
- मप में 76 हजार कंपनियां, क्लोजर चुना सिर्फ 278 ने
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में कारोबार बंद कर चुकी कंपनियों को कानूनी रूप से रिकॉर्ड से बाहर निकलने का मौका देने वाली कंपनी अनुपालन सुविधा योजना-2026 के तहत क्लोजर की रफ्तार धीमी है। प्रदेश में 76,749 पंजीकृत कंपनियों में से अब तक सिर्फ 278 कंपनियों ने क्लोजर का विकल्प चुना है। केंद्र सरकार की योजना के तहत आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर निर्धारित है। इसके बाद लंबित अनुपालन और दंड का बोझ कंपनियों पर बढ़ सकता है।
15 अप्रैल से शुरू हुई योजना में सरकार ने निष्क्रिय या बंद कंपनियों के लिए दो प्रमुख राहत दी हैं। पहली, वर्षों से लंबित दस्तावेजों को कम अतिरिक्त शुल्क के साथ नियमित कराने का अवसर और दूसरी, पूरी तरह बंद हो चुकी कंपनियों को कॉरपोरेट मंत्रालय के रिकॉर्ड से विधिवत बाहर निकलने का रास्ता। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच देशभर में 12,558 कंपनियों का विधिवत क्लोजर हो चुका है। इनमें मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी महज 2.21 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र 2,482 क्लोजर के साथ सबसे आगे है। दिल्ली में 2,207, कर्नाटक में 834, उत्तर प्रदेश में 718 और राजस्थान में 394 कंपनियों ने क्लोजर का विकल्प चुना है। मध्यप्रदेश 278 क्लोजर के साथ इन राज्यों से काफी पीछे है।
कारोबार बंद, लेकिन रिकॉर्ड में कंपनी अभी सक्रिय
कई कंपनियों का कारोबार वर्षों पहले बंद हो चुका है, लेकिन उन्होंने कंपनी रजिस्ट्रार के समक्ष जरूरी वार्षिक विवरणी और वित्तीय दस्तावेज जमा नहीं किए हैं। ऐसे में कागजों में कंपनी सक्रिय बनी रहती है और उसके ऊपर अनुपालन की जिम्मेदारियां जारी रहती हैं। योजना के तहत पात्र लंबित दस्तावेजों को सामान्य शुल्क के साथ केवल 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देकर नियमित करने का प्रावधान बताया गया है। वहीं पूरी तरह बंद कंपनियों के लिए निष्क्रिय स्थिति अपनाने पर 50 प्रतिशत रियायती शुल्क का प्रावधान है। इससे पुराने अनुपालन और अतिरिक्त शुल्क के बोझ से राहत मिल सकती है।
15 सितंबर के बाद बढ़ सकता है कानूनी जोखिम
सिर्फ कारोबार या दुकान बंद कर देने से कंपनी कानूनी रूप से बंद नहीं मानी जाती। जब तक मंत्रालय के रिकॉर्ड में कंपनी की स्थिति विधिवत नहीं बदली जाती या रजिस्ट्रार कार्यालय से उसका नाम नहीं हटता, तब तक अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियां बनी रहती हैं। लगातार तीन वर्ष तक वित्तीय विवरण और वार्षिक विवरणी दाखिल नहीं करने की स्थिति में कंपनी अधिनियम के तहत निदेशकों की अयोग्यता का जोखिम भी बन सकता है। ऐसे में निष्क्रिय कंपनियों के प्रवर्तकों और निदेशकों के लिए योजना की अंतिम तारीख महत्वपूर्ण हो गई है।
महाराष्ट्र से काफी पीछे मध्यप्रदेश
देश में क्लोजर कराने वाली कंपनियों के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। वहां 2,482 कंपनियों ने योजना के तहत समापन कराया है, जबकि मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा केवल 278 है। प्रदेश में पंजीकृत कंपनियों की संख्या को देखते हुए क्लोजर की कम संख्या इस ओर संकेत करती है कि अभी बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियां हो सकती हैं, जिनका कारोबार बंद है लेकिन रिकॉर्ड में वे सक्रिय बनी हुई हैं। सीए सुरभि जैन के अनुसार, निष्क्रिय कंपनी को भविष्य में काम आने की उम्मीद में रिकॉर्ड में सक्रिय रखना कई बार महंगा साबित होता है। लंबित आरओसी औपचारिकताओं पर दंड बढ़ता जाता है और कानूनी जोखिम भी बना रहता है। उनके मुताबिक कंपनी अनुपालन सुविधा योजना-2026 प्रवर्तकों को अनुपालन का बोझ कम करते हुए व्यवस्थित तरीके से बाहर निकलने का अवसर देता है। इसलिए अंतिम दिनों में तकनीकी समस्या से बचने के लिए कंपनी की स्थिति पहले ही जांचकर नियमित करने, निष्क्रिय करने या स्वैच्छिक समापन का विकल्प तय करना बेहतर होगा।
