
प्लास्टिक पार्क के लिए रातापानी में बिना पेड़ काटे बिछेगी बिजली लाइन
प्लास्टिक पार्क तामोट से रातापानी नेशनल पार्क के भीतर जलाशय तक जल आपूर्ति योजना का मुद्दा शनिवार को नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग आया। इसके लिए पार्क के भीतर 11 केवी की हाईटेंशन विद्युत लाइन बिछाने और 16 इलेक्ट्रिक पोल के निर्माण का प्रस्ताव है। यह काम मध्य प्रदेश प्लास्टिक पार्क डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को करना है। कमेटी ने शर्तों के साथ बात की है कि बिना पेड़ काटे यह काम करना होगा। साथ ही जल के बहाव की दिशा को भी नहीं बदला जाएगा। एजेंडे में बताया गया कि इस प्रोजेक्ट में कुल 1.7723 हेक्टेयर भूमि का उपयोग होगा। इसमें से 0.7838 हेक्टेयर वन भूमि और 0.9885 हेक्टेयर सजस्व भूमि है। एजेंडे में कहा गया है कि तामोट स्थित प्लास्टिक पार्क की जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह बिजली लाइन आवश्यक है। बोर्ड में कहा गया है कि इस काम के दौरान मापदंडों का पूरा पालन करना होगा। मसलन, निर्माण मलबा जंगल के बाहर सुरक्षित दूरी पर फेंका जाएगा। वन्यजीव आवास को किसी भी प्रकार से नष्ट या परिवर्तित नहीं किया जाएगा।
मंत्रालय में एसओ के 145 में से 25 पद ही भरे, फाइलें अटक रहीं
मंत्रालय में प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ माने जाने वाले सेक्शन ऑफिसर (एसओ) के 145 में से स्वीकृत पदों में से केवल 25 पद भरे हैं। यानी 82 प्रतिशत पद खाली हैं। इसका सीधा असर फाइलों की मूवमेंट, नोटशीट की तैयारी, विभागीय समन्वय और समयबद्ध निर्णयों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मंत्रालय में सेक्शन ऑफिसर वह कड़ी होते हैं जो लिपिकीय स्तर से लेकर अवर सचिव और उप सचिव तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाते हैं। नियमों की व्याख्या, प्रस्तावों की प्रारंभिक जांच, वित्तीय अनुमोदन की टिप्पणी और विभागों के बीच समन्वय जैसे अहम कार्य इन्हीं के जिम्मे होते हैं। ऐसे में 82त्न से ज्यादा से पद खाली रहने का मतलब है एक-एक अधिकारी पर दो-दो सेक्शन का काम।
स्वावलंबी गोशाला: 25 जिलों में ही जमीन मिली
प्रदेश की सडक़ों को बेसहारा गायों से दो सालों में मुक्त करने का लक्ष्य लेकर चल रही मप्र सरकार स्वावलंबी गोशालाओं की योजना में तमाम परेशानियों से घिरी हुई है। सरकार के मुताबिक इस योजना के लिए 55 में से कुल 25 जिलों में ही जमीन ढूंढी जा सकी है। बाकी 30 जिलों में जमीन की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। सरकार स्वावलंबी गोशाला योजना के तहत पीपीपी मोड पर स्व-वित्त पोषित गोशालाओं की योजना पर काम कर रही है। हाल ही में खत्म हुए बजट सत्र में सरकार ने जानकारी रखी कि अब तक योजना में भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, झाबुआ, धार सहित 25 जिलों में कलेक्टरों ने जमीन आवंटित कर दी है। वहीं, उज्जैन, नर्मदापुरम, कटनी, शहडोल आदि जिलों में जमीन का चिन्हांकन चल रहा है। इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे 16 जिलों में प्रक्रिया चल रही है जबकि सतना, मंडला और सीहोर में जरुरी जमीन नहीं मिली है।
होली के बाद शुरू हो सकती है निगम मंडलों की घोषणा
मध्य प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षारत निगम मंडल, आयोग और प्राधिकरण में नियुक्ति को लेकर भाजपा में अंतिम सहमति तकरीबन बन गई है। होली के बाद निगम मंडलों में नियुक्ति के आदेश जारी होना शुरू हो सकते हैं। नई दिल्ली में शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मितिन नबीन, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश के साथ सीएम डॉ. मोहन यादव व प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की बैठक हुई। इसमें निगम मंडल और प्राधिकरण में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर लंबी चर्चा हुई। पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री से भी प्रदेश के नेताओं की चर्चा हुई। प्रदेश में 50 सरकारी निगम मंडल व प्राधिकरण हैं। इनमें अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के तौर पर राजनीतिक नियुक्तियां होती हैं।
