- चहेते सप्लायरों को मिले ऑर्डर…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्य संवाददाता, भोपाल। मध्य प्रदेश में हाल ही में सामने आए सरकारी खरीद घोटाले में जेम पोर्टल के जरिए बड़ा खेल पकड़ा गया है। अधिकारियों और चुनिंदा सप्लायरों ने मिलीभगत कर कस्टम बिड के जरिए 250 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। कस्टम बिड तब बनाई जाती है जब पोर्टल के स्टैंडर्ड कैटलॉग में कोई सामान उपलब्ध न हो या विशेष स्पेसिफिकेशन की जरूरत पड़े। इसी का फायदा उठाकर नगरीय निकायों और अन्य विभागों में इसका गलत इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अधिकारी बिड बनाते समय जानबूझकर ऐसी कठिन शर्तें और स्पेसिफिकेशन डाल देते हैं, जिन्हें सिर्फ उनके चहेते सप्लायर ही पूरा कर सकें। इससे अन्य विक्रेता या तो भाग नहीं ले पाते या तकनीकी रूप से बाहर हो जाते हैं, जिससे केवल 2-3 सप्लायर ही क्वालिफाई होते हैं। कई मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई फर्मे बनाकर फर्जी सिंडिकेट के जरिए बोलियां लगाई गईं। अलग-अलग दिखने वाली इन फर्मों के मोबाइल नंबर, ईमेल, जीएसटी और बैंक डिटेल एक ही पाए गए। एक फर्म ऊंची कीमत (कवर बिड) लगाती है, जबकि दूसरी या तीसरी फर्म थोड़ी कम कीमत पर ठेका हासिल कर लेती है।
इस तरह सामने आईं गड़बडिय़ां
बिड पास होने के बाद सप्लायर बाजार भाव से कई गुना महंगे दामों पर सामान सप्लाई करते हैं। नगरीय निकायों में कचरा गाडिय़ों जैसे उपकरणों में मामूली बदलाव (डस्टबिन जोडऩा) दिखाकर कीमतें तीन गुना तक बढ़ा दी गईं। इसके अलावा, पुराना सामान नया बताकर खपाया गया और अधिकारियों ने बिल पास कर भुगतान कर दिया। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की जांच में भी यही पैटर्न सामने आया है। जेम पोर्टल भारत सरकार का सरकारी खरीद पोर्टल है, जिसे 2016 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा पारदर्शी और पेपरलेस खरीदी के लिए लॉन्च किया गया था। इसका संचालन स्पेशल पर्ज व्हीकल कंपनी करती है। वित्त मंत्रालय के नियमों के तहत सरकारी विभागों के लिए जेम पोर्टल से खरीदी अनिवार्य की गई है। लगातार आ रही शिकायतों के बाद अब प्रदेश सरकार पोर्टल पर सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्र को पत्र लिखेगी। इससे पहले एमपी में लघु उद्योग निगम (एलयूएन) के जरिए खरीदी होती थी, लेकिन वर्तमान में उसके भी रेट कॉन्ट्रैक्ट बंद हैं, जिससे अधिकांश खरीदारी जेम पोर्टल से ही हो रही है। इस बीच कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले का स्पेशल ऑडिट कराने की मांग की है और मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
