खाद की किल्लत से ज्यादा उठाव का सवाल

  • 15 जिलों में जांच से खुलेगा स्टॉक का राज

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में रबी सीजन शुरू होने से पहले खाद के अग्रिम उठाव ने सरकार और कृषि विभाग की चिंता बढ़ा दी है। महज 13 दिनों में कुछ जिलों में पिछले साल की तुलना में 8 से 9 गुना तक अधिक खाद उठाए जाने का मामला सामने आने के बाद अब पूरे वितरण तंत्र की जांच की तैयारी है। शासन ने ऐसे 15 जिलों को चिन्हित किया है, जहां खाद उठाव का पैटर्न सामान्य से काफी अलग मिला है। यह मामला उस समय सामने आया, जब 29 जुलाई के बाद ई-टोकन व्यवस्था बंद कर खाद का वितरण सीधे शुरू किया गया। इसके बाद 14 से 17 अगस्त के बीच खाद के स्टॉक और उठाव का मिलान किया गया। आंकड़ों की तुलना में सामने आया कि कुछ जिलों में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इस बार कई गुना अधिक खाद उठाई गई।
सबसे बड़ा अंतर छतरपुर में सामने आया। पिछले साल जहां करीब 255 मीट्रिक टन खाद का उठाव हुआ था, वहीं इस बार महज 12 दिनों में करीब 2500 मीट्रिक टन खाद उठाई गई। इसी तरह अशोकनगर, गुना, जबलपुर, रायसेन, सिवनी, देवास, सतना, धार और शिवपुरी में भी खाद उठाव कई गुना अधिक मिला है। आगर-मालवा, सीहोर, इंदौर, मंदसौर और बैतूल जैसे जिलों में भी पिछले साल की तुलना में करीब आठ गुना तक अधिक उठाव दर्ज किया गया। इन आंकड़ों ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि अचानक इतनी बड़ी मात्रा में खाद किसने उठाई और उसका इस्तेमाल कहां हुआ।
कलेक्टरों की निगरानी में होगी जांच
खाद उठाव के इस असामान्य पैटर्न की जांच अब संबंधित जिलों के कलेक्टरों की निगरानी में कराई जाएगी। इसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं और सोमवार से जांच शुरू होने की बात कही गई है। जांच में मार्कफेड के केंद्रों, पैक्स और खाद वितरण समितियों के रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। खाद उठाने वाले किसानों की पहचान भी जांच का अहम हिस्सा होगी। विभाग यह पता लगाएगा कि रिकॉर्ड में जिन लोगों के नाम पर खाद उठाई गई, वे वास्तविक किसान हैं या उनके नाम का इस्तेमाल किसी व्यापारी या बिचौलिये ने किया। अगर रिकॉर्ड और वास्तविक उठाव में अंतर मिलता है तो खाद वितरण में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या खाद की वास्तविक खपत बढ़ी या व्यवस्था में सेंध लगी?

जांच के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि खाद का असामान्य उठाव वास्तविक किसानों की अग्रिम जरूरत के कारण हुआ या वितरण व्यवस्था का फायदा उठाकर किसी स्तर पर स्टॉक को दूसरी दिशा में भेजा गया। सरकार ने रबी सीजन को देखते हुए किसानों को पहले से खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की है। ऐसे में बड़ी मात्रा में अग्रिम उठाव पूरी तरह असामान्य नहीं माना जा सकता। लेकिन जब एक ही अवधि में कुछ जिलों में पिछले साल की तुलना में आठ से नौ गुना तक अंतर सामने आया है, तो रिकॉर्ड की जांच जरूरी हो गई है।
प्रदेश में खाद का स्टॉक पर्याप्त
खाद को लेकर कुछ जिलों में विरोध और किसानों की चिंता के बीच विभाग का दावा है कि प्रदेश में फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 4.35 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। पिछले साल इसी अवधि में करीब 1.56 लाख मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक में था। इसी तरह एनपीके और डीएपी का संयुक्त स्टॉक करीब 4.40 लाख मीट्रिक टन बताया गया है। पिछले साल भी इस अवधि में इन उर्वरकों का स्टॉक लगभग इसी स्तर पर था।
रबी में बढ़ जाती है खाद की मांग
रबी सीजन में गेहूं और चने की बुवाई के कारण खाद की मांग खरीफ की तुलना में अधिक रहती है। पिछले वर्ष खरीफ सीजन में करीब 28 लाख मीट्रिक टन खाद वितरित हुई थी, जबकि रबी सीजन में कुल खपत करीब 39 लाख मीट्रिक टन रही थी। इसमें लगभग 20 लाख टन यूरिया और 9 लाख टन डीएपी शामिल था। अक्टूबर से दिसंबर के पीक सीजन में खाद के लिए किसानों की लंबी कतार और अचानक पैदा होने वाली किल्लत से बचने के लिए सरकार ने अग्रिम उठाव की व्यवस्था शुरू की है।
20 अगस्त से ‘हर घर खाद’ अभियान
इसी उद्देश्य से 20 अगस्त से ‘हर घर खाद’ अग्रिम उठाव अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत किसान रबी सीजन के लिए पहले ही खाद का स्टॉक ले सकते हैं और इसके लिए शून्य प्रतिशत ब्याज की सुविधा भी दी जा रही है। अब 15 जिलों में सामने आए असामान्य उठाव की जांच इस अभियान की पारदर्शिता के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। जांच से यह स्पष्ट होगा कि बढ़ा हुआ उठाव वास्तव में किसानों की जरूरत पूरी करने के लिए हुआ या खाद वितरण की प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई। फिलहाल सरकार के सामने चुनौती सिर्फ खाद उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि जो खाद किसानों के नाम पर उठाई जा रही है, वह वास्तव में उन्हीं तक पहुंचे। 15 जिलों की जांच के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि यह किसानों की बढ़ी मांग का असर है या खाद वितरण व्यवस्था में किसी बड़े खेल का संकेत।

Related Articles