भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। वीबी-जीरामजी योजना में बढ़ सकता है सरकार पर बोझ भोपाल। मध्य प्रदेश में ग्रामीण रोजगार और पंचायतों के निर्माण कार्यों के सामने वित्तीय संकट जैसी स्थिति बनने लगी है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराए गए कार्यों की सामग्री का भुगतान अटकने से केंद्र सरकार से मिलने वाली करीब 1500 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। दो महीने पहले तक यह बकाया लगभग 600 करोड़ रुपये था। भुगतान में देरी का असर अब गांवों में चल रहे निर्माण कार्यों पर दिखने लगा है। कुछ ग्राम पंचायतों में सामग्री आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों ने भुगतान नहीं मिलने के कारण आपूर्ति रोक दी है। इसका असर ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश में मनरेगा की जगह एक जुलाई से विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी योजना शुरू हो चुकी है। पुरानी योजना के तहत चल रहे कार्यों को पूरा करना और नई व्यवस्था में ग्रामीण श्रमिकों को लगातार रोजगार उपलब्ध कराना सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। नई योजना में केंद्र सरकार का हिस्सा 60 प्रतिशत और राज्य सरकार का अंश 40 प्रतिशत निर्धारित है, जबकि मनरेगा में केंद्र से 90 प्रतिशत राशि मिलती थी। ऐसे में पुराने कार्यों के निपटारे में देरी होने पर राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पडऩे की आशंका है। मनरेगा के तहत लंबित भुगतान का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। दो महीने पहले तक केंद्र से करीब 600 करोड़ रुपये मिलने बाकी थे, जो अब लगभग 1500 करोड़ रुपये बताए जा रहे हैं। यानी इस अवधि में बकाया राशि में करीब 900 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मजदूरी भुगतान और निर्माण सामग्री के भुगतान की स्थिति अलग-अलग है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से मिलने वाली राशि और राज्यांश के माध्यम से श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन सामग्री की राशि अटकने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पंचायतों में निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने वाले आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान नहीं मिलने पर वे आगे सामग्री देने से बच रहे हैं।
छह लाख से अधिक काम अभी भी प्रगति पर
वीबी-जीरामजी योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, मनरेगा के अंतर्गत प्रदेश में अभी छह लाख से अधिक कार्य प्रगति पर हैं। इनमें लगभग आधे कार्य शासकीय आवास योजनाओं से संबंधित बताए गए हैं। इन कार्यों को पूरा करने के लिए सामग्री और मजदूरी, दोनों मदों में नियमित भुगतान जरूरी है। यदि सामग्री की आपूर्ति बाधित होती है, तो निर्माण की गति प्रभावित हो सकती है। इससे आवास सहित अन्य ग्रामीण विकास कार्यों के पूरा होने में देरी की आशंका भी बढ़ती है। पंचायतों के स्तर पर भुगतान और सामग्री उपलब्धता का तालमेल बनाए रखना इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि पुरानी योजना के कार्यों को पूरा करने के साथ नई योजना का क्रियान्वयन भी आगे बढ़ाना है। सरकार की कोशिश है कि मनरेगा के तहत चल रहे कार्य जैसे-जैसे पूरे हों, वैसे-वैसे वीबी-जीरामजी के अंतर्गत नए कार्यों को गति दी जाए, ताकि ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिलने में अंतराल न आए।
19/10/2026
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