कलेक्टरों से लेकर प्रमुख सचिव स्तर तक… बदलेंगे दायित्व

  • दिसंबर में प्रमोशन, जनवरी में प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी तेज
  • गौरव चौहान
बदलेंगे दायित्व

 मध्य प्रदेश में दिसंबर से जनवरी के बीच बड़ा प्रशासनिक फेरबदल होने की संभावना है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की पदोन्नति, सेवानिवृत्ति और कार्यप्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर कई विभागों में अधिकारियों के दायित्व बदल सकते हैं। कुछ जिलों में नए कलेक्टरों की पदस्थापना भी संभावित है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें कराने की तैयारी तेज कर दी है।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने वर्ष 2026 की लंबित डीपीसी तत्काल कराने और वर्ष 2027 की पदोन्नति प्रक्रिया नवंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इससे आने वाले महीनों में प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर पदस्थापना के साथ पदोन्नति की गतिविधियां बढऩे की संभावना है। सरकार हाल के प्रशासनिक बदलावों में अधिकारियों के कार्यप्रदर्शन, विकास कार्यों की प्रगति, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय जैसे पहलुओं पर ध्यान दे रही है। पिछले दिनों 11 जिलों के कलेक्टर बदले गए थे। सूत्रों के मुताबिक, इनमें कुछ अधिकारियों को अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण हटाया गया। आगामी निकाय चुनावों को देखते हुए भी मैदानी प्रशासन की कार्यक्षमता सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
दिसंबर में पदोन्नति से बदल सकती है पदस्थापना
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दिसंबर के अंतिम सप्ताह में उपसचिव से लेकर प्रमुख सचिव स्तर तक पदोन्नति की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसमें पात्र अधिकारियों को अपर सचिव, सचिव और प्रमुख सचिव के पद पर पदोन्नत किया जा सकता है। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान का नाम भी संभावित पदोन्नति के संदर्भ में चर्चा में है। यदि पदोन्नति के बाद उनकी नई पदस्थापना होती है, तो ग्वालियर में नए कलेक्टर की नियुक्ति करनी पड़ सकती है। पदोन्नति और सेवानिवृत्ति से रिक्त होने वाले पदों के कारण विभिन्न विभागों में भी जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण हो सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय शासन के आदेश और संबंधित अधिकारियों की पात्रता के आधार पर होगा।
सेवा रिकॉर्ड और शिकायतें भी बन सकती हैं बाधा
पदोन्नति प्रक्रिया में अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड और उनके खिलाफ लंबित मामलों की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों के नाम वन्यजीव अपराध और अवैध कटाई से जुड़े मामलों के संदर्भ में चर्चा में हैं। ऐसे मामलों में सेवा अभिलेखों की जांच और निर्धारित नियमों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है। पिछली पदोन्नति प्रक्रिया में संतोष कुमार रनसोरे, बालकराम सिरसाम और मानसिंह मरावी के नाम अंतिम अधिसूचना में शामिल नहीं किए गए थे। इसके बाद उन्हें राज्य वन सेवा में वापस भेजने की स्थिति बनी थी। बताया गया था कि उनके सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी आवश्यक जानकारियां समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। रामकुमार अवधिया की ओर से केंद्रीय सतर्कता आयोग और संघ लोक सेवा आयोग में की गई शिकायतों के बाद भी यह मामला चर्चा में आया था।
सेवानिवृत्ति से भी खाली होंगे पद
आने वाले महीनों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के कारण भी प्रशासनिक बदलाव की गुंजाइश बनेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त संगठन की सचिव अरुणा गुप्ता की सेवानिवृत्ति अक्टूबर में प्रस्तावित है। नवंबर में राजस्व विभाग के अपर सचिव चंद्रशेखर वालिम्बें, शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र कुमार चौधरी और केदार सिंह सेवानिवृत्त होने वाले हैं। दिसंबर में राजस्व मंडल के सचिव ललित दाहिमा, आयुष विभाग के अपर सचिव संजय कुमार मिश्रा और पुरातत्व विभाग की आयुक्त उर्मिला शुक्ला की सेवानिवृत्ति प्रस्तावित है। इन रिक्तियों के चलते भी विभागों में नई पदस्थापनाओं की आवश्यकता हो सकती है।
डीपीसी के लिए जीएडी ने तय की समयसीमा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी विभागों में पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकें बुलाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने लंबित मामलों के निराकरण की तैयारी शुरू की है। जीएडी ने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2026 की लंबित डीपीसी तत्काल कराई जाए और वर्ष 2027 की पदोन्नति प्रक्रिया नवंबर तक पूरी की जाए। नियम-6 के तहत प्रत्येक चयन वर्ष की डीपीसी सामान्यत: उसके पूर्ववर्ती वर्ष में सितंबर से नवंबर के बीच आयोजित की जानी चाहिए। इसका उद्देश्य अगले चयन वर्ष में 31 दिसंबर तक उपलब्ध होने वाली संभावित और अप्रत्याशित रिक्तियों के लिए कर्मचारियों की पात्रता पर समय रहते विचार करना है। इस व्यवस्था से पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने और रिक्त पदों के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की स्थिति कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य वन सेवा से आईएफएस पदोन्नति पर नजर
राज्य वन सेवा के अधिकारियों को भारतीय वन सेवा (आईएफएस) कैडर में पदोन्नत करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए 19 अक्टूबर को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक प्रस्तावित बताई गई है। वन विभाग ने राज्य वन सेवा के 26 अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेजे हैं। इनमें वर्ष 2009 से 2016 बैच तक के अधिकारी शामिल बताए गए हैं। सूची में रामकुमार, मनोज कटारिया, प्रियंका चौधरी, सुरेश कुमार अहिरवार, संतोष कुमार रनसोर, मनीषा पुरवार, प्रमोद सिंह, बालकराम सिरसाम, मानसिंह मरावी, एल्विन वर्मन, प्रदीप कच्छवा, फतेह सिंह निनामा, राकेश लहरी, अंतर सिंह ओहरिया सहित अन्य अधिकारियों के नाम शामिल हैं। हालांकि, पदोन्नति के लिए अंतिम चयन संबंधित नियमों, पात्रता और सेवा अभिलेखों की जांच के बाद ही तय होगा। कुल मिलाकर, दिसंबर की पदोन्नतियों और नवंबर तक डीपीसी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देशों के चलते मध्य प्रदेश में प्रशासनिक नियुक्तियों का अगला दौर महत्वपूर्ण रहने वाला है। आईएएस अधिकारियों की नई पदस्थापनाओं से लेकर वन सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति तक, आने वाले महीनों में कई विभागों में बदलाव की स्थिति बन सकती है।

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