
भारत-ईयू व्यापार समझौता: यह निर्यात क्षेत्रों के लिए ‘सुपर डील’: गोयल
भारत और 27 देशों के प्रभावशाली समूह यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस प्रस्तावित समझौते को मदर ऑफ ऑल डील्स करार देते हुए इसका वैश्विक और घरेलू महत्व बताया। गोयल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी निर्यात क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने के लिए बड़े आर्थिक क्षेत्रों के साथ रणनीतिक साझेदारी कर रहा है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री गोयल ने भरोसा जताया कि यह समझौता न केवल ऐतिहासिक होगा, बल्कि दोनों पक्षों को एक जैसे फायदा देने वाला होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार वस्तु और सेवा दोनों क्षेत्रों में उचित रूप से संतुलित है। वाणिज्य मंत्री ने इस आगामी समझौते को भारतीय निर्यात क्षेत्रों के लिए एक ‘सुपर डील’ बताया है।
फोन टैपिंग मामला: क्या टूटने तक जेल में रखना चाहते हैं: सुप्रीम कोर्ट
तेलंगाना के बहुचर्चित फोन टैपिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार से सख्त लहजे में सवाल किया कि क्या वह पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो (एसआईबी) प्रमुख टी. प्रभाकर राव को तब तक जेल में रखना चाहती है, जब तक वह पूरी तरह टूट न जाएं। यह टिप्पणी उस समय आई, जब न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ प्रभाकर राव की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई की शुरुआत में अदालत ने संकेत दिया कि वह प्रभाकर राव को दी गई अंतरिम राहत को स्थायी कर सकती है। हालांकि, तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में कानूनी सवाल गंभीर हैं, खासकर यह कि विदेश में रह रहे और भगोड़ा घोषित व्यक्ति को अग्रिम जमानत मिल सकती है या नहीं। इस पर पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा हमें ऐसा लग रहा है कि आप उन्हें तब तक जेल में रखना चाहते हैं, जब तक वह टूट न जाएं। हम अपने आदेश का ऐसा इस्तेमाल नहीं होने देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अग्रिम जमानत का मतलब यह नहीं है कि आरोपी जांच से मुक्त हो जाएगा।
भारत-जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं, वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी
भारत और जापान के रिश्तों में रणनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के साथ अब खेल की साझा भावना भी जुड़ गई है। 18वें भारत-जापान रणनीतिक संवाद के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के बीच गंभीर वैश्विक मुद्दों के साथ हल्के-फुल्के क्षण भी देखने को मिले। इस बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में आर्थिक सुरक्षा अब कूटनीति का केंद्र बिंदु बन चुकी है। जयशंकर ने एक्स पर जापानी भाषा में एक भी पोस्ट किया। इस पर जयशंकर ने कहा कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज जब हम इंडिया-जापान स्ट्रेटेजिक डायलॉग कर रहे हैं, तो मुझे यह जानकर और भी खुशी हो रही है कि मेरी तरह, मंत्री मोतेगी भी क्रिकेट के शौकीन हैं। वहीं, वार्ता में जयशंकर ने अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा कि भारत जापान के साथ साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों का रिश्ता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक, रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में बदल चुका है।
रूस ने मध्यस्थता की पेशकश कर कूटनीतिक समाधान पर दिया जोर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पहले इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की और इसके तुरंत बाद ईरान के राष्ट्रपति से संपर्क साधा। क्रेमलिन के मुताबिक, पुतिन क्षेत्र में तनाव घटाने और स्थिरता बहाल करने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों के पक्ष में हैं। रूस का कहना है कि पुतिन मध्य पूर्व और ईरान से जुड़े हालात में तनाव कम करने के लिए सक्रिय रहेंगे। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि पुतिन क्षेत्रीय हालात को शांत करने की दिशा में प्रयास जारी रखेंगे। इससे पहले पुतिन ने नेतन्याहू से बातचीत में रूस की मध्यस्थता की पेशकश भी रखी और कहा कि सुरक्षा व स्थिरता के लिए राजनीतिक रास्ता ही बेहतर विकल्प है। नेतन्याहू से फोन पर बातचीत में पुतिन ने मध्य पूर्व और ईरान की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने के पक्ष में है।
