
- एमपीआरडीसी ने विकास का खाका तैयार कराने शुरू की कवायद
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में हाईवे और एक्सप्रेस-वे को सिर्फ आवागमन का जरिया मानकर निर्माण करने के बजाय अब उनके आसपास के इलाकों के भविष्य को भी प्लान करने की तैयारी है। सडक़ बनने के बाद बेतरतीब तरीके से बसने वाले आवासीय और व्यावसायिक इलाकों को रोकने के लिए मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने हाईवे कॉरिडोर के आसपास विकास की संभावनाएं तलाशने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए एमपीआरडीसी ने सूरत की डिजाइन प्वाइंट कंसल्ट प्राइवेट लिमिटेड को सलाहकार नियुक्त किया है। कंपनी मौजूदा और प्रस्तावित हाईवे के आसपास चयनित क्षेत्रों का सर्वे और अध्ययन कर यह बताएगी कि आने वाले वर्षों में इन इलाकों में किस तरह का विकास संभव है। इसके आधार पर नगर नियोजन की योजनाएं तैयार की जाएंगी।
एमपीआरडीसी और सलाहकार कंपनी के बीच 5 अगस्त 2026 को समझौता हुआ है। कंपनी को पूरा अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 24 महीने का समय दिया गया है। इस काम के लिए निगम ने 3.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत तय की थी, लेकिन सलाहकार कंपनी ने 2.96 करोड़ रुपए में काम करने की पेशकश की। यानी फिलहाल सरकार की ओर से हाईवे किनारे नए शहर बसाने का सीधा फैसला नहीं हुआ है। अभी यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई है कि किन क्षेत्रों में भविष्य में शहर, आवासीय क्षेत्र, व्यापारिक गतिविधियां या दूसरी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
सडक़ बनेगी तो जमीन पर दबाव भी बढ़ेगा
प्रदेश में नए एक्सप्रेस-वे और हाईवे बनने के साथ इनके आसपास जमीन की उपयोगिता और विकास गतिविधियां बढऩे की संभावना है। सडक़ की बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार, वेयरहाउस, आवासीय परियोजनाएं और दूसरी गतिविधियां हाईवे के आसपास आने लगती हैं। यही वजह है कि एमपीआरडीसी पहले से यह समझना चाहता है कि हाईवे किनारे विकास किस दिशा में हो सकता है। अध्ययन में मौजूदा स्थिति के साथ भविष्य में संभावित विकास को भी देखा जाएगा। इससे सडक़ निर्माण के बाद होने वाले अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने के लिए प्लानिंग का आधार तैयार हो सकेगा।
पहले सर्वे, फिर जमीन के इस्तेमाल का खाका
सलाहकार कंपनी चयनित क्षेत्रों का मौजूदा भू-उपयोग, सडक़ संपर्क, आवागमन और विकास की संभावनाओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों के लिए नगर नियोजन से जुड़ी योजना तैयार की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी सामने आएगा कि किसी क्षेत्र में किस तरह की गतिविधियां व्यवहारिक होंगी और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से किन सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल यह तय नहीं है कि किसी क्षेत्र में आवासीय, व्यावसायिक या अन्य किस प्रकार का निर्माण किया जाएगा।
24 महीने बाद साफ होगी तस्वीर
पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सलाहकार कंपनी को दो साल दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित क्षेत्रों में विकास की अगली दिशा तय होगी। इस तरह एमपीआरडीसी की मौजूदा कवायद को ‘हाईवे के साथ विकास की प्लानिंग’ के तौर पर देखा जा सकता है, न कि तत्काल नए शहर बसाने की योजना के रूप में। इस पहल में सडक़ के दोनों ओर होने वाले संभावित विकास को पहले से समझने पर जोर है, ताकि भविष्य में हाईवे बनने के बाद जमीन का अनियोजित इस्तेमाल और सुविधाओं की कमी जैसी स्थितियां पैदा न हों।
