युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की संघ की रणनीति

  • आज 25 हजार स्वयंसेवकों से संवाद करेंगे होसबाले
  • गौरव चौहान
संघ की रणनीति

शताब्दी वर्ष में शाखा विस्तार के बाद भोपाल में बड़ा शाखा संगम; श्रम साधक सम्मेलन में सामाजिक समरसता और अवसर पर दिया जोर
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में संगठन का फोकस युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने पर नजर आ रहा है। राजधानी भोपाल में मोहल्लों और बस्तियों तक शाखाओं के विस्तार के बाद रविवार को लाल परेड मैदान में बड़ा शाखा संगम आयोजित किया जा रहा है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले दो दिन के भोपाल प्रवास के दौरान रविवार को 25 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और समाजजनों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम दोपहर 3 बजे से प्रस्तावित है।
शाखा संगम को शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की कड़ी में संघ की स्थानीय गतिविधियों के बड़े सामूहिक स्वरूप के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें शहर की विभिन्न शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवक एक साथ जुटेंगे। होसबाले स्वयंसेवकों से समाज की मौजूदा चुनौतियों, भविष्य की दिशा और इतिहास से मिलने वाली सीख पर संवाद करेंगे।
श्रम साधकों के बीच सामाजिक समरसता का संदेश
इससे पहले शनिवार को संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर रवींद्र भवन में श्रम साधक संगम आयोजित किया गया। इसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों में श्रम के जरिए आजीविका अर्जित करने वाले एक हजार से अधिक श्रम साधक और समाजजन शामिल हुए। होसबाले ने श्रम की प्रतिष्ठा, सामाजिक समरसता और समाज के प्रति दायित्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति तब सामने आती है, जब प्रत्येक वर्ग को सम्मान, सहभागिता और आगे बढऩे का अवसर मिले। उन्होंने भारतीय परंपरा में कर्म को पूजा माने जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर से किया जाने वाला श्रम भी आराधना का रूप है। व्यक्ति अपने कर्म को निष्ठा, शुद्ध मन और कर्तव्यबोध के साथ करे तो वही कर्म पूजा बन जाता है। महाभारत में वर्णित धर्मव्याध की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म किसी एक काम या सामाजिक पहचान तक सीमित नहीं है।
पेशा नहीं, कर्म और निष्ठा से तय होती है महानता
सरकार्यवाह ने कहा कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। कर्म की महानता उसके बाहरी स्वरूप से नहीं, बल्कि उसे करने वाले व्यक्ति की दृष्टि और निष्ठा से तय होती है। महर्षि वेदव्यास का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महानता जन्म या पेशे से निर्धारित नहीं होती, बल्कि कर्म और ज्ञान से व्यक्ति महान बन सकता है। उन्होंने सामाजिक ऊंच-नीच की प्रवृत्तियों को दूर करने के लिए विभिन्न वर्गों के बीच आत्मीयता बढ़ाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार सामाजिक समरसता केवल भाषणों से नहीं बनती, बल्कि एक-दूसरे के जीवन, श्रम और परिस्थितियों को समझने से विकसित होती है।
युवाओं और बच्चों के अवसर पर जोर
होसबाले ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्र का अंग है। राष्ट्र केवल भू-भाग नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, श्रम, संस्कार, संबंध और दायित्व से बनता है। उन्होंने शारीरिक श्रम और बौद्धिक कार्य को राष्ट्र निर्माण में समान रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के भविष्य की सीमा उसके परिवार के पेशे या आर्थिक स्थिति से तय नहीं होनी चाहिए। श्रमिक परिवार का बच्चा वैज्ञानिक या किसी अन्य क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है। समाज को ऐसे अवसर तैयार करने चाहिए, जिनसे हर बच्चे को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढऩे का मौका मिले। कार्यक्रम में मध्यभारत प्रांत के संघचालक अशोक पांडेय, भोपाल विभाग संघचालक सोमकांत उमालकर सहित संघ के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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