- एमपी में 31 गिरफ्तार, विदेशी नंबरों से करोड़ों की रंगदारी का खेल
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कारोबारियों की रेकी, विदेशी नंबरों से धमकी और रकम नहीं मिलने पर घरों पर फायरिंग। मध्य प्रदेश में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों की जांच में पुलिस के सामने रंगदारी वसूलने के कथित नेटवर्क की कई परतें सामने आई हैं। भोपाल, इंदौर, खरगोन और अशोकनगर सहित अलग-अलग जिलों में सामने आए मामलों में एसआईटी की कार्रवाई के दौरान 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, हैरी बॉक्सर और हरप्रीत सिंह सैनी उर्फ टाइसन बिश्नोई अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
पुलिस की जांच का फोकस अब केवल वारदातों को अंजाम देने वाले स्थानीय आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की भूमिका का पता लगाने पर भी है जो कथित तौर पर विदेश से नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। साथ ही, दूसरे राज्यों से शूटर बुलाने, कारोबारियों की जानकारी जुटाने और डिजिटल माध्यमों से धमकियां देने के तरीकों की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच में सामने आए कथित तौर-तरीकों के अनुसार, गैंग से जुड़े आरोपी कारोबारियों और बिल्डरों को निशाना बनाने के लिए पहले उनकी आर्थिक स्थिति और कारोबार की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद विदेशी नंबरों, इंटरनेट कॉलिंग और व्हाट्सऐप के जरिए करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगे जाने के आरोप हैं। कुछ मामलों में कारोबारियों के घर या प्रतिष्ठान के वीडियो भेजकर दहशत पैदा करने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर फायरिंग या हमले की धमकी दी जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अलग-अलग जिलों में सामने आए मामलों के बीच संपर्क और संचालन का कितना साझा नेटवर्क था।
भोपाल में 10 करोड़ की मांग, घर पर कराई गई फायरिंग
राजधानी के कोलार रोड स्थित पार्वती नगर में रियल एस्टेट और सराफा कारोबारी गौरव जैन से कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। मामले में विदेशी नंबरों और इंटरनेट कॉलिंग के इस्तेमाल की बात सामने आई। शिकायत के मुताबिक, रकम नहीं मिलने पर कारोबारी के घर पर फायरिंग कराई गई। इस मामले में उत्तर प्रदेश के बांदा से जुड़े शूटर आनंद मिश्रा सहित अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की गई। वीडियो बनाने और घटना में सहयोग करने के आरोप में निर्मल तिवारी तथा राजस्थान के जेपी डारा के नाम भी सामने आए। पुलिस ने इस मामले में कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। हरप्रीत सिंह सैनी उर्फ टाइसन बिश्नोई के खिलाफ 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
खरगोन से अशोकनगर तक सामने आए मामले
खरगोन में कारोबारी दिलीप राठौर के घर पर फायरिंग और 10 करोड़ रुपये की कथित मांग का मामला सामने आया। सोशल मीडिया पर घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा भी किया गया। इस मामले में 15 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। अशोकनगर में एक कारोबारी से कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये मांगे गए। मामले में मनीष जांगिड़ को पेट्रोल बमों के साथ पकड़े जाने और राजपाल सिंह चंद्रावत की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
हैरी बॉक्सर और टाइसन की तलाश
जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, हैरी बॉक्सर और टाइसन बिश्नोई की भूमिका कई मामलों में संदिग्ध बताई गई है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर दोनों के विदेश से नेटवर्क संचालित करने की आशंका जताई गई है, हालांकि उनके मौजूदा ठिकाने और प्रत्येक मामले में उनकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पुलिस इन आरोपियों तक पहुंचने के लिए लुकआउट सर्कुलर और केंद्रीय एजेंसियों की मदद से कानूनी विकल्पों पर काम कर रही है। विदेश में मौजूद संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनकी पहचान, लोकेशन और संबंधित मामलों में उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
मुंबई की घटना से कनेक्शन की भी पड़ताल
फिल्मी सितारे टाइगर श्रॉफ से जुड़ी कथित फायरिंग की घटना के बाद पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि मुंबई और मध्य प्रदेश में सामने आए मामलों के बीच कोई संबंध है या नहीं। बताया गया है कि घटना के बाद गैंग के नाम से जिम्मेदारी लेने के दावे और अन्य संदर्भों की जांच की जा रही है। हालांकि, केवल किसी गैंग के नाम से जिम्मेदारी लेने या वारदात के तरीके में समानता होने से दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध साबित नहीं होता। इसके लिए कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, आरोपियों के संपर्क और अन्य जांच निष्कर्षों का मिलान जरूरी होगा।
डिजिटल धमकी से अंतरराज्यीय नेटवर्क तक जांच
मध्य प्रदेश में सामने आए मामलों ने पुलिस के सामने कई स्तरों पर जांच की जरूरत पैदा की है। इसमें कारोबारियों की जानकारी जुटाने वाले लोगों की पहचान, दूसरे राज्यों से शूटरों की कथित भर्ती, डिजिटल माध्यमों से धमकी देने वालों का पता लगाना और विदेश में बैठे संदिग्धों तक पहुंचना शामिल है। 31 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का अहम सवाल यह है कि कथित नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था, अलग-अलग वारदातों के बीच क्या संबंध था और रंगदारी की रकम किस माध्यम से वसूली या हस्तांतरित की जाती थी। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष ही इस कथित नेटवर्क की वास्तविक सीमा स्पष्ट कर सकेंगे। विदेश में मौजूद बताए जा रहे संदिग्धों की गिरफ्तारी और मुंबई की घटना से संभावित संबंध की पुष्टि आगे की जांच पर निर्भर करेगी।
