
- चुनावी साल की तैयारी में प्रशासनिक जमावट, वल्लभ भवन से विभागाध्यक्षों की कुसी बदलेगी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर प्रशासनिक मशीनरी को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी है। सरकार जिलों में नेतृत्व की जिम्मेदारी से लेकर मंत्रालय और विभागाध्यक्ष स्तर तक बदलाव पर विचार कर रही है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि डेढ़ दर्जन से अधिक जिलों में कलेक्टर बदले जा सकते हैं। इसके साथ दो संभागों के आयुक्तों और कुछ बड़े विभागों के प्रमुखों की पदस्थापना में भी बदलाव संभव है। संभावित फेरबदल में अधिकारियों का कार्यकाल, जिलों में कामकाज की स्थिति और शासन स्तर पर मिल रही शिकायतें अहम आधार मानी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्वीकृति के बाद तबादला सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
दो साल का कार्यकाल ही नहीं, कामकाज भी बनेगा आधार
प्रशासनिक फेरबदल में उन जिलों पर विशेष ध्यान दिए जाने की चर्चा है, जहां कलेक्टर लंबे समय से पदस्थ हैं। इसके अलावा जिन जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक परिणामों को लेकर अपेक्षाएं पूरी नहीं होने की बात सामने आ रही है, वहां भी नेतृत्व बदला जा सकता है। सरकार की प्राथमिकता जिलों में विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक लक्ष्यों की निगरानी को मजबूत करना है। ऐसे में तबादलों को केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय अधिकारियों की जिम्मेदारियों और कामकाज की समीक्षा से जोडकऱ देखा जा रहा है।
2017 बैच के अधिकारियों को मिल सकती है जिलों की कमान
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संभावित फेरबदल में भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2017 बैच के कुछ अधिकारियों को जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वर्तमान में कलेक्टर के रूप में काम कर रहे कुछ अधिकारियों को दूसरे जिलों में भेजे जाने की संभावना भी है। इस तरह सरकार अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, किन अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलेगी और किन्हें मंत्रालय या विभागों में पदस्थ किया जाएगा, यह अंतिम सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
वल्लभ भवन और विभागाध्यक्ष स्तर पर भी बदलाव
जिलों के साथ मंत्रालय स्तर पर भी प्रशासनिक फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। दो संभागों के आयुक्तों के स्थानांतरण की चर्चा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) जैसे बड़े विभागों के प्रमुखों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव माना जा रहा है। पशुपालन सहित कुछ विभागों में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था समाप्त कर स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति किए जाने की भी संभावना है। इसका उद्देश्य विभागीय कामकाज में जवाबदेही तय करना और योजनाओं के क्रियान्वयन में निरंतरता बनाए रखना बताया जा रहा है।
चुनाव से पहले जिलों में बदलेगी प्रशासनिक रणनीति
प्रदेश में अगले वर्ष स्थानीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं, जबकि 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, नागरिक सुविधाएं, कानून-व्यवस्था और विकास कार्य प्रशासनिक प्रदर्शन के प्रमुख पहलू रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार रोडमैप के अनुरूप योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। संभावित फेरबदल इसी व्यापक प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। नई पदस्थापनाओं के जरिए सरकार जिलों में कामकाज की गति बढ़ाने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की कोशिश कर सकती है।
इन जिलों के कलेक्टरों को लेकर चर्चा
प्रशासनिक हलकों में हरदा, नर्मदापुरम, सीहोर, बालाघाट, सिंगरौली, खंडवा, पांढुर्णा, पन्ना और जबलपुर सहित कई जिलों में संभावित बदलाव की चर्चा है। हालांकि, इन जिलों के नाम सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि सभी कलेक्टरों का स्थानांतरण तय हो गया है। ग्वालियर, राजगढ़ और नीमच में भी कलेक्टरों के कार्यकाल को लेकर चर्चा हो रही है। इनमें ग्वालियर की रुचिका सिंह, राजगढ़ के डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा और नीमच के हिमांशु चंद्रा शामिल हैं। अंतिम निर्णय से पहले अधिकारियों के कार्यकाल, वर्तमान जिम्मेदारियों और प्रशासनिक जरूरतों का आकलन किया जा सकता है। फिलहाल निगाहें शासन स्तर पर होने वाली समीक्षा और मुख्यमंत्री की मंजूरी पर टिकी हैं। संभावित तबादला सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने जिलों में नेतृत्व बदलेगा और मंत्रालय स्तर पर किस तरह की नई प्रशासनिक जमावट होगी।
