
195 से 161 किमी होगी दूरी, 4 घंटे का सफर 2 घंटे मेंं
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर के बीच सफर अब सिर्फ तेज ही नहीं होगा, बल्कि दोनों शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के एलाइनमेंट को सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। करीब 4 हजार करोड़ रुपए की लागत वाले इस एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर से दोनों शहरों के बीच की दूरी करीब 35 किलोमीटर घटकर 161 किलोमीटर रह जाएगी। सरकार ने एक्सप्रेस-वे का निर्माण जून 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों के मुताबिक एलाइनमेंट स्वीकृत होने के बाद अब भूमि और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। करीब 10 महीने के भीतर निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
फिलहाल भोपाल और इंदौर के बीच सडक़ मार्ग से करीब 195 किलोमीटर की दूरी है। देवास और सीहोर होकर जाने वाले मौजूदा मार्ग पर ट्रैफिक दबाव और जगह-जगह रुकावटों के कारण सफर में 3.5 से 4 घंटे तक लग जाते हैं। नए एक्सप्रेस-वे पर वाहनों को चुनिंदा एंट्री और एग्जिट प्वाइंट से ही प्रवेश मिलेगा। इससे अनावश्यक ट्रैफिक और बार-बार रुकने की समस्या कम होगी। एक्सप्रेस-वे के पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड होने से लंबी दूरी के वाहन लगातार गति से चल सकेंगे। ऐसे में भोपाल से इंदौर का सफर करीब दो घंटे में पूरा होने की उम्मीद है।
बनेगा बिल्कुल नया कॉरिडोर
इस परियोजना की खास बात यह है कि मौजूदा भोपाल-इंदौर रोड को छह लेन में चौड़ा नहीं किया जाएगा। इसके बजाय नए एलाइनमेंट पर पूरी तरह नई सड़क बनाई जाएगी। इसी वजह से इसे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे कहा जा रहा है। नया कॉरिडोर बनने से सड़क के आसपास आने वाले समय में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। लॉजिस्टिक हब, वेयरहाउस और अन्य कारोबारी गतिविधियों के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी विकसित हो सकती है। यानी एक्सप्रेस-वे केवल भोपाल-इंदौर का सफर छोटा नहीं करेगा, बल्कि इसके आसपास के इलाकों के विकास का नया आधार भी बन सकता है।
वेस्टर्न कॉरिडोर से राजधानी की कनेक्टिविटी
भोपाल को एक्सप्रेस-वे से जोडऩे के लिए कोलार या वेस्टर्न कॉरिडोर के जरिए कनेक्टिविटी विकसित किए जाने की संभावना है। अंतिम कनेक्टिविटी अगले चरण में तय होगी। इसका उद्देश्य राजधानी के प्रमुख हिस्सों से नए हाईस्पीड कॉरिडोर तक पहुंच आसान बनाना है। एक्सप्रेस-वे को भोपाल के आसपास विकसित हो रहे क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क से भी जोड़े जाने की योजना है। इससे राजधानी के आसपास के कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों को भी बेहतर सड़क संपर्क मिल सकता है।
पांच साल की कोशिश के बाद मिली मंजूरी
भोपाल-इंदौर के बीच नए हाईस्पीड कॉरिडोर के लिए मध्यप्रदेश सरकार करीब पांच वर्षों से केंद्र के स्तर पर प्रयास कर रही थी। अब एलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के निर्माण की दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ा है। यदि तय समयसीमा के अनुसार काम पूरा होता है तो जून 2029 के बाद भोपाल-इंदौर के बीच सड़क यात्रा का मौजूदा स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
