बिच्छू डॉट कॉम:टोटल रिकॉल/राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की सफाई, कहा- यूजीसी ने नहीं मानी सिफारिशें

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की सफाई, कहा- यूजीसी ने नहीं मानी सिफारिशें
यूजीसी के नए नियमों पर देशभर में विवाद और सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के विरोध के बाद सिफारिशें देने वाली संसदीय समिति भी घेरे में आ गई है। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह हैं। लगातार बढ़ते विरोध के बीच सिंह ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि समिति की सभी सिफारिशें यूजीसी ने नहीं मानी हैं। कहा, झूठे मामलों पर सैज्ञा हटाने का फैसला यूजीसी का था था इसका इसका संसदीय समिति से कोई संबंध नहीं है। सामान्य वर्ग को सूची से बाहर रखने पर भी समिति ने कोई टिप्पणी नहीं की थी। दिग्विजय के अनुसार, यूजीसी ने तीन सिफारिशें को स्वीकार किया लेकिन, कमेटी में एससी-एसटी-ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने और भेदभाव की परिभाषा तय करने जैसी सिफारिशों को नजरअंदाज किया। वास्तव में, यह स्पष्ट करना कि किन कृत्यों और मामलों को भेदभाव माना जाएगा, न केवल छात्रों के लिए सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि विनियमों का दुरुपयोग करके फर्जी मामले की संभावना को भी कम करेगा।
राहुल की यात्रा से सुर्खियों में आए मनोज, ईडी ने पेश किया चालान
सीहोर के आष्टा आष्टा के के कारोबारी कारोबारी मनोज परमार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ईडी की स्पेशल कोर्ट में चालान पेश किया है। ईडी के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा परमार सहित पियूष करारी और चार अन्य के खिलाफ अभियोग दायर किया है। जिसमें ईडी की जांच में पता चला कि मनोज परमार ने पंजाब नेशनल बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक की मदद से पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम और सीएम युवा उद्यमी योजना में फर्जीवाड़ा कर लोन लिया। फर्जी आवेदकों, जाली दस्तावेजों और कोटेशन तैयार कर साल 2016 में कुल 18 ऋण स्वीकृत हुए, जिनकी कुल राशि 6.20 करोड़ रुपए थी, जिनमें से 6.01 करोड़ रुपए वितरित किए गए थे। बता दें, कारोबारी मनोज उस वक्त सुर्खियों में आऐ, जब उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान छोटे बच्चों के साथ राहुल को गुल्ल के जरिए राशि भेंट की थी।
मप्र महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बोलीं- हम दलित, आदिवासी और ओबीसी के साथ
आइएएस संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए असभ्य बयान का मामला अभी थमा नहीं था, इसी बीच यूजीसी के नए नियम (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना विनियम, 2026) ने सवर्ण समाज की नाराजगी की आग में घी डालने नेका का काम कर दिया। इसे बढ़ाने का काम मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया का बहुप्रसारित वीडियो कर रहा है, जिसमें वह यूजीसी का समर्थन करते हुए कह रही हैं कि कांग्रेस केवल दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग के साथ है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इन नियमों को लेकर मध्य प्रदेश किया। में भी अलग-अलग स्थानों पर विरोध हुआ। सवर्ण समाज के युवाओं ने जबलपुर, भिंड, इंदौर सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि रीना बौरासी के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस सवर्ण समाज को पराया समझती है।
लोकपथ एप पर मिलीं 12 हजार से अधिक शिकायतें, 95 प्रतिशत का समाधान
प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग द्वारा शुरू किए गए लोकपथ मोबाइल एप पर नागरिकों द्वारा 12,000 से अधिक शिकायतें की गई हैं। इनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निराकरण भी हो चुका है। शिकायत निवारण की अवधि सात दिन से चार दिन की गई है। लोकपथ 2.0 विकसित किया गया है। बता दें कि यह एप सडक़ रखरखाव की निगरानी करने के साथ ही, नागरिक शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए भी बनाया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को रूट प्लानिंग, टोल की जानकारी, ब्लैक स्पाट अलर्ट, अस्पताल, पेट्रोल पंप, होटल, आपातकालीन एसओएस सुविधा तथा सडक़ किनारे उपलब्ध सुविधाएं और रियल टाइम मौसम की जानकारी भी उपलब्ध होती है।

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