उत्तरप्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर हुई राजनीतिक चर्चाओं के दौरान भी स्मृति ईरानी का नाम सामने आया था, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। ऐसे में अब संभावना जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए स्मृति ईरानी को मप्र से राज्यसभा भेजा जा सकता है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश की रिक्त सीट पर किसी स्थानीय नेता को प्राथमिकता देता है या राष्ट्रीय स्तर के किसी चेहरे को मौका देता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। मुरुगन के इस्तीफे से मध्यप्रदेश के कोटे से एक केन्द्रीय मंत्री कम हो जाएगा। जिसकी भरपाई अगले केन्द्रीय मंत्रीमण्डल विस्तार में की जा सकती है। जिसमें मध्यप्रदेश के किसी वरिष्ठ सांसद को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में जगह मिल सकती हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही अपने मंत्रिपरिषद का विस्तार कर सकते हैं। भाजपा के सामने खाली हुई सीट पर किसी वरिष्ठ स्थानीय नेता को अवसर देने का विकल्प है। इससे प्रदेश संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। वहीं, पार्टी किसी राष्ट्रीय नेता को मध्यप्रदेश के कोटे से राज्यसभा भेजकर उसे केंद्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दे सकती है। स्मृति ईरानी का नाम इसी संभावित राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में चर्चा में आ सकता है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व की ओर से उनके नाम को लेकर कोई संकेत नहीं दिया गया है। ऐसे में फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मुरुगन से पहले गहलोत और सिंधिया ने छोड़ी थी सीट
एल. मुरुगन मध्यप्रदेश से निर्वाचित ऐसे तीसरे नेता हैं, जिन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी है। इससे पहले थावरचंद गहलोत और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी ऐसा कर चुके हैं। गहलोत ने जुलाई 2021 में कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त होने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उसी वर्ष मुरुगन पहली बार मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा चुनाव जीतने के बाद जून 2024 में राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। विधानसभा में पार्टी के संख्याबल को देखते हुए उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक है। ऐसे में उम्मीदवार का चयन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा ने एल. मुरुगन को तमिलनाडु की अवनाशी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे जॉर्ज कुरियन को पार्टी ने केरल विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था। वे भी चुनाव नहीं जीत सके। कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो चुका है और पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि भाजपा राज्यसभा के लिए नेताओं का चयन करते समय चुनावी प्रदर्शन के साथ संगठनात्मक भूमिका और राष्ट्रीय राजनीतिक जरूरतों को भी महत्व देती रही है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व बढऩे की उम्मीद
मुरुगन के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में मध्यप्रदेश के प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा हो सकती है। राजनीतिक हलकों में यह संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार होने पर प्रदेश के किसी वरिष्ठ सांसद को केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार या किसी नेता को मंत्री बनाए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यदि भाजपा किसी राष्ट्रीय चेहरे को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजती है, तो उसके साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी का समीकरण भी चर्चा का विषय बन सकता है। वहीं, स्थानीय नेता को राज्यसभा भेजने की स्थिति में प्रदेश संगठन के किसी वरिष्ठ चेहरे को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग पूरी करेगा। भाजपा के संख्याबल को देखते हुए इस सीट पर पार्टी की स्थिति मजबूत है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर रहेंगी कि पार्टी प्रदेश के किसी वरिष्ठ नेता को अवसर देती है या स्मृति ईरानी जैसे राष्ट्रीय चेहरे को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने पर विचार करती है। अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
मध्यप्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों पर भाजपा का दबदबा
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में भाजपा के पास नौ और कांग्रेस के पास दो सीटें हैं। प्रदेश से निर्वाचित सांसदों में एल. मुरुगन और तरुण चुघ ऐसे नेता हैं, जिनका राजनीतिक संबंध मध्यप्रदेश से बाहर का रहा है। इनके अलावा कविता पाटीदार, सुमित्रा वाल्मीकि, बालयोगी उमेशनाथ, बंशीलाल गुर्जर, माया नारोलिया, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट जैसे नेता प्रदेश की राजनीति से जुड़े हैं।
दो दशक में ये बाहरी नेता पहुंचे राज्यसभा
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश से अन्य राज्यों के नेताओं को राज्यसभा भेजती रही है। इनमें राज्यसभा की उपसभापति रही नजमा हेपतुल्ला, प्रकाश जावड़ेकर, एल. गणेशन, एमजे अकबर, जॉर्ज कुरियन को एमपी के कोटे से संसद के उच्च सदन में भेज चुकी है। इसके बाद 2024 में पंजाब से आने वाले तरुण चुघ और एल. मुरुगन को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। इनमें से मुरुगन केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।
