
- अब नई कमेटी बनाकर 4.50 लाख कर्मचारियों के पेंशन विवाद को निपटाएगी सरकार
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में करीब 4.50 लाख एनपीएस कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को लेकर सरकार का फैसला डेढ़ साल से फाइलों में अटका हुआ है। कर्मचारियों के भविष्य की पेंशन व्यवस्था तय करने के लिए अप्रैल 2025 में बनाई गई वरिष्ठ आईएएस अफसरों की कमेटी डेढ़ साल में सिर्फ एक बैठक कर सकी। बैठक में यूपीएस को लेकर सामान्य चर्चा हुई, लेकिन इसे लागू करने या नहीं करने पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। अब कमेटी के अध्यक्ष अशोक बर्णवाल के मुख्य सचिव बनने और अन्य सदस्यों के पद बदलने के बाद सरकार इसे नए सिरे से गठित करने की तैयारी कर रही है। यानी यूपीएस पर निर्णय की प्रक्रिया एक बार फिर कमेटी से शुरू होगी।
राज्य सरकार ने केंद्र की तर्ज पर मध्यप्रदेश में यूपीएस लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए 29 अप्रैल 2025 को कमेटी गठित की थी। तत्कालीन अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल को इसका अध्यक्ष बनाया गया था। कमेटी को एनपीएस के स्थान पर यूपीएस लागू करने की संभावनाओं, इसके वित्तीय प्रभाव और कर्मचारियों को मिलने वाले विकल्पों का अध्ययन करना था। लेकिन गठन के बाद इसकी अब तक सिर्फ एक बैठक हुई। इस बैठक के बाद न तो कर्मचारियों के लिए कोई विकल्प सामने आया और न ही सरकार की ओर से यूपीएस लागू करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय हुआ।
अध्यक्ष अब मुख्य सचिव, सदस्य भी बदल गए
कमेटी के गठन के समय अशोक बर्णवाल अपर मुख्य सचिव थे। अब वे प्रदेश के मुख्य सचिव बन चुके हैं। कमेटी की सदस्य तत्कालीन संचालक बजट तन्वी सुन्द्रियाल प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जा चुकी हैं, जबकि तत्कालीन उप सचिव जीएडी अजय कटेसरिया अब रतलाम कलेक्टर हैं। ऐसे में पुरानी कमेटी के जरिए आगे बढऩा व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब नए सदस्यों के साथ कमेटी गठित कर यूपीएस के मुद्दे पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र में भी यूपीएस को नहीं मिला अपेक्षित रिस्पॉन्स
मध्यप्रदेश सरकार के स्तर पर यूपीएस को लेकर सुस्ती की एक बड़ी वजह केंद्र में कर्मचारियों की सीमित रुचि को भी माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से अपने कर्मचारियों के लिए यूपीएस लागू की थी। सरकार ने एनपीएस की तुलना में यूपीएस को ज्यादा सुरक्षित विकल्प के तौर पर पेश किया था, लेकिन बड़ी संख्या में केंद्रीय कर्मचारियों ने इसे नहीं अपनाया। लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार 19 जुलाई 2026 तक 1.18 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने यूपीएस का विकल्प चुना था, जबकि केंद्रीय कर्मचारियों की संख्या करीब 23.94 लाख बताई गई है।
प्रदेश में कर्मचारी मांग रहे ओपीएस
मध्यप्रदेश में एनपीएस के दायरे में आने वाले कर्मचारी लंबे समय से ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) बहाल करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि यूपीएस उनकी मांग का समाधान नहीं है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है कि सरकार को ओपीएस लागू करना चाहिए। प्रदेश के कर्मचारी यूपीएस के पक्ष में नहीं हैं। यानी सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ एनपीएस से जुड़े कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था को लेकर फैसला करना और दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों की ओपीएस की मांग पर रुख स्पष्ट करना।
