2027 से पहले मप्र की सियासत में युवाओं की एंट्री तेज

  • मध्यप्रदेश की राजनीति में भाजपा-कांग्रेस दोनों ने बदली रणनीति

गौरव चौहान
मध्यप्रदेश की राजनीति में अब चुनावी रणनीति का केंद्र केवल महिला और पुरुष मतदाता नहीं, बल्कि 18 से 29 वर्ष के युवा मतदाता बनने जा रहे हैं। दिल्ली में जेन-जी के आंदोलन से बने राजनीतिक प्रभाव ने प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों को युवा वर्ग को लेकर अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करने के लिए प्रेरित किया है। विधानसभा चुनाव में अभी ढाई साल से अधिक का समय है, लेकिन उससे पहले होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए दोनों दलों ने युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है।
युवाओं को साधने के मामले में भाजपा फिलहाल आगे दिखाई दे रही है। प्रदेश सरकार पहले ही 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा कर चुकी है। इस दौरान युवाओं से जुड़ी योजनाओं, रोजगार, शिक्षा, परीक्षा और कौशल विकास से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस किए जाने की तैयारी है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक सरकार की योजनाओं के साथ संगठन भी युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करेगा। इसका उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि युवा मतदाताओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं का फीडबैक लेना भी होगा।
संभाग स्तर पर बनेगी युवाओं से संवाद की रणनीति
भाजपा जेन-जी और युवा मतदाताओं के बीच सक्रिय संवाद के लिए विशेष टीम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। यह टीम संभाग, जिला और स्थानीय स्तर पर छात्र-छात्राओं तथा युवाओं से संवाद करेगी। महीने में कई बार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं से रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राय ली जाएगी। इस फीडबैक को संगठन और सरकार तक पहुंचाने की रणनीति है, ताकि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर फैसलों को भी राजनीतिक रूप से प्रभावी बनाया जा सके।
कांग्रेस युवाओं को बनाएगी आंदोलन का चेहरा
दूसरी ओर कांग्रेस भी संगठन में युवाओं की भूमिका बढ़ाने की तैयारी में है। पार्टी में ऐसे जिलों में युवा नेतृत्व को आगे लाने पर विचार किया जा रहा है, जहां लंबे समय से वरिष्ठ उम्र के नेता संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन, धरना और प्रदर्शन में युवा चेहरों को प्रमुखता देने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का प्रयास है कि रोजगार, परीक्षा, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन का चेहरा युवा नेता बनें और संगठन उनके पीछे मजबूती से खड़ा दिखाई दे।
राहुल गांधी करेंगे युवा संवाद
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मध्यप्रदेश में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने की भी तैयारी है। इसकी शुरुआत उज्जैन से होने की संभावना जताई जा रही है। निकाय चुनाव से पहले प्रदेश के प्रमुख नगर निगम मुख्यालयों में ऐसे संवाद कराने की रणनीति पर कांग्रेस काम कर रही है। पार्टी प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में युवा नेताओं को चिन्हित कर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने पर भी जोर देगी। संगठन और सर्वे में बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवा चेहरों को आगामी चुनाव में संभावित उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
इंदौर संभाग में सबसे बड़ा युवा वोट बैंक
प्रदेश में आगामी चुनावों के लिए युवा मतदाताओं की संख्या राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इंदौर संभाग में युवा मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। इंदौर विधानसभा क्षेत्र-5 को भी युवा मतदाताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि आने वाले समय में राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में युवाओं से जुड़े मुद्दे ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। रोजगार और परीक्षा से लेकर शिक्षा, स्टार्टअप, कौशल विकास और भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में आने की संभावना है। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की चुनावी राजनीति में अभी से एक नई तस्वीर बनती दिखाई दे रही है-जहां युवा केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए संगठन, आंदोलन और संभावित नेतृत्व का नया चेहरा भी बनेंगे।

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