बिच्छू डॉट कॉम:टोटल रिकॉल/भगोरिया के बाद भी नहीं थमी औकात की तल्खी

भगोरिया के बाद भी नहीं थमी औकात की तल्खी
ढोल-मांदल की थाप और टेसू के फूलों की लाली के बीच भगोरिया के उत्सव में नेता साथ तो आए लेकिन तल्खी भी साथ दिखी। विधानसभा के बजट सत्र में जो औकात वाला विवाद शुरू हुआ था, उसकी आंच आलीराजपुर के भगोरिया मेले तक पहुंची, जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एक बार फिर आमने सामने आ गए। सोमवार को भगोरिया के उत्सवी माहौल में जब दोनों नेता मेले में एक-दूसरे के सामने पड़े, तो सिंघार ने सीधे पूछ लिया- यहां आदिवासियों का अपमान करने, उनकी औकात दिखाने या माफी मांगने आए हैं? विजयवर्गीय ने खुद को शांत रखते हुए जवाब दिया कि वह यहां राजनीति करने नहीं, भगोरिया देखने आए हैं। मेले से लौटने के बाद भी बयानों की तल्खी कम नहीं हुई है। सिंघार ने मंगलवार को नईदुनिया से चर्चा में कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी हितों की अनदेखी करती आई है और विजयवर्गीय का भगोरिया आना महज दिखावा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विजयवर्गीय ने अब तक अपने औकात वाले बयान पर माफी नहीं मांगी है।
मंत्री लिखेंगे स्टाफ के कर्मचारियों की सीआर
प्रदेश सरकार के मंत्री अपने स्टाफ में पदस्थ कर्मचारियों की सीआर लिखेंगे। प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश में मंत्रालयीन कर्मचारियों की सीआर एक सप्ताह के अंदर मांगी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मंत्रियों की स्थापना में पदस्थ तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की सीआर अब उनके मंत्रियों द्वारा लिखी जाएगी। इसी तरह जीडीए ने सभी विभाग प्रमुखों से मंत्रालय में पदस्थ कर्मचारियों की सीआर एक सप्ताह के अंदर जमा करने को कहा है। यह सीआर 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की समयावधि के लिए मांगी गई है। जिसमें विभागों को अपने यहां पदस्थ सहायक ग्रेड 1, सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड 3, मंत्रियों के निजी सहायकों, स्टेनो टाइपिस्ट व तकनीकी कर्मचारियों की सीआर देनी होगी।
मप्र की खुली जेलों में महिलाएं भी रह सकेंगी, बदलाव की तैयारी
मप्र की खुली जेलों में महिलाएं भी रह सकेंगी। इसके लिए जेल मैन्युअल में बदलाव का प्रस्ताव जेल मुख्यालय ने शासन को भेजा है। महाराष्ट्र और राजस्थान के बाद मप्र तीसरा राज्य होगा। प्रदेश की खुली जेलों में महिला कैदियों को सुरक्षा की दृष्टि से अभी नहीं रखा जाता है। अब जेल मुख्यालय के अधिकारियों का तर्क है कि महिलाओं और पुरुषों में इस आधार पर भेदभाव उचित नहीं है। खुली जेलों में भी सुरक्षा प्रबंध कड़े रहते हैं। प्रदेश में आठ खुली जेल- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, सागर, ग्वालियर और जबलपुर में हैं, जहां इन्हें रखा जा सकेगा। बता दें कि खुली जेल में उन कैदियों को रखा जाता है, जिन्हें गंभीर अपराध, जैसे आतंकी गतिविधि, देशद्रोह, संगठित अपराध के अंतर्गत सजा नहीं मिली हो या फिर आदतन अपराधी नहीं हो। जेल के अंदर अनुशासनहीनता या झगड़े का रिकॉर्ड नहीं हो।
इस वर्ष सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था 141 करोड़ से संभलेंगी
मौजूदा वर्ष में राजधानी के सरकारी अस्पतालों में 141 करोड़ से व्यवस्थाएं संभलेंगी। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार 10 करोड़ अधिक बजट मिला है। इनमें चिकित्सकों और कर्मचारियों के वेतन से लेकर अन्य सुविधाएं शामिल की गई हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में अफसरों का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार 10 करोड़ अधिक बजट मिला है। पिछले साल 129 करोड़ का सालाना बजट प्राप्त हुआ था, इस बार 10 करोड़ अधिक है। मौजूदा साल में 141 करोड़ से सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बनाई जाएंगी। इनमें राजधानी के जिला चिकित्सालय से लेकर सामुदायिक-प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और आरोग्य मंदिरों में पदस्थ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के कर्मचारियों के वेतन, सत्कार और रात्रिकालीन ड्यूटी का भत्ता शामिल किया गया है। रिटायर्ड हो चुके डॉक्टरों के स्वत्वों का भुगतान भी इसी में शामिल किया गया है।

Related Articles