करीब ढाई लाख प्राथमिक शिक्षकों को मिल सकता है लाभ

  • जिला संवर्ग के शिक्षकों का दूसरे जिले में तबादला नहीं
  • वरिष्ठता प्रभावित होने के मामले में इंदौर खंडपीठ का अहम फैसला

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने जिला संवर्ग के प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजिला तबादले और वरिष्ठता से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि वह चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से निर्णय लेकर आदेश जारी करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक आधार पर किसी प्राथमिक शिक्षक का दूसरे जिले में तबादला करने से उसकी वरिष्ठता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
मामला जनजातीय कार्य विभाग के स्कूल में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक पद्म कुमार पुष्पम की याचिका से जुड़ा है। शिक्षक ने अपने अंतरजिला तबादले को चुनौती देते हुए कहा था कि नए जिले में कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से वरिष्ठता निर्धारित करने का प्रावधान उनके हितों को प्रभावित करता है। हाईकोर्ट ने इस आपत्ति पर विचार करने की जरूरत मानी और शासन को मामले में दोबारा निर्णय लेने के निर्देश दिए।
वरिष्ठता के मुद्दे पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
याचिकाकर्ता पद्म कुमार पुष्पम ने अदालत को बताया कि उनका पद जिला संवर्ग के अंतर्गत आता है। मध्य प्रदेश जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग (सेवा एवं भर्ती) नियमों के अनुसार, दूसरे जिले में पदस्थापना होने पर शिक्षक की वरिष्ठता प्रभावित होने और नई वरिष्ठता सूची में नीचे स्थान मिलने की आशंका है। शिक्षक ने तर्क दिया कि तबादले के कारण उनकी पहले से अर्जित वरिष्ठता प्रभावित होना उचित नहीं है। अदालत ने भी माना कि अंतरजिला स्थानांतरण के मामले में वरिष्ठता से जुड़ी इस आपत्ति पर विचार किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने पाया कि शिक्षक के अभ्यावेदन को निरस्त करते समय संबंधित अधिकारी ने वरिष्ठता प्रभावित होने के मुद्दे पर समुचित विचार नहीं किया था। इसके बाद अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर मामले पर नए सिरे से निर्णय लेकर आदेश जारी करे।
16 जून 2026 को हुआ था तबादला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जनजातीय कार्य विभाग ने 16 जून 2026 को याचिकाकर्ता शिक्षक का तबादला दूसरे जिले में किया था। शिक्षक ने अभ्यावेदन देकर इस आदेश पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि नए जिले में कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से वरिष्ठता तय किए जाने पर उनकी सेवा संबंधी स्थिति प्रभावित हो सकती है। अभ्यावेदन निरस्त होने के बाद शिक्षक ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठता से जुड़े पहलू पर विचार नहीं किए जाने का मुद्दा सामने आया। अदालत ने शासन को इस विषय पर पुनर्विचार करने और निर्धारित समयसीमा में निर्णय लेने के निर्देश दिए। जब तक सरकार इस मामले में नया निर्णय नहीं लेती, तब तक शिक्षक को वर्तमान पदस्थापना पर ही कार्य करने की अनुमति रहेगी। 

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