
महिलाएं लगाएंगी पौधे, प्रत्येक पच्चीस एकड़ पर तैनात होगी एक कृषि सखी
स्व सहायता समूह की महिलाओं को समृद्ध बनाने के लिए महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में एक बगिया मां के नाम परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाई जाएगी। फलोद्यान की बगिया लगाने को लेकर समूह की महिलाओं ने खासा उत्साह दिखाया है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक 34 हजार 84 महिलाओं ने एक बगिया मां के नाम ऐप पर पंजीयन कराया है। परियोजना के अंतर्गत सरकार हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि प्रदान कर रही है। योजना के अंतर्गत प्रदेश में फलदार पौधे लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। फलोद्यान की बगिया लगाने के लिए चयनित हितग्राहियों की सहायता के लिए कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ये कृषि सखी हितग्राहियों को खाद, पानी, कीटों की रोकथाम, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक तैयार करने और अंतरवर्तीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी देंगी। प्रत्येक 25 एकड़ पर एक कृषि सखी की तैनाती की जाएगी।
किसानों को तत्काल खाद उपलब्ध कराए सरकार
पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि मप्र किसानों का प्रदेश है। प्रदेश की 70 फीसदी आबादी आज भी कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसाय पर निर्भर है, लेकिन भाजपा की सरकार किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि किसानों को यूरिया के लिए परेशान न किया जाए। उन्हें तत्काल समुचित रासायनिक खाद उपलब्ध कराया जाए। भाजपा अपने चुनावी संकल्प पत्र के वादे के मुताबिक किसानों को गेहूं और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराए। सरकार इस तरह की प्रणाली अपनाए कि किसानों को उचित समय पर खाद और बीज मिले। जब उनकी फसल पककर तैयार हो जाए, तो न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुचारू ढंग से उसकी खरीदी हो।
मनरेगा उपयंत्रियों ने 115 विधायकों व 12 मंत्रियों को दिया ज्ञापन
मनरेगा अभियंता संघ का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेशभर में संघ ने 115 विधायकों और 12 मंत्रियों को ज्ञापन सौंपकर समर्थन की मांग की। संघ के उप-प्रांताध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि मनरेगा संघ में शामिल 1335 संविदां उपयंत्रियों ने मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर संगठन (एमपीडीईए) से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि संगठन ने.10 वर्षों से उनकी मांगों को उचित मंच पर नहीं उठाया गया। इससे आहत होकर यह कदम लिया है। उधर, आरईएस और ग्रामीण सडक़ प्राधिकरण के प्रमुख अभियंताओं ने पत्र जारी कर अवकाश को शासन विरोधी बताया और वैकल्पिक ड्यूटी लगाने की बात कही। इस पर संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सतीश समेले ने कहा प्रमुख अभियंता तकनीकी रूप से जानकार नहीं हैं। उन्हें मनरेगा की कार्यप्रणाली की कोई जानकारी नहीं है। मनरेगा के उपयंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कर्मचारी नहीं हैं। अन्य विभागों के अभियंता मनरेगा कार्य नहीं कर सकते, क्योंकि तकनीकी प्राक्कलन सुरक्षित – सॉफ्टवेयर से उपयंत्रियों की व्यक्तिगत आईडी पर आधारित है।
यूरिया संकट, लग रही लाइनें, सरकारी दावा- पर्याप्त भंडारण
प्रदेश में खरीफ फसलों की बोवनी हो चुकी है। अब किसानों को सर्वाधिक आवश्यकता यूरिया की है लेकिन इसकी कमी बनी हुई है। जगह-जगह खाद लेने के लिए लाइनें लग रही हैं, लेकिन सरकार का दावा है कि यूरिया पर्याप्त है। अभी तक लगभग 13.87 लाख टन यूरिया का वितरण हो चुका है। यद्यपि, यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दो हजार टन कम है। वहीं, खाद की कमी को लेकर कांग्रेस धरना-प्रदर्शन कर रही है। राज्य सभा सदस्य विवेक तन्खा में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से किसानों को मांग के अनुरूप यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रदेश में 140 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवनी हुई है। पांच लाख हेक्टेयर मक्का का क्षेत्र बढ़ा है तो आठ लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है।