पर्यावरण मंजूरी: कोर्ट के आदेश के बाद होगी कार्रवाई

केंद्र की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की; मंजूरियों की वैधता और अफसरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।* मध्यप्रदेश के बहुचर्चित 237 डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) मामले में केंद्र सरकार की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मामले की जांच पूरी कर ली है और अब रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि, जांच के बाद कार्रवाई का रास्ता अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से होकर गुजरेगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट का रुख सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भोपाल सांसद आलोक शर्मा की शिकायत के जवाब में दी है। सांसद ने इन 237 मंजूरियों को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र से इन्हें निरस्त करने और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।विवाद की जड़ में वे 237 डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरियां हैं, जिन्हें लेकर पिछले वर्ष से ही सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मध्यप्रदेश में इन मंजूरियों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के लिए गठित स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) के बजाय अधिकारियों के स्तर पर जारी किया गया। इन मंजूरियों की वैधता को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि संबंधित प्रकरण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर दर्ज नहीं दिखाई दिए। परिवेश पोर्टल पर पर्यावरणीय मंजूरियों का रिकॉर्ड उपलब्ध होना परियोजनाओं की अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। अब केंद्र की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच पूरी होने के बाद इन मामलों में दस्तावेजी और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद बढ़ गई है।*भोपाल के पास 17 एकड़ जंगल में खनन अनुमति का आरोप*भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री को भेजे पत्र में मामले से जुड़ा एक गंभीर उदाहरण भी सामने रखा है। सांसद के अनुसार, भोपाल के पास मस्तीपुरा गांव में करीब 17 एकड़ घने सरकारी जंगल में खनन की अनुमति दिए जाने का आरोप है। सांसद ने दावा किया है कि इस मामले में कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में भी संबंधित जमीन पर जंगल होने की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद वहां खनन की अनुमति दिए जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित पर्यावरणीय मंजूरी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर दर्ज नहीं है। सांसद के मुताबिक, यदि किसी परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी का रिकॉर्ड ही केंद्रीय पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है तो उसकी वैधानिक स्थिति की गंभीरता से जांच की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष केंद्र की जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।*सांसद ने बताया पर्यावरणीय नुकसान की बड़ी साजिश*केंद्रीय मंत्री को भेजे पत्र में सांसद ने पूरे मामले को पर्यावरण संरक्षण और सरकारी भूमि की सुरक्षा से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारी जंगलों और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में नियमों को दरकिनार कर खनन की अनुमति दी गई है तो इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो सकता है, बल्कि सरकारी जमीन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। सांसद ने विवादित 237 मंजूरियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और जिन अधिकारियों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।*केंद्र ने कहा- जांच अंतिम चरण में*सांसद की शिकायत के जवाब में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि मंत्रालय की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मामले की जांच पूरी कर ली है और रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। केंद्र ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने का अर्थ तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है। मामले में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी अब जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद भी केंद्र सरकार न्यायिक दिशा-निर्देशों का इंतजार करेगी।*सिया की भूमिका पर भी उठे सवाल*इस पूरे विवाद में मध्यप्रदेश स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी यानी सिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है। सांसद के पत्र में आरोप लगाया गया है कि 237 विवादित मामलों में वैधानिक प्रक्रिया के बजाय अधिकारियों ने पर्यावरणीय मंजूरियां जारी कीं। वहीं दूसरी ओर, सिया द्वारा वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी किए गए कुछ अन्य मामलों के भी परिवेश पोर्टल पर दर्ज नहीं होने का मुद्दा सामने आया है। इससे सवाल यह उठता है कि पर्यावरणीय मंजूरियों के रिकॉर्ड को केंद्रीय पोर्टल पर अपडेट करने की प्रक्रिया में चूक कहां हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।*मेंबर सेक्रेटरी बदले जाने का भी मामला*परिवेश पोर्टल पर प्रकरण दर्ज नहीं होने को लेकर सिया के तत्कालीन चेयरमैन द्वारा तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन से शिकायत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद सिया के मेंबर सेक्रेटरी को बदला गया था। अब इस घटनाक्रम को भी 237 डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरियों के विवाद से जोडकऱ देखा जा रहा है। जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि पोर्टल पर रिकॉर्ड दर्ज न होने के पीछे तकनीकी, प्रशासनिक या प्रक्रिया संबंधी कारण क्या थे और क्या इसके कारण किसी परियोजना को अनुचित लाभ मिला।

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