जेन-जी तक पहुंच बढ़ाने की संघ की रणनीति

संघ की रणनीति
  • जबलपुर में युवाओं के साथ मोहन भागवत करेंगे संवाद

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। युवाओं के बदलते विचार, सोशल मीडिया पर उनकी बढ़ती सक्रियता और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर मुखर होती भागीदारी के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने नई पीढ़ी से संवाद बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए हैं। मालवा के बाद अब संघ का फोकस महाकौशल पर है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 24 से 26 अक्टूबर तक जबलपुर प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान 25 अक्टूबर को कॉलेजों में पढऩे वाले युवा स्वयंसेवकों के शिविर में उनके संवाद का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
संघ की इस पहल को केवल संगठनात्मक गतिविधि के तौर पर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की सोच, आकांक्षाओं और सामाजिक सरोकारों को समझने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। डिजिटल माध्यमों से जुड़ी जेन-जी पारंपरिक संवाद के तरीकों से अलग अपनी राय रखती है। ऐसे में संघ युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के साथ उन्हें राष्ट्र, समाज और संगठन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श के लिए जोडऩा चाहता है।
मालवा के बाद महाकौशल में संवाद की तैयारी
पिछले महीने डॉ. भागवत ने इंदौर और उज्जैन का तीन दिवसीय दौरा किया था। उज्जैन में आयोजित धर्मसभा में मालवा के स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया था। इस दौरान युवाओं के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला। अब इसी क्रम में महाकौशल के युवाओं के साथ चर्चा की तैयारी है। महाकौशल प्रांत के प्रचार प्रमुख विनोद कुमार के अनुसार, 25 अक्टूबर को संघ प्रमुख प्रांत के युवा स्वयंसेवकों के शिविर में शामिल होंगे। शिविर में कॉलेजों में पढऩे वाले स्वयंसेवकों से बातचीत और उनका संबोधन प्रस्तावित है। हालांकि, संवाद के विषयों की विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
राष्ट्रवाद से आगे युवाओं के सवालों पर भी नजर
संघ के इस कार्यक्रम में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, सामाजिक समन्वय और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं और समाज को लेकर उनके नजरिये को समझना भी इस संवाद का अहम पहलू हो सकता है। आज की जेन-जी रोजगार, शिक्षा, अवसरों, सामाजिक पहचान और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर डिजिटल मंचों के जरिए अपनी बात रखती है। ऐसे में युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए केवल विचार रखने के बजाय उनकी बात सुनना भी महत्वपूर्ण हो गया है। संघ का यह संवाद इस कसौटी पर भी देखा जाएगा कि नई पीढ़ी के सवालों और अपेक्षाओं को कितनी जगह मिलती है।
संगठनात्मक विस्तार के लिहाज से अहम महाकौशल
संघ की संगठनात्मक संरचना में महाकौशल प्रांत और जबलपुर की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस प्रांत में 38 जिले शामिल हैं। ऐसे में संघ प्रमुख का प्रवास स्थानीय पदाधिकारियों और युवा स्वयंसेवकों के साथ संवाद के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दौरे के दौरान स्थानीय पदाधिकारियों और प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ बैठक भी संभावित है। सोशल मीडिया के दौर में युवाओं की भागीदारी और विचारों के प्रसार का तरीका तेजी से बदला है। ऐसे समय में संघ की ओर से कॉलेज विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल यह संकेत देती है कि संगठन नई पीढ़ी से जुडऩे के लिए प्रत्यक्ष संपर्क को भी प्राथमिकता दे रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जबलपुर में होने वाला संवाद युवा स्वयंसेवकों की गतिविधियों और संघ की भावी रणनीति को किस तरह दिशा देता है।

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