बिच्छू राउंडअप/गले की फांस बना बयान: केसी त्यागी से जदयू ने तोड़ा नाता

गले की फांस बना बयान: केसी त्यागी से जदयू ने तोड़ा नाता
जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी के बयानों के कारण पार्टी की जमकर किरकिरी हुई। उनका बयान आईपीएल को लेकर था। वहीं नाराज जेडीयू ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दरअसल, वरिष्ठ नेता केसी त्यागी का पार्टी में अध्याय अब समाप्त हो चुका है। हाल के दिनों में केसी त्यागी के कुछ बयानों और गतिविधियों को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं। त्यागी ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया था, जिसके बाद जेडीयू नेतृत्व ने उन्हें दूरी बनाने का फैसला किया। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन के हालिया बयान से यह साफ हो गया है कि जेडीयू का अब केसी त्यागी से कोई औपचारिक संबंध नहीं रह गया है। दोनों के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल केसी त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है। इसकी वजह पार्टी से उनके लंबे और पुराने संबंध बताए जा रहे हैं। जेडीयू के भीतर यह माना जा रहा है कि त्यागी ने पार्टी के साथ लंबे समय तक अहम भूमिकाएं निभाई हैं, जिसे देखते हुए नेतृत्व किसी तरह का टकराव नहीं चाहता। त्यागी अब जेडीयू की नीतियों, फैसलों और आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते। वहीं एक दिन पहले ही केसी त्यागी ने सीएम नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी।
डोभाल बोले- संसाधन-हथियार हों, पर मनोबल न हो तो सब कुछ बेकार
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को कहा-युद्ध राष्ट्र की इच्छाशक्ति के लिए लड़े जाते हैं। हम साइकोपैथ (मनोरोगी) नहीं हैं, जिन्हें दुश्मन के शव या कटे हुए अंग देखकर संतोष या सुकून मिले। लड़ाइयां इसके लिए नहीं लड़ी जातीं। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी देश का मनोबल तोडऩे के लिए लड़े जाते हैं, ताकि वह हमारी शर्तों पर आत्मसमर्पण करे और हम अपने लक्ष्य हासिल कर सकें। अजीत डोभाल ने शनिवार को नई दिल्ली में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह के दौरान ये बाते कहीं। उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा-अपनी इच्छाशक्ति बढ़ाएं। वही इच्छाशक्ति राष्ट्रीय शक्ति बन जाती है। डोभाल ने कहा-दुनिया में हो रहे सभी युद्ध और संघर्षों को देखें तो साफ है कि कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं। इसके लिए अपनी ताकत का प्रयोग कर रहे हैं। अगर कोई देश इतना शक्तिशाली है कि कोई उसका विरोध न कर सके तो वह हमेशा स्वतंत्र रहेगा। लेकिन अगर संसाधन और हथियार हों, पर मनोबल न हो तो सब कुछ बेकार हो जाता है। मनोबल बनाए रखने के लिए लीडरशिप जरूरी होती है।
10वीं में पास होने के लिए स्कूल में सोते, मास्टरजी रात तक पढ़ाते थे: सीजेआई सूर्यकांत
के हरियाणा दौरे के दूसरे दिन खुली जीप में सवार होकर हांसी जिले में अपने पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे। यहां उनके सम्मान में एक समारोह रखा गया था। उनके साथ कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे। यहां सीजेआई ने कहा- मुझे अपने इंग्लिश के टीचर मदनखेड़ी गांव निवासी मास्टर प्रेम सिंह जी आज भी याद हैं। उन्होंने कुछ बच्चों को चुना ताकि मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा में गांव का रिजल्ट अच्छा आए। हम धान की पराली बिछाकर स्कूल के बड़े कमरे में सोते थे और रात 11-12 बजे तक मास्टर जी हमें पढ़ाते थे। यह केवल पढ़ाई नहीं थी, यह एक मां-बाप जैसी तपस्या थी। इसके बाद सीजेआई को हिसार स्थित अपने पुराने कॉलेज गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय में एलुमनी मीट में पहुंचना था। हालांकि, लेट होने के कारण वह नहीं आ पाए। एलुमनी मीट में जननायक जनता पार्टी सुप्रीमो डॉ. अजय चौटाला, पूर्व मंत्री संपत सिंह समेत उनके 12 क्लासमेट और 2 टीचर को भी न्योता दिया गया था।
रेल अधिकारी अब नहीं पहनेंगे अंग्रेजों वाला काला कोट: रेल मंत्री वैष्णव
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों से औपनिवेशिक सोच को पूरी तरह पीछे छोडऩे का आह्वान करते हुए कहा कि अंग्रेजों के जमाने का बंद गले का काला शूट अब रेलवे का औपचारिक पोशाक नहीं रहेगा। यह पहनावा अंग्रेजों ने शुरू किया था और अब आज से इसे समाप्त किया जा रहा है। यह ड्रेस अब तक निरीक्षण, परेड, विशेष अवसरों एवं वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पहनी जाती थी। हालांकि ग्रुप-डी, ट्रैकमैन एवं तकनीकी स्टाफ पर यह लागू नहीं थी। रेलमंत्री दिल्ली में आयोजित 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान विशिष्ट कार्यों के लिए रेलवे के सौ अधिकारियों को पुरस्कृत किया गया। मंत्री ने कहा-औपनिवेशिक मानसिकता को खोज-खोज कर पूरी तरह हटाना होगा। चाहे वह काम करने का तरीका हो या पहनावा। वैष्णव ने कहा- भारतीय कंपनियों और समाधानों पर भरोसा बढ़ाना होगा। गलतियों से सीख कर आगे बढ़ना होगा और भारत में विकसित तकनीक को दुनिया तक पहुंचाना होगा। युवा कार्यबल, नवाचार एवं आत्मविश्वास के साथ भारतीय रेल 2047 तक विकसित भारत की यात्रा का मजबूत स्तंभ बनेगी।

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