भाजपा नए-युवा चेहरों पर लगाएगी दांव!

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  • 2027 के निकाय चुनाव  की तैयारी शुरू, सीधे चुनाव से बदलेगा निकायों का राजनीतिक समीकरण

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 से पहले भाजपा और कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। भाजपा ने अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले की बड़ी राजनीतिक परीक्षा मानते हुए संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की नजर प्रदेश के 413 नगरीय निकायों पर है। वहीं दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत से उत्साहित कांग्रेस अब 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और प्रदेशव्यापी आंदोलन खड़े करने की रणनीति बनाने जा रही है। भाजपा की रणनीति में इस बार सबसे बड़ा बदलाव नए और युवा चेहरों को आगे लाने का है। पार्टी स्तर पर यह विचार किया जा रहा है कि 30 से 50 वर्ष आयु वर्ग के नेताओं को पार्षद पद के लिए अधिक अवसर दिए जाएं। महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 60 वर्ष से कम उम्र के चेहरों को प्राथमिकता देने की तैयारी है। पार्टी गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को भी चुनावी मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में महापौर के साथ नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों के चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने की प्रक्रिया तय की गई है। यानी मतदाता सीधे अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। वर्ष 2022 के चुनाव में महापौर को छोडकऱ नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से हुआ था। इस बदलाव के कारण भाजपा ने अभी से संभावित उम्मीदवारों और संगठनात्मक समीकरणों पर काम शुरू कर दिया है। नगरीय विकास विभाग द्वारा वार्डों का पुनरीक्षण पूरा किया जा चुका है और राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का प्रकाशन कर चुका है। ऐसे में अब राजनीतिक दलों के पास चुनावी तैयारी के लिए स्पष्ट आधार उपलब्ध है।
एंटी-इनकमबेंसी से निपटने युवा चेहरों पर भरोसा
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन निकायों में है, जहां वर्तमान अध्यक्षों और पार्षदों को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। पार्टी संगठन मानता है कि लंबे समय से पदों पर बने रहने वाले चेहरों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर एंटी-इनकमबेंसी पैदा हो सकती है। इसीलिए पार्टी सत्ता और संगठन में पीढ़ी परिवर्तन की रणनीति को निकाय चुनावों में भी लागू करने की तैयारी में है। 30 से 50 वर्ष आयु वर्ग के नेताओं को पार्षद पदों पर प्राथमिकता देने और अध्यक्ष-महापौर के लिए अपेक्षाकृत युवा चेहरों को सामने लाने पर विचार चल रहा है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में अपवाद की गुंजाइश भी रखी जाएगी।
गैर-राजनीतिक चेहरों को भी मौका
भाजपा की रणनीति का एक और अहम हिस्सा गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को निकाय चुनाव में अवसर देना है। पार्टी का मानना है कि ऐसे लोगों को आगे लाकर स्थानीय राजनीति में नई ऊर्जा और अपेक्षाकृत स्वच्छ छवि वाले चेहरे सामने लाए जा सकते हैं। 

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