- माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नया प्रयोग शुरू किया

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
आठवीं से नौवीं में आते बच्चों का सर्वांगीण विकास करने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नया प्रयोग शुरू शुरू किया है। इसके तहत एचपीसी यानी होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। प्रारंभिक तौर पर इस प्रोजेक्ट में प्रदेश के डेढ़ सौ से अधिक स्कूलों को जोड़ा गया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल का कहना है कि यह प्रयोग सफल रहा तो आगामी सत्रों के दौरान ज्यादा से ज्यादा स्कूलों को जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार आठवीं से जो बच्चे नौवीं में आते हैं, इनकी अध्यापन में स्थिति कमजोर रहती है। इसका सीधा असर हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षा पर पड़ता है। आठवीं तक बच्चे प्राइमरी और मिडिल स्कूल के माहौल में रहते हैं, जहां मूल्यांकन का तरीका अलग होता है। नौवीं में आते ही हो जाते हैं, पढ़ाई का दबाव विषय कठिन कई बच्चे पिछडऩे लगते हैं। कई बच्चे तो पढ़ाई ही छोड़ देते हैं। इसी कमजोरी को दूर करने के लिए एचपीसी सिस्टम लाया गया है। एचपीसी यानी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट के आधार पर बच्चों को परखा जाएगा। इस सिस्टम में सिर्फ परीक्षा के नंबर नहीं देखे जाएंगे, बल्कि बच्चों की दक्षताएं बढ़ाने, स्कूल स्तर की एक्टिविटी में बच्चों का क्या प्रदर्शन है, उसको भी देखा जाएगा।
इन बिंदुओं पर मूल्यांकन होगा
बच्चे की पढ़ाई में समझ और रुचि कैसी है?: गणित, विज्ञान, भाषा में उसकी दक्षता कितनी है? खेल, कला, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में उसकी भागीदारी कैसी है? बच्चे का व्यवहार, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और टीम वर्क कैसा है? बच्चे की रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता कैसी है?
सही तस्वीर आएगी सामने
अधिकारियों के अनुसार एचपीसी में शिक्षक, सहपाठी और स्वयं बच्चे का भी मूल्यांकन शामिल होगा। शिक्षक कक्षा में बच्चे के प्रदर्शन को दर्ज करेंगे। बच्चा खुद भी अपनी प्रगति बताएगा। इससे बच्चे की सही तस्वीर सामने आएगी। इससे शिक्षकों को भी पता चलेगा कि किस बच्चे को किस विषय में मदद की जरूरत है। कमजोर बच्चे को समय रहते अतिरिक्त कक्षा, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया जा सकेगा। मंडल के अधिकारियों का मानना है कि यदि नौवीं में ही बच्चे की कमजोरी पकड़ में आ गई, तो दसवीं की बोर्ड परीक्षा में उसका प्रदर्शन बेहतर होगा। अभी कई बच्चों को नौवीं में कमजोरी का पता ही नहीं चलता और दसवीं में जाकर वे फेल हो जाते हैं। एचपीसी से बच्चे के अंदर आत्मविश्वास भी बढ़ेगा, क्योंकि उसका मूल्यांकन सिर्फ एक परीक्षा से नहीं होगा। प्रारंभिक तौर पर प्रदेश के 162 विद्यालयों में कक्षा-9 के विद्यार्थियों के लिए एचपीसी पायलेटिंग पर है।
