भ्रष्टाचार की 7 हजार शिकायतें, जांच अधिकारियों का टोटा

लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू
  • लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू में अमले का संकट
  • लोकायुक्त ने आधा दर्जन पत्र लिखकर मांगे दो दर्जन से ज्यादा डीएसपी-इंस्पेक्टर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली दो प्रमुख जांच एजेंसियां ही अमले की कमी से जूझ रही हैं। लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को हर साल करीब 7 हजार शिकायतें मिलती हैं, लेकिन पर्याप्त जांच अधिकारी नहीं होने से विवेचना और चालान की प्रक्रिया पर दबाव बढ़ रहा है।
लोकायुक्त पुलिस को सालाना करीब 5 हजार शिकायतें, जबकि ईओडब्ल्यू को करीब 2 हजार शिकायतें प्राप्त होती हैं। इनमें रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामले शामिल हैं। शिकायत आने के बाद सत्यापन, ट्रैप, विवेचना, दस्तावेजों की जांच और फिर न्यायालय में चालान पेश करने तक लंबी प्रक्रिया होती है। ऐसे में जांच अधिकारियों की कमी का सीधा असर मामलों के निपटारे पर पड़ रहा है।
लोकायुक्त में डीएसपी-इंस्पेक्टरों की कमी
लोकायुक्त के महानिदेशक योगेश देशमुख के मुताबिक विभाग में खासतौर पर डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के विवेचना अधिकारियों की कमी है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय को करीब आधा दर्जन पत्र भेजे जा चुके हैं। आखिरी पत्र भी करीब एक माह पहले भेजा गया था। विभाग ने दो दर्जन से अधिक डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की जरूरत बताई है। इसी कमी के बीच लोकायुक्त में दर्ज पुराने मामलों की जांच भी प्रभावित हो रही है। अक्टूबर 2025 में पूर्व चीफ इंजीनियर गोविंद प्रसाद मेहरा के ठिकानों पर हुई कार्रवाई में करोड़ों की कथित बेनामी संपत्ति सामने आई थी। करीब एक साल बाद भी मामले में आगे की कार्रवाई की रफ्तार अमले की कमी के कारण प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
ईओडब्ल्यू में स्वीकृत बल का भी करीब एक चौथाई खाली
ईओडब्ल्यू में भी स्थिति बेहतर नहीं है। विभाग में स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब एक चौथाई पद खाली बताए जा रहे हैं। ईओडब्ल्यू के महानिदेशक उपेंद्र जैन के अनुसार फोर्स की कमी है और स्वीकृत बल के हिसाब से भी पूरा अमला उपलब्ध नहीं है। ईओडब्ल्यू को हर साल करीब 2 हजार शिकायतें मिलती हैं। इनमें आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले शामिल हैं। कई मामलों में कार्रवाई से पहले गोपनीय सत्यापन और दस्तावेजों की विस्तृत जांच करनी पड़ती है।
लोकायुक्त को मिले पांच इंस्पेक्टर
पुलिस मुख्यालय की प्रशासनिक शाखा के स्पेशल डीजी आदर्श कटियार के अनुसार लोकायुक्त पुलिस के लिए पांच इंस्पेक्टरों के पदस्थापना आदेश किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अमले की पूर्ति की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और उपलब्ध बल तथा संबंधित विभागों की मांग का परीक्षण कर जरूरत के अनुसार पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की पदस्थापना की जाती है। फिलहाल चुनौती यह है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों का सालाना आंकड़ा हजारों में है, जबकि उनकी जांच करने वाले अधिकारियों की उपलब्धता जरूरत के मुकाबले कम है। पांच नए इंस्पेक्टरों की पदस्थापना से जांच की रफ्तार कितनी बढ़ती है, इसका असर आने वाले समय में सामने आएगा।

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