- नई टीम का फोकस जमीनी नेटवर्क पर, पुराने प्रभाव के साथ नए चेहरों पर नजर
- गौरव चौहान

मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के बाद अब जमीनी संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने पर जोर दिखाई दे रहा है। प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब और सह प्रभारी रेखा वर्मा के पहले भोपाल दौरे में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के साथ बूथ कार्यकर्ताओं के घर पहुंचकर संवाद को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। इससे संगठन में बूथ स्तर से नए नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में बढऩे के संकेत मिले हैं। देब ने संगठनात्मक बैठकों में नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने दिखावटी स्वागत कार्यक्रमों के बजाय कार्यकर्ताओं के बीच समय बिताने और संगठन के काम पर फोकस करने का संदेश दिया। उनकी ओर से बूथ, मंडल और जिला स्तर तक संगठन की वास्तविक स्थिति समझने पर जोर दिया गया है। भाजपा की रणनीति में स्थानीय स्तर पर लंबे समय से प्रभाव रखने वाले नेताओं की भूमिका खत्म करने के बजाय उनके अनुभव के साथ नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने पर जोर दिखाई दे रहा है। संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं को चिह्नित कर सकता है, जिनकी अपने बूथ, मंडल और विधानसभा क्षेत्र में नियमित सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ है। इसका मकसद संगठन को किसी एक स्थानीय चेहरे या प्रभाव केंद्र पर निर्भर रखने के बजाय बूथ स्तर पर जिम्मेदार नेतृत्व की कई परतें तैयार करना है। आने वाले समय में मंडल गतिविधियों, बूथ समितियों की सक्रियता और जिला स्तर पर जिम्मेदारियों के बंटवारे से इस दिशा की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
66 हारी सीटों पर संगठन का टेस्ट
भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी 66 सीटों के अलावा कम अंतर से जीती सीटों पर भी संगठनात्मक समीक्षा शुरू की है। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 230 में से 163 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 66 सीटें मिली थीं। इन सीटों पर बूथ की सक्रियता, स्थानीय नेतृत्व, संगठनात्मक ढांचे और क्षेत्रीय समीकरणों की समीक्षा को 2028 की तैयारी से जोडकऱ देखा जा रहा है। यहां पार्टी यह भी देख रही है कि किन क्षेत्रों में संगठन का नेटवर्क चुनाव के समय अपेक्षित तरीके से सक्रिय नहीं हो पाया और किन स्थानीय कार्यकर्ताओं को आगे की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
दतिया के नतीजे ने बढ़ाई संगठन की चिंता
दतिया उपचुनाव का परिणाम भी पार्टी के लिए स्थानीय संगठन और नेतृत्व के समीकरणों की समीक्षा का एक आधार बना है। जुलाई 2026 के उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को हराया था। उपलब्ध परिणामों के अनुसार कांग्रेस को 66,757 और भाजपा को 60,741 वोट मिले। इसके बाद दतिया सहित ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय संगठन की भूमिका, नेताओं के बीच समन्वय और बूथ स्तर की सक्रियता पर चर्चा तेज हुई है। 2028 से पहले पार्टी के सामने चुनौती ऐसे संगठनात्मक ढांचे की है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए स्थानीय स्तर पर नए चेहरों को भी पर्याप्त जिम्मेदारी मिल सके।
तीन अहम पदों पर नई टीम
प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी के साथ संगठन महामंत्री के स्तर पर भी बदलाव हुआ है। अब नई टीम के सामने जिलों से लेकर बूथ तक संगठन की सक्रियता बढ़ाने की चुनौती है। देब के पहले दौरे में कोर ग्रुप, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठकों के अलावा बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद को शामिल किया गया था। आने वाले महीनों में नगरीय निकाय की तैयारियां और संगठनात्मक गतिविधियां नई टीम की कार्यशैली को जमीन पर परखने का मौका देंगी। फिलहाल संकेत यही हैं कि भाजपा का संगठनात्मक फोकस बड़े नेताओं के कार्यक्रमों से आगे बढकऱ बूथ, कार्यकर्ता और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता पर रहेगा।
