बिच्छू राउंडअप/राहुल गांधी की ट्रेड डील के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी?

राहुल गांधी की ट्रेड डील के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी?
भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर हैं। वो लगातार आरोप लगा रहे हैं कि ट्रेड डील किसानों की रोजी-रोटी छीनेगा और देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करने वाला है। राहुल गांधी ने लोकसभा में व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताया है। इस कड़ी में शुक्रवार राहुल गांधी ने किसान संघों के नेताओं से मुलाकात की। राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में देश भर के किसान संघों के नेताओं से मुलाकात की, जिसमें भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध करने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की आवश्यकता के साथ-साथ किसानों और कृषि मजदूरों की आजीविका की रक्षा करने पर चर्चा की गई। कांग्रेस ने बताया कि बैठक के दौरान किसान संघ के नेताओं ने अपना विरोध जताया और मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे उगाने वाले किसानों की आजीविका के लिए अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। पार्टी ने कहा है कि किसान नेताओं और राहुल गांधी ने इस समझौते का विरोध करने और किसानों-कृषि मजदूरों की आजीविका की रक्षा करने के लिए एक बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आंदोलन की जरूरत पर चर्चा की। यह बैठक राहुल गांधी के उस बयान के एक दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार उनके खिलाफ मामले या विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकती है, लेकिन वे किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
केरल बना शहरी नीति बनाने वाला देश का पहला राज्य, रोडमैप तैयार
भविष्य की चुनौतियों और बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए केरल अपनी खुद की व्यापक शहरी नीति तैयार करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस शहरी नीति के मसौदे को मंजूरी दी गई। यह नीति स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा तैयार की गई है, जो करीब दो साल की लगातार मेहनत का नतीजा है। इस पहल की घोषणा पहली बार राज्य के 2023-24 के बजट में की गई थी। यह नीति केवल ईंट-पत्थरों के विकास की बात नहीं करती, बल्कि साल 2050 तक केरल को जलवायु-अनुकूल शहरों का एक अटूट नेटवर्क बनाने का विजन रखती है। इस नीति का उद्देश्य केरल के शहरीकरण को एक वैज्ञानिक दिशा देना है। अनुमान के मुताबिक, 2050 तक केरल की लगभग 80 प्रतिशत आबादी शहरी हो जाएगी। शहरी विकास का विस्तार पहाड़ी इलाकों और तटीय पट्टी के बीच घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत तरीके से होने की उम्मीद है। यह नीति शहरीकरण को राज्य के आर्थिक विकास में सहायक बनाने के तरीके भी बताती है।
मणिपुर हिंसा: सरकार पीड़ितों के पुनर्वास के लिए बनी कमेटी की सिफारिशें करें लागू
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा के मामलों पर सुनवाई की। कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह जातीय हिंसा से जुटी 11 एफआईआर की जांच पर दो हफ्ते के अंदर स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के बजाय मणिपुर हाई कोर्ट या गुवाहाटी हाई कोर्ट को इन मामलों के ट्रायल और जांच की निगरानी करनी चाहिए। बेंच के अनुसार, मणिपुर हाई कोर्ट में अब नए चीफ जस्टिस आ चुके हैं, इसलिए वे स्थानीय हालात को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार को निर्देश दिया कि वे जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की सिफारिशों को हर हाल में लागू करें। यह कमेटी पीड़ितों के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए बनाई गई थी। इस कमेटी में तीन पूर्व महिला जज शामिल हैं, जो अब तक पीड़ितों की मदद के लिए कई रिपोर्ट सौंप चुकी हैं।
हमेशा उम्मीद और भरोसे के साथ जीता हूं, समय जवाब देगा: डीके शिवकुमार
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात कर वापस लौट आए हैं। राज्य में नेतृत्व बदलने की चर्चाओं के बीच उन्होंने शुक्रवार को कहा कि वह उम्मीद और भरोसे के साथ जीते हैं। उन्होंने जोर दिया कि इंसान की कोशिशों का फल उसे हमेशा मिलता है। शिवकुमार के अनुसार, जहां मेहनत है वहां फल है और जहां भक्ति है वहां भगवान हैं। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उनकी कोशिशों का फल जल्द मिलने वाला है, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में फिर कभी बात करेंगे। मुख्यमंत्री बदलने की खबरों पर उन्होंने कहा कि समय ही जवाब देगा। पार्टी नेतृत्व 17 फरवरी के आसपास मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार को सत्ता के बंटवारे पर चर्चा के लिए दिल्ली बुला सकता है। इस सवाल के जवाब में शिवकुमार ने कहा, मुझे नहीं पता। देखते हैं। समय सब कुछ बता देगा। अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान शिवकुमार ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े से मुलाकात की। हालांकि उन्होंने कहा कि नेताओं के साथ नेतृत्व के मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि सब्र का फल मीठा होता है।

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