तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। नदियां, झीलें, हवा और जंगल एक तरह से आम आदमी की धरोहर हैं, जो सरकार के पास सुरक्षित रखी हैं। लेकिन इनका निजी स्वामित्व या दुरुपयोग एक तरह से असंवैधानिक है। यह टिप्पणी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोन बेंच ने मप्र में जल निकायों, सार्वजनिक भूमियों पर हो रहे अवैध कब्जे और मास्टर प्लान का उल्लंघन कर नियमों के विरुद्ध किए जा रहे निर्माण को लेकर की है। जस्टिस श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सोबरन यादव विरुद्ध मध्य प्रदेश सरकार मामले पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। यादव ने टीकमगढ़ स्थित महेंद्र सागर तालाब व अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर हुए कब्जे, बिना अनुमति निर्माण और वेटलैंड एक्ट 2017 की अनदेखी को लेकर बैंच के समक्ष याचिका दायर की है। मामले में सुनवाई करते हुए बैंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अगले आदेश तक प्रदेश में वेटलैंड, जल निकायों, जंगलों और सरकारी जमीन पर हुए कब्जों की जमीनी स्थिति नहीं बदलती है, तो सीधे संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय कर दी जाएगी। टीकमगढ़ सहित अन्य मामलों में बैंच ने नगर निगम आयुक्तों, सीएमओ और जिला कलेक्टरों को दो हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर की गई वास्तविक जमीनी कार्रवाई का ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि एनजीटी का यह फैसला भोपाल के बड़े तालाब सहित प्रदेश के अन्य बड़े जलस्रोतों के लिए भी महत्वपूर्ण है। मामले में सभी जलाशयों से अवैध कब्जे हटाकर इसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट 2 हफ्ते में पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान बैंच ने सार्वजनिक न्यास का सिद्धांत और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कानून के रक्षक ही कानून तोडऩे वाले बन जाएं, तो कानून की रक्षा कैसे होगी? *जिनकी लापरवाही, उनके खिलाफ एक्शन*सुनवाई के दौरान बैंच ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त के साथ संबंधित सभी अधिकारियों को आदेश जारी किया है कि जलस्रोतों के मामले में हर हाल में मास्टर प्लान, टीएंडसीपी और वेस्टलैंड एक्ट का हर हाल में कड़ाई के साथ पालन हो। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि जिन अधिकारियों की देखरेख या लापरवाही में अवैध निर्माण और कब्जे हुए हैं, उनके खिलाफ तत्काल विभागीय जांच और कार्रवाई शुरू हो। साथ ही इसका ब्योरा शपथ पत्र में दिया जाएगा। यदि अधिकारी अवैध निर्माणों को रोकने में असफल रहते हैं, तो माना जाएगा कि यह सब उनकी मिलीभगत से हुआ है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए सभी सार्वजनिक सडक़ों और क्षेत्रों से आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश दिए।
