भाजपा का 66 आकांक्षी सीटों पर सबसे अधिक फोकस

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  • मिशन-2028 की तैयारी में जुटी भाजपा,  70 हजार बूथ मजबूत करने का लक्ष्य

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में भाजपा ने मिशन-2028 की तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। सेवा-संकल्प अभियान के समापन के बाद पार्टी ने अपना फोकस बूथों की मजबूती, कमजोर विधानसभा सीटों पर पकड़ बढ़ाने और संगठनात्मक विस्तार पर केंद्रित कर दिया है। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी प्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। भाजपा और संघ की इन कवायदों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।  भाजपा ने प्रदेश की 66 विधानसभा सीटों की सूची तैयार की है, जहां पिछले चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा था। इन सीटों पर संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर काम करने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी का जोर उन क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने, स्थानीय संगठन को सक्रिय करने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका मजबूत करने पर रहेगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी पदाधिकारियों को संगठन के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने और मिशन-2028 के लिए अभी से जुटने के निर्देश दिए हैं। वहीं, संघ मध्य प्रदेश में तीन प्रांतों की मौजूदा व्यवस्था के स्थान पर सात संभागों के जरिए कामकाज संचालित करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव 2028 और लोकसभा चुनाव 2029 को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व ने जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए नए कार्यक्रम तैयार करने के संकेत दिए हैं। प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में भी नए पदाधिकारियों की मौजूदगी में संगठनात्मक कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
70 हजार से अधिक बूथों को मजबूत करने की जिम्मेदारी
भाजपा संगठन में नई जिम्मेदारियों के साथ प्रदेश प्रभारी डॉ. बिप्लब देब और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर की भूमिका भी अहम होगी। पार्टी के सामने प्रदेश के 70 हजार से अधिक बूथों को मजबूत बनाने की चुनौती है। इसके साथ ही कमजोर और कम अंतर से हार-जीत वाली विधानसभा सीटों पर विशेष रणनीति के तहत काम किया जाएगा। लगातार हार का सामना कर रही सीटों पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बेहतर करने पर जोर रहेगा।
आरएसएस में भी बदलने जा रहा संगठनात्मक ढांचा
दूसरी ओर, संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के बाद मध्य प्रदेश में संगठनात्मक पुनर्गठन की तैयारी है। वर्तमान में संघ का कामकाज महाकौशल, मध्यभारत और मालवा के तीन प्रांतों में बंटा हुआ है। प्रस्तावित व्यवस्था में प्रांत प्रचारक का पद समाप्त कर सात संभागों के माध्यम से संगठन का संचालन करने की योजना है। नई व्यवस्था में इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा, ग्वालियर और भोपाल संभाग शामिल होंगे। संभाग प्रचारक संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन की प्रमुख कड़ी होंगे और सीधे नागपुर स्थित संघ मुख्यालय के संपर्क में रहेंगे। इसके ऊपर क्षेत्र प्रचारक की भूमिका होगी।
नवंबर से फरवरी तक संगठनात्मक प्रक्रिया
सूत्रों के मुताबिक, संघ की नई व्यवस्था के तहत नवंबर से जनवरी के बीच निचले स्तर पर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। फरवरी में प्रतिनिधि सभा की बैठक में नए ढांचे को मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय और लागू होने की समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी। संघ की इस कवायद का उद्देश्य संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी बेहतर करना, प्रचारकों का कार्यक्षेत्र अधिक प्रभावी बनाना और शाखाओं का विस्तार करना बताया जा रहा है।
भाजपा और संघ की रणनीति में जमीनी नेटवर्क अहम
भाजपा का बूथ सशक्तीकरण अभियान और संघ का प्रस्तावित संभागीय पुनर्गठन अलग-अलग संगठनात्मक प्रक्रियाएं हैं, लेकिन दोनों में स्थानीय स्तर पर संपर्क, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और संगठन के विस्तार पर जोर दिखाई देता है। भाजपा जहां कमजोर विधानसभा सीटों और बूथों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, वहीं संघ छोटी संगठनात्मक इकाइयों के जरिए कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी में है। ऐसे में मिशन-2028 से पहले मध्य प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने के संकेत हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि भाजपा अपने बूथ सशक्तीकरण अभियान को किस तरह चुनावी रणनीति में बदलती है और संघ की प्रस्तावित नई व्यवस्था को कब अंतिम मंजूरी मिलती है।

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