मप्र में गन्ना और शक्कर उत्पादन दोनों बढ़े

गन्ना और शक्कर उत्पादन
  • चीनी के दाम बढ़े तो इथेनॉल पर सवाल, लेकिन…

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। देशभर में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच मध्य प्रदेश के आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। चीनी उत्पादन घटने या इथेनॉल के लिए बड़े पैमाने पर गन्ना खपने की चर्चाओं के बावजूद प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले 2025-26 में चीनी का उत्पादन बढ़ा है। गन्ने का रकबा भी बढ़ा है। ऐसे में मध्य प्रदेश के मामले में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को केवल गन्ने के इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल से जोडऩा पूरी तरह सही नहीं बैठता।
    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 2024-25 में 61.09 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढकऱ 63.61 लाख टन हो गया। यानी एक साल में उत्पादन में करीब 2.52 लाख टन की बढ़ोतरी हुई। यदि पांच साल पहले की स्थिति देखें तो 2020-21 में प्रदेश में 54.40 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस लिहाज से पांच साल में उत्पादन करीब 9.21 लाख टन बढ़ा है।
    गन्ने का रकबा भी बढ़ा
    चीनी उत्पादन बढऩे के साथ गन्ने की खेती का क्षेत्र भी बढ़ा है। 2024-25 में प्रदेश में गन्ने का रकबा करीब 1.07 लाख हेक्टेयर था, जो 2025-26 में बढकऱ 1.08 लाख हेक्टेयर हो गया। हालांकि 2023-24 में यह रकबा करीब 1.15 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था। यानी मौजूदा आंकड़ों में गन्ने की खेती में कोई ऐसी बड़ी गिरावट नहीं दिखती, जिससे प्रदेश में चीनी उत्पादन में भारी कमी का अनुमान लगाया जाए। इसके उलट पिछले साल के मुकाबले उत्पादन में वृद्धि दर्ज हुई है।
    पांच साल में उतार-चढ़ाव के बाद फिर बढ़ा उत्पादन
    प्रदेश में चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें साल-दर-साल काफी उतार-चढ़ाव रहा है। 2020-21 में 54.40 लाख टन उत्पादन हुआ था। 2021-22 में यह घटकर 53.79 लाख टन रह गया। इसके बाद 2022-23 में उत्पादन बढकऱ 64.43 लाख टन और 2023-24 में रिकॉर्ड 75.90 लाख टन तक पहुंच गया। हालांकि 2024-25 में उत्पादन गिरकर 61.09 लाख टन रह गया। इसके बाद 2025-26 में फिर सुधार हुआ और उत्पादन 63.61 लाख टन पहुंच गया।
    19 के आसपास चीनी मिलें चालू
    प्रदेश में वर्तमान में करीब 19 चीनी मिलें संचालित हैं। लोकसभा में 2025 में दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में प्रदेश की छह चीनी मिलें बंद हुई हैं। अब सरकार बंद मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में भी कदम उठा रही है। कैलारस चीनी मिल को चालू करने के लिए हाल ही में सरकार ने अभिरुचि आमंत्रित की है। मध्य प्रदेश में चीनी उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र नरसिंहपुर माना जाता है। इसे प्रदेश का चीनी का कटोरा भी कहा जाता है। इसके अलावा सीहोर, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, बड़वानी, जबलपुर, देवास, मंदसौर, उज्जैन और रतलाम प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र हैं।
    इथेनॉल से जोडकऱ देखना कितना सही?
    चीनी की कीमतों में तेजी के बीच एक तर्क यह दिया जा रहा है कि गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने से चीनी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। लेकिन मध्य प्रदेश के उपलब्ध उत्पादन और रकबे के आंकड़े इस तर्क को सीधे तौर पर पुष्ट नहीं करते। प्रदेश में 2025-26 के दौरान चीनी उत्पादन पिछले साल से अधिक रहा है और गन्ने का रकबा भी बढ़ा है। इसलिए यहां कीमतों में तेजी के कारणों को समझने के लिए उत्पादन के साथ स्टॉक, मांग-आपूर्ति, मिलों की बिक्री, थोक बाजार, भंडारण और कालाबाजारी जैसे अन्य कारकों की भी जांच जरूरी होगी।
    नरसिंहपुर से लेकर सीहोर तक गन्ने का नेटवर्क
    प्रदेश में गन्ने की खेती कुछ चुनिंदा जिलों में केंद्रित है। नरसिंहपुर इसका प्रमुख केंद्र है, जबकि बुरहानपुर, नर्मदापुरम, सीहोर और बैतूल समेत कई जिलों में भी बड़े पैमाने पर गन्ना पैदा होता है। इन क्षेत्रों की चीनी मिलें स्थानीय किसानों से गन्ना खरीदकर चीनी उत्पादन करती हैं। इसलिए प्रदेश के आंकड़े फिलहाल यह संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश में चीनी उत्पादन संकट की तस्वीर उतनी सीधी नहीं है, जितनी बढ़ती कीमतों से दिखाई दे रही है। उत्पादन 63 लाख टन से ऊपर पहुंच चुका है और गन्ने का क्षेत्र भी एक लाख हेक्टेयर से अधिक बना हुआ है। अब असली सवाल यह है कि पर्याप्त उत्पादन के बावजूद बाजार में चीनी महंगी क्यों हो रही है और इसका लाभ किसान, मिल और उपभोक्ता—इनमें से किसे कितना मिल रहा है।

Related Articles