- मोहन सरकार की बड़ी तैयारी: मिनिस्टर्स के वर्किंग कल्चर, प्रोजेक्ट डेवलपमेंट और फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा
- गौरव चौहान

प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में में इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों में फेरबदल और प्रभार के जिलों में परिवर्तन की खबरें तेजी से चल रही हैं। लेकिन मंत्रिमंडल में फेरबदल सत्ता और संगठन दोनों के के लिए बर्र के छत्ते में हाथ डालने जैसा है, इसलिए अभी मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की संभावनाएं सबसे ज्यादा हैं। जिसकी पटकथा भी लिखी जा रही है। जानकारी के मुताबिक मुख्य सचिव कार्यालय को निर्देशित किया गया है कि वह मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट बनाएं और मुख्यमंत्री तक पहुंचाएं। इस रिपोर्ट में मंत्रियों के तीन साल के कामकाज का आकलन किया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कौन कौन से मंत्री चाल-चरित्र और चेहरा पार्टी की गाइड लाइन के अनुरूप नहीं रहे। उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया जाएगा या फिर उनके विभाग छीन लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी कैबिनेट के मंत्रियों के विभागों में जल्द फेरबदल कर सकते हैं। इसके लिए सीएम ने सभी विभागों के कामकाज की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के माध्यम से तैयार हो रही इस रिपोर्ट में विभागीय योजनाओं की प्रगति, प्रशासनिक गतिविधियों, फैसलों के क्रियान्वयन और मंत्रियों की कार्यप्रणाली का आकलन किया जाएगा। रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद इसके आधार पर कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। वहीं, मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में भी बदलाव की तैयारी है। दरअसल, मुख्यमंत्री अब विभागों के कामकाज की समीक्षा के साथ यह भी देखना चाहते हैं कि किस मंत्री ने अपने विभाग को कितनी प्राथमिकता दी है और विभागीय योजनाओं को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका कैसी रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से प्रत्येक विभाग की गतिविधियों और कामकाज का ब्योरा तैयार करने को कहा है। इसमें विभाग के मंत्री से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक की कार्यप्रणाली का आकलन शामिल रहेगा। इस रिपोर्ट को मंत्रियों की परफॉरमेंस रिपोर्ट के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल फेरबदल पर फिलहाल दिल्ली की हरी झंडी नहीं
दूसरी ओर, सूत्रों की मानी जाए तो दिल्ली की हरी झंडी नहीं मिलने के चलते मंत्रिमंडल का पुनर्गठन फिलहाल टाल दिया गया है। हालांकि प्रदेश भाजपा संगठन की इच्छा थी कि मंत्रिमंडल में बदलाव कर कुछ नए चेहरों के साथ अनुभवी विधायकों को भी मौका दिया जाए, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल इसके पक्ष में नहीं है। इसके पीछे राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण भी अहम माने जा रहे हैं। वर्तमान में मंत्री नहीं बन पाए कई विधायकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इसी उम्मीद में वे सत्ता और संगठन के साथ तालमेल बनाए हुए है। यदि अभी मंत्रिमंडल का पुनर्गठन होता है तो जिन विधायकों को जगह नहीं मिलेगी, उनकी मंत्री बनने की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है।
जिलों के प्रभार भी बदलेंगे
मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के साथ उनके प्रभार वाले जिलों में भी बदलाव किया जा सकता है। कुछ मंत्रियों को प्रभार के जिले दिए गए हैं, वे उनके गृह जिले या क्षेत्र से बहुत ज्यादा दूरी पर है, जहां का दौरा करने में उन्हें आने-जाने में ही दो दिन लग जाते हैं। ऐसे में विभागीय जिम्मेदारियों के नए बंटवारे के साथ जिलों के प्रभार में भी बदलाव किया जाना संभावित है। सरकार का जोर मंत्रियों के बीच जिम्मेदारियों का ऐसा संतुलन बनाने पर है, जिससे विभागों के कामकाज और जिलों में प्रशासनिक पकड़ दोनों बेहतर हो सकें।
इसलिए होगा विभाग में बदलाव
सत्ता और संगठन के स्तर पर यह बात सामने आती रही है कि कुछ मंत्री अपने विभागों को अपेक्षित समय नहीं दे रहे हैं। कुछ मंत्रियों की रुचि अपने विभाग के कामकाज में कम है। ऐसे में विभागों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद योजनाओं की गति और प्रशासनिक फैसलों के क्रियान्वयन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विभागवार रिपोर्ट के जरिए इसी स्थिति का आकलन करने वाले हैं। जिन विभागों में कामकाज अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, वहां विभागों की जिम्मेदारी में बदलाव किया जा सकता है।
ये मंत्री रहे विवादों में
नागर सिंह चौहान: अलीराजपुर से विधायक नागर सिंह चौहान का नाता विवादों से रहा है। उनके पास वन विभाग था, लेकिन उनकी कार्यशैली के चलते, मुख्यमंत्री ने उनसे यह विभाग छीन लिया, अब उनके पास मात्र अनुसूचित जाति मंत्रालय है। हाल ही में एक बार फिर वे विवादों में आए हैं।
लखन पटेल: लखन पटेल से अचानक पशुपालन विभाग छीन लिया गया। इसके पीछे उनकी कामकाज की कार्यशैली और स्टाफ वजह बताई गई। बताया जा रहा है कि संघ और पार्टी हाईकमान दोनों नाराज थे। इसलिए उनसे पशुपालन विभाग वापस ले लिया था।
विजय शाह: विजय शाह कर्नल सौफिया कुरैशी पर टिप्पणी को लेकर पूरे देश में चर्चित रहे। लेकिन प्रदेश का पूरा मंत्रिमंडल और सरकार उनके साथ रही। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई का फैसला नहीं लिया गया है।
प्रतिमा बागरी: प्रतिमा बागरी अपने भाई के क्रियाकलापों के कारण विवादों में आई थीं। उनके भाई पर मादक पदार्थों (गांजा) की तस्करी का आरोप लगा था। इसके अलावा प्रतिमा बागरी के बहनोई को भी बांदा क्षेत्र में गांजा के साथ गिरफ्तार किया गया था।
नरेंद्र शिवाजी पटेल: स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बेटे अभिज्ञान नरेंद्र पटेल पर भोपाल में एक होटल संचालक दंपती और मीडियाकर्मी से मारपीट का आरोप लगा था। मामले में राज्यमंत्री पटेल समर्थकों के साथ थाने पहुंच गए थे।
ये विभाग भी रहे चर्चा में
आबकारी: देवास और सागर जहरीली शराब से हुई मौतों और एक अधिकारी पर एक करोड़ की रिश्वत लेने के मामले में चर्चा में रहा।
स्वास्थ्य: छिंदवाड़ा के कफ सिरप कांड और बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले में भी विभाग की किरकिरी हुई है।
स्कूल शिक्षा: ऊंची दरों पर हुई खरीदी, शिक्षकों के तबादलों से लेकर स्कूलों के रखरखाव को लेकर विवाद होते रहे हैं।
नगरीय प्रशासन: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और ऊंची दरों पर खरीदी के कारण विभाग चर्चा में रहा।
