- विभागों ने पदोन्नति की खानापूर्ति: पदोन्नति मिली, अधिकार नहीं
- गौरव चौहान

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे इंतजार के बाद हुई पदोन्नति अब कागजों की खानापूर्ति बनती नजर आ रही है। पुलिस से लेकर लोक निर्माण विभाग, वित्त और स्कूल शिक्षा विभाग तक बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति तो दे दी गई, लेकिन उन्हें नए पद के अनुरूप नई पदस्थापना और जिम्मेदारी नहीं मिली। नतीजा यह है कि पदनाम बदल गया, लेकिन काम वही पुराना चल रहा है।
पड़ताल में सामने आया है कि कई विभागों में पदोन्नति पाने वाले करीब 80 फीसदी अधिकारी-कर्मचारी अभी भी पुराने पद का काम कर रहे हैं। यानी सरकार ने वर्षों से लंबित पदोन्नति का रास्ता तो खोला, लेकिन नई जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया पूरी नहीं की। इससे विभागों के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में विरोध के स्वर तेज होने की संभावना है। सरकारी विभागों में वर्षों से लंबित पदोन्नति को लेकर कर्मचारियों में पहले ही असंतोष रहा है। अब जब पदोन्नति के आदेश जारी हुए हैं तो नई पदस्थापना नहीं मिलने से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारियों का सवाल सीधा है-अगर प्रमोशन के बाद भी पुराना पद, पुराना काम और पुरानी जिम्मेदारी ही निभानी है, तो नई पदोन्नति का वास्तविक अर्थ क्या है? विभागों की यह कार्यप्रणाली आने वाले दिनों में सरकार के लिए नई प्रशासनिक चुनौती बन सकती है।
पुलिस में स्टार बढ़े, जिम्मेदारी नहीं
पुलिस विभाग में सिपाही से हवलदार, हवलदार से एएसआई, एएसआई से एसआई, एसआई से इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर से डीएसपी तक पदोन्नतियां हुई हैं। लेकिन कई अधिकारियों को नए पद का चार्ज नहीं मिला। बैतूल में डीएसपी के पद पर पदोन्नत एक अधिकारी के मुताबिक, पदोन्नति के बाद स्टार भी लगा दिए गए, लेकिन बड़े पद की जिम्मेदारी नहीं दी गई। अधिकारी अभी भी पुराने कामकाज में लगे हुए हैं। हालांकि कुछ जिलों में टीआई जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पदोन्नत अधिकारियों ने नई पदस्थापना पर आमद भी दे दी है।
स्कूल शिक्षा में कागज पर 2000 प्राचार्य
स्कूल शिक्षा विभाग में भी बड़े पैमाने पर पदोन्नति हुई। करीब 2000 व्याख्याताओं को हाई स्कूल प्राचार्य और हाई स्कूल प्राचार्यों को हायर सेकेंडरी स्कूल प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया। कई पदोन्नत अधिकारियों का कहना है कि प्रमोशन आदेश जारी होने के बावजूद इसका व्यावहारिक लाभ नहीं मिला। पदनाम बदल गया, लेकिन कार्य व्यवहार पुराना ही है। नई जगह पदस्थापना नहीं होने के कारण वे पहले की तरह ही जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
वन विभाग ने दिखाई अलग तस्वीर
इन विभागों के उलट वन विभाग में पदोन्नति के साथ नई जिम्मेदारी देने का काम अपेक्षाकृत तेजी से हुआ है। करीब 90 फीसदी पदोन्नति मामलों में कर्मचारियों को नए पद का काम भी सौंप दिया गया। वनरक्षक से वनपाल बनाए गए कर्मचारियों को वनपाल की जिम्मेदारी दी गई। वनपाल से उप वन क्षेत्रपाल, सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2, स्टेनो से लेखाधिकारी और भृत्य से दफ्तरी बनाए गए कर्मचारियों को भी नए पद के अनुरूप काम सौंपा गया। हालांकि डिप्टी रेंजर से रेंजर पद पर होने वाली पदोन्नति की प्रक्रिया अभी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
वित्त विभाग में 238 अधिकारी नई पोस्टिंग की कतार में
वित्त विभाग भी इससे अछूता नहीं है। विभाग के 238 अधीनस्थ लेखाधिकारियों को सहायक संचालक/लेखाधिकारी के पद पर पदोन्नति दी गई, लेकिन नई पदस्थापना का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। इसी तरह 20 से ज्यादा उप संचालकों को संयुक्त संचालक बनाया गया है, लेकिन पदोन्नति के काफी समय बाद भी नई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही। विभाग में इसे लेकर यह चर्चा भी है कि महत्वपूर्ण पदों और जिम्मेदारियों के वितरण में प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता मिलती है।
पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर प्रमोट काम वही पुराना
लोक निर्माण विभाग में भी पदोन्नति के बाद नई जिम्मेदारी न मिलने का मामला सामने आया है। विभाग ने 95 सहायक यंत्रियों को कार्यपालन यंत्री बनाया। वहीं 100 से ज्यादा सब इंजीनियरों को अनुविभागीय अधिकारी/सहायक यंत्री के पद पर पदोन्नति दी गई। इसके बावजूद कई अधिकारी नए पद के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर कई पदों पर सीआर से जुड़े विवादों के कारण पदोन्नति प्रक्रिया अब भी अटकी हुई है। ऐसे में जिन्हें प्रमोशन मिल चुका है, उनके सामने भी सवाल है कि जब नई जिम्मेदारी ही नहीं मिलेगी तो पदोन्नति का वास्तविक लाभ क्या है?
