
- जहरीली शराब की मौतों पर हर बार कार्रवाई, पर जहर का राज अब भी बरकरार
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में जहरीली शराब का कारोबार और इससे होने वाली मौतें कोई नई समस्या नहीं हैं। सागर में शनिवार को हुई दर्दनाक घटना ने एक बार फिर इस पुराने सवाल को सामने ला दिया है कि आखिर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला मौतों के बाद ही क्यों शुरू होता है? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि जहरीली शराब पीने से मौत की पुष्टि होने के बावजूद कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आखिर शराब में कौन सा रसायन मिला था। उज्जैन, मुरैना, मंदसौर और इंदौर में पिछले वर्षों में जहरीली शराब से सामूहिक मौतों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। घटनाओं के बाद प्रशासनिक कार्रवाई हुई, आरोपी पकड़े गए, कहीं अधिकारियों को निलंबित किया गया तो कहीं आरोपियों की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई। बावजूद इसके अवैध शराब की सप्लाई का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। अब सागर की घटना के बाद एक बार फिर अवैध शराब के नेटवर्क के साथ-साथ आबकारी और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
जहरीली शराब से मौत की घटनाओं में सबसे अहम सवाल यह होता है कि शराब में ऐसा क्या मिला था, जिससे लोगों की जान चली गई। मध्य प्रदेश में सामने आए कई पुराने मामलों में शुरुआती जांच में डिनैचर्ड या मेथिलेटेड स्पिरिट जैसे पदार्थों का उल्लेख हुआ, लेकिन संबंधित रसायन की अंतिम और स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक स्तर पर सामने आने को लेकर स्थिति हमेशा साफ नहीं रही। उज्जैन की 2020 की घटना इसका बड़ा उदाहरण रही। शुरुआती रिपोर्टों में मौतों की संख्या 12 से 14 बताई गई थी, जबकि बाद के न्यायिक रिकॉर्ड में 16 मौतों का उल्लेख मिलता है। जांच में डिनैचर्ड/मेथिलेटेड स्पिरिट से संबंध की बात सामने आई और बाद में इथाइल व मिथाइल अल्कोहल के संकेतों का भी उल्लेख हुआ। मुरैना में जनवरी 2021 में छैरा और मनपुर गांवों में अवैध शराब पीने से 24 लोगों की मौत हुई थी। कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। इस मामले में आरोपियों को सजा भी हुई, लेकिन घटना के बाद भी यह सवाल बना रहा कि इस्तेमाल किए गए जहरीले मिश्रण की आधिकारिक पहचान और जानकारी आम लोगों तक कितनी स्पष्टता से पहुंची। मंदसौर और इंदौर में भी 2021 में जहरीली शराब से मौतों के बाद जांच और कार्रवाई हुई। मंदसौर के खखराई गांव में मौतों के बाद जांच समिति गठित की गई और आबकारी उपनिरीक्षक को निलंबित किया गया। आरोपी के मकान पर कार्रवाई भी हुई। इंदौर में भी सात लोगों की मौत की घटना सामने आई थी।
मौत के बाद खुलता है नेटवर्क
सागर की घटना में अब जांच जिस दिशा में बढ़ रही है, उसने अवैध शराब के नेटवर्क की सीमा भी सामने ला दी है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से सागर तक पहुंची थी। बताया जा रहा है कि अवैध शराब को बोतलों में भरकर उस पर नकली रैपर और फर्जी क्यूआर कोड लगाए जाते थे, जिससे वह देखने में असली शराब जैसी लगे। इसके बाद इसे कम कीमत पर मध्य प्रदेश भेजा जाता और स्थानीय स्तर पर महंगे दामों में बेचा जाता था। घटना के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने ललितपुर पुलिस की मदद से छापेमारी कर कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद किए जाने की भी बात सामने आई है।
मई में पकड़ा गया था गिरोह, फिर भी सागर तक पहुंची सप्लाई
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अवैध शराब का नेटवर्क पहले से पुलिस की नजर में था। मई 2026 में ललितपुर पुलिस ने अवैध शराब बनाने और तस्करी से जुड़े गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सागर और आसपास के इलाकों में नकली शराब खपाने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया था। इसके बावजूद कुछ महीने बाद यही नेटवर्क सागर के गांवों तक शराब पहुंचाने में सफल रहा। इससे निगरानी और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बताया गया है कि बांदरी, बढ़ोदिया, गूगरा खुर्द, नौराज और बैराज सहित कई गांवों तक अवैध शराब पहुंचाई जाती थी। नकली रैपर और क्यूआर कोड के जरिए शराब को असली दिखाने की कोशिश की जाती थी।
अब कार्रवाई से आगे जवाबदेही की जरूरत
सागर की घटना के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय है, संदिग्ध पकड़े जा रहे हैं और तस्करी के नेटवर्क की कडिय़ां जोडऩे की कोशिश हो रही है। लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि सिर्फ घटना के बाद गिरफ्तारी और छापेमारी से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। जरूरत इस बात की है कि अवैध शराब के नेटवर्क की सप्लाई चेन, स्थानीय वितरण और उसकी निगरानी में चूक की भी जांच हो। साथ ही जहरीली शराब से हुई मौतों में किस रसायन की मौजूदगी पाई गई, इसकी स्पष्ट वैज्ञानिक और आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक हो, ताकि हर घटना के बाद वही सवाल दोबारा न उठे। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि सागर में शराब कहां से आई; सवाल यह भी है कि जिन इलाकों में पहले से अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी थी, वहां उसे समय रहते रोका क्यों नहीं गया।
